श्यामपुर मुखर्जी टोला में 'पंचमुखी हनुमान मंदिर' की प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का भव्य आगाज

कहलगांव (भागलपुर): भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत श्यामपुर मुखर्जी टोला में बुधवार का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के रंग से सराबोर रहा। यहाँ के नवनिर्मित पंचमुखी हनुमान मंदिर में चार दिवसीय 'प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ' का भव्य शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ जुटी है और पूरा इलाका 'जय श्री राम' और 'हनुमान जी महाराज की जय' के उद्घोष से गूंज उठा है।

प्रथम दिन का अनुष्ठान: वैदिक मंत्रोच्चारण से गुंजायमान हुआ वातावरण

महायज्ञ के पहले दिन की शुरुआत प्रातःकाल से ही वैदिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। काशी और अन्य धार्मिक केंद्रों से पधारे विद्वान पंडितों ने शास्त्रोक्त विधि-विधान से यज्ञ मंडप का पूजन किया।

कलश यात्रा: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भव्य कलश शोभायात्रा रही। सैकड़ों की संख्या में कुंवारी कन्याओं और महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर पूरे गांव का भ्रमण किया। 'जयकारे' लगाते हुए भक्त गंगा घाट पहुंचे, जहाँ जल भरकर पूरे विधि-विधान से इसे मंदिर परिसर में स्थापित किया गया।

मंत्रोच्चारण: यज्ञ स्थल पर आचार्य द्वारा किए जा रहे वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण पूरी तरह से शुद्ध और सकारात्मक हो गया है। श्रद्धालु घंटों बैठकर इन मंत्रों को सुनकर आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।

सुंदरकांड पाठ और भक्ति का रस

कलश स्थापना के उपरांत, दोपहर बाद मंदिर परिसर में 'सुंदरकांड' का संगीतमय पाठ आयोजित किया गया। स्थानीय कलाकारों और भक्तों ने मिलकर हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया। सुंदरकांड की चौपाइयां जब गूंजती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे स्वयं बजरंगबली वहाँ उपस्थित हों। इस पाठ में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि, "यह मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि पूरे गांव के निवासियों की अटूट आस्था का केंद्र है। सालों से हम एक ऐसे मंदिर की कामना कर रहे थे जहाँ सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना हो सके।"

प्राण प्रतिष्ठा: एक आध्यात्मिक प्रक्रिया

पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एक अत्यंत पवित्र और कठिन प्रक्रिया है। यज्ञ के दौरान पंडितों द्वारा प्रतिमा को विशेष औषधियों, गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद, प्रतिमा में 'प्राण' का संचार करने के लिए विशेष मंत्रों का जप किया जाता है। माना जाता है कि इस प्रक्रिया के बाद प्रतिमा में साक्षात ईश्वर का वास हो जाता है और वे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने में समर्थ होते हैं।

चार दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा

समिति ने बताया कि यह महायज्ञ चार दिनों तक चलेगा:

प्रथम दिन: कलश यात्रा और पूजन।

द्वितीय दिन: वेदी पूजन, मंडप परिक्रमा और हनुमान चालीसा का अखंड पाठ।

तृतीय दिन: मुख्य प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान, हवन और मूर्तियों का अभिषेक।

चतुर्थ दिन: महाप्रसाद (भंडारा) का वितरण और भव्य शोभायात्रा।

गांव में उत्सव का माहौल

श्यामपुर मुखर्जी टोला का नजारा इस समय किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। घर-घर में उत्सव जैसा माहौल है। दूर-दराज से रिश्तेदार और भक्त कहलगांव पहुंच रहे हैं। आने वाले भक्तों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था समिति द्वारा की गई है।

अध्यक्ष ने बताया, "इस आयोजन को सफल बनाने में युवा शक्ति का विशेष योगदान है। गांव के नौजवानों ने रात-दिन एक कर मंदिर के निर्माण से लेकर टेंट-पंडाल की व्यवस्था तक को संभाला है।"

भंडारा: सेवा का महाआयोजन

महायज्ञ के अंतिम दिन यानी शनिवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। इसमें हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है। समिति ने अपील की है कि सभी भक्त प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का भागी बनें। सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है और मंदिर आने वाले रास्तों पर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं।

 सामाजिक सद्भाव का प्रतीक

कहलगांव के श्यामपुर मुखर्जी टोला में हो रहा यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता का भी उदाहरण है। जिस तरह से पूरा गांव एकजुट होकर इस महायज्ञ में सहयोग दे रहा है, वह प्रेरणादायक है।

पंचमुखी हनुमान जी की यह प्रतिमा यहाँ के निवासियों के दुखों को दूर करने और गांव में सुख-समृद्धि लाने की प्रतीक मानी जा रही है। आप भी यदि भागलपुर क्षेत्र में हैं, तो इस ऐतिहासिक और पावन अवसर का हिस्सा बनने के लिए कहलगांव का रुख कर सकते हैं। यह प्राण प्रतिष्ठा समारोह आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक अमिट याद बनकर रह जाएगा।