मध्य विद्यालय जगदीशपुर में 'हर-घर तिरंगा अभियान' के तहत भव्य आयोजन; 150 तिरंगों और भव्य रंगोली के साथ गूंजे 'वंदे मातरम' के नारे, प्रधानाध्यापक आशुतोष चंद्र मिश्र के नेतृत्व में छात्रों ने रचा इतिहास
भागलपुर/गोराडीह (विशेष संवाददाता): स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व से ठीक पहले देश भर में राष्ट्रप्रेम की जो लहर दौड़ती है, उसका जीवंत और प्रेरणादायी उदाहरण भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय जगदीशपुर में देखने को मिला। 'हर-घर तिरंगा अभियान' (Har Ghar Tiranga Abhiyan) के तहत विद्यालय परिसर में एक अत्यंत भव्य, आकर्षक और देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय के ऊर्जावान प्रधानाध्यापक आशुतोष चंद्र मिश्र के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय ग्रामीणों ने भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस आयोजन की सबसे बड़ी और खास आकर्षण का केंद्र वह विशाल और अद्भुत रंगोली रही, जिसे स्कूली बच्चों ने 150 तिरंगों के साथ सजाकर तैयार किया था। इस आयोजन ने पूरे इलाके में देशभक्ति की एक ऐसी अलख जगाई, जिसने हर देखने वाले का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
क्या है 'हर-घर तिरंगा अभियान' और इसका उद्देश्य?
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया 'हर-घर तिरंगा' अभियान अब देश के सांस्कृतिक और राष्ट्रीय उत्सव का एक अहम हिस्सा बन चुका है:
राष्ट्रीयता की भावना का विस्तार: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के दिलों में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान जगाना और देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करना है।
बच्चों में संस्कार की नींव: जब छोटे-छोटे बच्चे अपने हाथों से तिरंगा थामते हैं और रंगोली बनाते हैं, तो उनके भीतर बचपन से ही देश के प्रति कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के बीज अंकुरित होते हैं। मध्य विद्यालय जगदीशपुर का यह आयोजन इसी वैचारिक सोच को धरातल पर उतारने का एक उत्कृष्ट प्रयास था।
रंगोली और 150 तिरंगों का वह अद्भुत संगम
कार्यक्रम के दिन मध्य विद्यालय जगदीशपुर का प्रांगण किसी भव्य राष्ट्रीय उत्सव स्थल में तब्दील हो चुका था:
150 तिरंगों की शान: विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी कला और रचनात्मकता का परिचय देते हुए कुल 150 तिरंगे झंडों को व्यवस्थित रूप से सजाया। इन तिरंगों की छांव में बनाई गई रंगोली ने पूरे परिसर को तीन रंगों (केसरिया, सफेद और हरा) में रंग दिया।
कला के माध्यम से संदेश: बच्चों ने रंगोली के जरिए भारत माता का नक्शा, अशोक चक्र और 'वंदे मातरम' जैसे प्रेरणादायी स्लोगन उकेरे। इस आकर्षक कलाकृति को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण और अभिभावक भी बड़ी संख्या में विद्यालय पहुंचे और बच्चों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
प्रधानाध्यापक आशुतोष चंद्र मिश्र के नेतृत्व में सजा कार्यक्रम
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष चंद्र मिश्र की भूमिका सबसे अहम रही:
प्रेरणास्रोत बने शिक्षक: कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने से लेकर उसे अमलीजामा पहनाने तक, प्रधानाध्यापक ने हर कदम पर बच्चों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि, "तिरंगा केवल एक कपड़ा या तीन रंगों का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों नागरिकों की अस्मिता, त्याग और स्वतंत्रता का प्रतीक है।"
शिक्षकों का सहयोग: विद्यालय के अन्य सहायक शिक्षकों और कर्मियों ने भी इस आयोजन को भव्य बनाने में पूरा सहयोग दिया। समय प्रबंधन और अनुशासन का जो परिचय बच्चों ने दिया, उसकी सराहना हर किसी ने की।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और देशभक्ति के तराने
रंगोली और तिरंगा सजाने के बाद विद्यालय परिसर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया:
गीत और भाषण: छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति गीत ("ऐ मेरे वतन के लोगों", "सारे जहाँ से अच्छा") गाकर और ओजस्वी भाषण देकर सबका मन मोह लिया।
नारेबाजी और जोश: पूरा स्कूल परिसर "भारत माता की जय", "वंदे मातरम" और "इन्कलाब जिंदाबाद" के नारों से गूंज उठा। बच्चों की आंखों में चमक और चेहरों पर देशप्रेम का जो भाव था, वह देखने लायक था।
ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों की प्रतिक्रिया
जगदीशपुर गांव के लोगों ने विद्यालय के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की है:
"सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर": ग्रामीणों का कहना था कि आज के दौर में सरकारी विद्यालय केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऐसे आयोजनों के जरिए वे बच्चों में संस्कारों की मजबूत नींव भी रख रहे हैं।
प्रेरणादायक पहल: अभिभावकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों में अपनी संस्कृति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर बढ़ता है, जो आधुनिक समय में बेहद जरूरी है।
गोराडीह के मध्य विद्यालय जगदीशपुर में प्रधानाध्यापक आशुतोष चंद्र मिश्र के नेतृत्व में आयोजित 'हर-घर तिरंगा अभियान' का यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के दिलों में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने का एक स्वर्णिम प्रयास था। 150 तिरंगों और भव्य रंगोली के साथ सजा यह उत्सव यह साबित करता है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो हमारे सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देशप्रेम की मिसाल पेश करने में सबसे आगे रहते हैं। यह आयोजन भागलपुर के शैक्षणिक इतिहास में एक यादगार पन्ने के रूप में हमेशा दर्ज रहेगा।