पुराने विषहरी मंदिर में नए भव्य मंदिर की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव पर निकाली गई ऐतिहासिक कलश यात्रा; गाजे-बाजे और जयकारों से गूंजा पूरा क्षेत्र, सैकड़ों भक्तों ने भरा गंगाजल
भागलपुर/अकबरनगर (विशेष संवाददाता): आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक उल्लास के पावन संगम के बीच भागलपुर जिले के अकबरनगर क्षेत्र में इन दिनों उत्सव जैसा माहौल है। अवसर है अकबरनगर के ऐतिहासिक और प्राचीन विषहरी मंदिर परिसर में नवनिर्मित भव्य मंदिर में मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ का। इस पावन अनुष्ठान के पहले दिन बुधवार को एक भव्य और विशाल कलश यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे इलाके को भक्ति के रंगों में रंग दिया। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और गगनभेदी जयकारों के बीच निकाली गई इस कलश यात्रा में बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं, युवतियों और श्रद्धा से ओत-प्रोत स्थानीय ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। पवित्र गंगाजल से भरे कलश लेकर जब यह यात्रा पारंपरिक मार्गों से गुजरी, तो हर तरफ 'जय मां विषहरी' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंज उठे। इस धार्मिक आयोजन से संपूर्ण अकबरनगर क्षेत्र पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है।
क्यों खास है यह मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव?
किसी भी धार्मिक स्थल पर मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा सनातन संस्कृति में एक अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान अनुष्ठान माना जाता है:
पुराने इतिहास से नए भव्य स्वरूप तक: अकबरनगर का पुराना विषहरी मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र रहा है। समय के साथ मंदिर के जीर्णोद्धार और एक नए भव्य मंदिर के निर्माण के बाद अब इसमें देवी मां की नई मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की जा रही है।
धार्मिक और सांस्कृतिक एकता: इस तरह के बड़े आयोजनों से न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि पूरे समाज के लोग एकजुट होकर बढ़-चढ़कर अपनी संस्कृति और परंपराओं का निर्वहन करते हैं।
कलश यात्रा का आकर्षक स्वरूप और रूट
प्रातःकाल से ही पुराने विषहरी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया था:
पारंपरिक वेशभूषा और अनुष्ठान: कलश यात्रा में शामिल होने वाली महिलाएं और युवतियां पीले और लाल वस्त्रों में सजी थीं। सिर पर पवित्र गंगाजल से भरे कलश और हाथों में ध्वज-पताकाएं थामे भक्तों का यह जत्था अनुशासन और श्रद्धा की अनूठी मिसाल पेश कर रहा था।
डीजे और पारंपरिक वाद्यों की गूंज: यात्रा के आगे-आगे चल रहे बैंड-बाजे, डीजे पर बज रहे भक्ति गीत और ढोल-ताशों की थाप पर युवा थिरकते नजर आए। पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से सराबोर था।
गंगा तट से जल भराई: कलश यात्रा मंदिर परिसर से चलकर पास ही स्थित पावन उत्तरवाहिनी गंगा तट पर पहुँची। वहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुरोहितों ने अनुष्ठान कराया, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर और आचमन कर अपने-अपने कलशों में पवित्र गंगाजल भरा।
वैदिक मंत्रोच्चार और ब्राह्मणों की उपस्थिति
कलश यात्रा के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया:
आचार्य और विद्वान पंडित: प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए काशी और स्थानीय क्षेत्रों से आए विद्वान पंडितों और आचार्यों की देखरेख में पूजा-पाठ शुरू हो गया है। गंगाजल भरने के बाद सभी कलशों को मंदिर परिसर में बनाए गए भव्य यज्ञ मंडप में स्थापित किया गया।
पंच दिवसीय अनुष्ठान: आयोजकों ने बताया कि यह मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव पांच दिनों तक चलेगा, जिसके दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, हवन और रात्रि में सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
ग्रामीणों और कमेटियों का सराहनीय सहयोग
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अकबरनगर के स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और विषहरी मंदिर कमेटियों का अभूतपूर्व योगदान रहा है:
स्वयंसेवकों की मुस्तैदी: कलश यात्रा के दौरान किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो, इसके लिए युवा स्वयंसेवकों ने जगह-जगह पानी और शरबत की व्यवस्था की थी। सुरक्षा और यातायात को नियंत्रित करने में स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी पूरा सहयोग दिया।
स्वागत द्वार और सजावट: पूरे बाजार और मंदिर मार्ग को भव्य स्वागत द्वारों, फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है, जिससे आने-जाने वाले हर व्यक्ति का ध्यान इस ऐतिहासिक आयोजन की ओर आकर्षित हो रहा है।
अकबरनगर के पुराने विषहरी मंदिर में नए मंदिर की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर निकाली गई यह भव्य कलश यात्रा सनातन संस्कृति और अटूट आस्था का एक जीवंत उदाहरण है। गंगाजल कलश यात्रा के साथ शुरू हुए इस पांच दिवसीय अनुष्ठान ने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया है। आने वाले दिनों में होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है, और हर कोई इस अलौकिक पल का साक्षी बनने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है।