डोभी-पटना फोरलेन पर कार और ट्रक की भीषण टक्कर, जिंदा जलकर दो लोगों की मौत और प्रशासनिक सुरक्षा पर उठे सवाल

परिचय

बिहार में सड़कें जितनी बेहतर हो रही हैं, उतनी ही तेज रफ्तार लोगों के लिए काल बनती जा रही है। गुरुवार, 9 जुलाई के दिन गया जिले के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक शहर बोधगया के पास एक ऐसा दिल दहला देने वाला और खौफनाक सड़क हादसा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। बोधगया के अंतर्गत आने वाले व्यस्ततम डोभी-पटना फोरलेन (Dobhi-Patna Four-Lane) पर सिजुआ गांव (Sijua Village) के समीप एक तेज रफ्तार कार और विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक के बीच आमने-सामने की भीषण टक्कर हो गई।

यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और चंद सेकंड के भीतर उसमें भयानक आग भड़क उठी। आग इतनी विकराल थी कि कार सवार दो लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे वाहन के अंदर ही जिंदा जल गए। वहीं, इस भीषण अग्निकांड में कार का चालक गंभीर रूप से झुलस गया है, जिसे स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दुर्घटना के बाद से मृतकाें के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और फोरलेन की सुरक्षा व्यवस्था तथा यातायात नियमों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आइए इस दुखद और भयानक घटना का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

दुर्घटना की सुबह: सिजुआ गांव के पास क्या हुआ था?

घटना गुरुवार सुबह की है जब डोभी-पटना फोरलेन पर वाहनों की सामान्य आवाजाही चल रही थी। सिजुआ गांव के पास का यह हिस्सा अक्सर अपनी तीव्र गति और वाहनों के ओवरटेकिंग जोन के कारण संवेदनशील माना जाता है।

अचानक हुई तेज टक्कर: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार बेहद उच्च गति में थी और संभवतः आगे चल रहे किसी अन्य वाहन को ओवरटेक करने के प्रयास में अनियंत्रित हो गई। दूसरी ओर से आ रहे भारी-भरकम ट्रक से उसका सीधा और भीषण संघर्ष हो गया। टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के खेतों और घरों में मौजूद ग्रामीण तुरंत दौड़ पड़े।

चंद पलों में आग का गोला बनी कार: टक्कर के झटके से कार का इंजन क्षेत्र (Engine Compartment) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और तुरंत शॉर्ट-सर्किट या फ्यूल टैंक लीक होने के कारण चिंगारी भड़क उठी। एथनॉल-मिश्रित आधुनिक ईंधन या पेट्रोल की तीव्र प्रकृति के कारण आग ने चंद पलों में ही पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। कार के दरवाजे भीषण टक्कर के कारण लॉक हो चुके थे, जिससे अंदर बैठे यात्रियों के लिए बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह बंद हो गए।

जिंदा जलने की खौफनाक दास्तान और बचाव कार्य

आग की लपटें इतनी तेज थीं कि शुरुआती कुछ मिनटों तक कोई भी ग्रामीण या राहगीर जलती हुई कार के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

चालक की जान बचाने का संघर्ष: गनीमत यह रही कि कार का चालक किसी तरह खिड़की के टूटे हुए हिस्से या आंशिक रूप से खुले दरवाजे के जरिए बाहर छिटककर या खिंचकर निकलने में कामयाब रहा, लेकिन तब तक उसका शरीर बुरी तरह झुलस चुका था। चालक की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोगों ने पानी और बालू फेंककर आग पर काबू पाने का असफल प्रयास किया।

दो जिंदगियों का अंत: जब तक दमकल विभाग (Fire Brigade) और स्थानीय थाने की पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक कार के अंदर सवार दो लोग अंदर ही पूरी तरह जल चुके थे। स्थिति इतनी वीभत्स थी कि दोनों शवों की पहचान करना भी घटनास्थल पर तुरंत संभव नहीं हो पाया। पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद दमकल की मदद से आग को पूरी तरह बुझाया और दोनों जले हुए शवों को कार के मलबे से बाहर निकाला।

फोरलेन पर बढ़ते हादसे और प्रशासनिक लापरवाही

डोभी-पटना फोरलेन का यह मार्ग बिहार के महत्वपूर्ण आर्थिक और यातायात गलियारों में से एक है। इस सड़क के बन जाने के बाद से वाहनों की रफ्तार तो कई गुना बढ़ गई है, लेकिन इसके अनुपात में सुरक्षा मानकों और यातायात निगरानी की व्यवस्था बेहद कमजोर नजर आती है।

गलत दिशा (Wrong-Side Driving) और ओवरस्पीडिंग: स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस फोरलेन पर अक्सर ट्रक और भारी वाहन गलत दिशा में चलते हैं या डिवाइडर के अवैध कटों (Illegal Cuts) का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा वाहनों की बेकाबू गति पर लगाम लगाने के लिए कोई प्रभावी ऑटोमैटिक स्पीड रडार या ट्रैफिक पुलिस की गश्त नियमित रूप से नहीं होती है।

अग्निशमन सेवाओं की दूरी: ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाले इन फोरलेन मार्गाें पर यदि समय रहते फायर ब्रिगेड की गाड़ियां न पहुंचें, तो इस तरह के हादसों में लोगों को जीवित बचाना नामुमकिन हो जाता है। इस घटना में भी जब तक प्रशासनिक मदद मिली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही बोधगया थाने की पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने गंभीर रूप से झुलसे हुए चालक को बेहतर इलाज के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (ANMMCH) में भर्ती कराया है, जहां उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

वाहन के नंबर से शिनाख्त की कोशिश: पुलिस ने कार के बचे हुए चेसिस नंबर और रजिस्ट्रेशन प्लेट के आधार पर वाहन मालिक और मृतकों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कार कहां से आ रही थी और कहां जा रही थी।

ट्रक चालक की तलाश: दुर्घटना को अंजाम देने के बाद ट्रक चालक मौके से वाहन छोड़कर फरार हो गया या ट्रक को लेकर आगे निकल गया, इसकी भी जांच सीसीटीवी फुटेज के जरिए की जा रही है। पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में लेने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

9 जुलाई को बोधगया के सिजुआ गांव के पास हुआ यह भीषण सड़क हादसा यह चेतावनी है कि सड़क पर जरा सी लापरवाही या तेज रफ्तार किस प्रकार पल भर में हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ सकती है। कार और ट्रक की टक्कर के बाद आग लगने से दो लोगों की जिंदा जलकर मौत हो जाने की यह घटना बेहद हृदयविदारक है। प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को न केवल ऐसे फोरलेन मार्गाें पर सुरक्षा और साइनेज दुरुस्त करने चाहिए, बल्कि चालकों को भी यातायात के नियमों के प्रति अत्यधिक सजग रहने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह के वीभत्स हादसों से बचा जा सके।