पूर्णिया/जलालगढ़: रामदेली पंचायत के डुमरा गांव में भव्य शारदीय खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन; कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने किसानों को दिए उन्नत खेती के गुर, धान की फसल व आधुनिक तकनीकों पर हुई विस्तृत चर्चा

पूर्णिया/जलालगढ़ (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के कृषि बहुल क्षेत्रों से अन्नदाताओं के कल्याण और उनके कौशल विकास से जुड़ी एक बेहद उत्साहवर्धक और ज्ञानवर्धक खबर सामने आ रही है। जलालगढ़ प्रखंड के अंतर्गत आने वाली रामदेली पंचायत के डुमरा गांव में बुधवार को शारदीय खरीफ किसान गोष्ठी का एक भव्य आयोजन किया गया। इस कृषि गोष्ठी में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और इलाके के सैकड़ों प्रगतिशील किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ फसल (विशेषकर धान की उन्नत खेती), खाद-बीज के सही इस्तेमाल, आधुनिक कृषि यंत्रों और सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी देना था। गोष्ठी के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं को सुना और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती कर अपनी आय दोगुनी करने के बहुमूल्य सुझाव दिए।

कृषि को लाभ का धंधा बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में आयोजित इस कार्यक्रम का स्थानीय किसानों ने जमकर स्वागत किया है। आइए इस पूरी किसान गोष्ठी, चर्चा के मुख्य बिंदुओं और कृषि उन्नति के विभिन्न आयामों का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण समझते हैं।

शारदीय खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन और इसका उद्देश्य

बिहार में खरीफ सीजन की फसलें किसानों की आजीविका का मुख्य आधार होती हैं, ऐसे में समय पर सही मार्गदर्शन मिलना बेहद आवश्यक होता है।

भव्य आयोजन: जलालगढ़ प्रखंड के डुमरा गांव में आयोजित इस शारदीय खरीफ किसान गोष्ठी में आसपास की कई पंचायतों से बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक वेशभूषा और भारी उत्साह के साथ पहुंचे।

कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य: कृषि गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के तरीकों से आगे निकालकर आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी कृषि तकनीकों से जोड़ना था।

विशेषज्ञों की उपस्थिति: कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BEO) और जिला स्तर के कृषि अधिकारियों ने शिरकत की और किसानों का मार्गदर्शन किया।

धान की उन्नत खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेष चर्चा

खरीफ सीजन में धान की खेती प्रमुखता से की जाती है, इसलिए गोष्ठी का अधिकांश केंद्र धान की उन्नत किस्मों और देखभाल पर केंद्रित रहा।

श्री विधि (SRI Method) से खेती: कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की खेती की उन्नत 'श्री विधि' (System of Rice Intensification) के बारे में विस्तार से बताया, जिससे कम पानी और कम बीज में अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

उन्नत बीजों का चयन: वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि वे हमेशा प्रमाणित और रोग-प्रतिरोधी (Disease-Resistant) बीजों का ही चयन करें, ताकि मौसम की मार या कीटों के प्रकोप से फसल को बचाया जा सके।

उर्वरक और खाद का संतुलित प्रयोग: खेतों में यूरिया और रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने और जैविक खाद (Vermicompost) तथा गोबर की खाद के उपयोग पर बल दिया गया, जिससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।

कीट नियंत्रण और फसल सुरक्षा के वैज्ञानिक उपाय

फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक कीटों और रोगों से बचाव करना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है।

एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM): कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन की जानकारी दी, जिसके तहत रासायनिक कीटनाशकों के न्यूनतम प्रयोग और प्राकृतिक तरीकों से कीटों की रोकथाम के उपाय बताए गए।

मौसम आधारित सलाह: बदलते मौसम चक्र को ध्यान में रखते हुए फसलों की सिंचाई और सुरक्षा के लिए समय-समय पर कृषि विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की गई।

सरकारी योजनाओं और अनुदान (Subsidy) की जानकारी

सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनकी सही जानकारी न होने के कारण कई बार किसान लाभ से वंचित रह जाते हैं।

कृषि यंत्रीकरण योजना: गोष्ठी के दौरान अधिकारियों ने किसानों को ट्रैक्टर, पावर टिलर, धान काटने की मशीन (Harvester) और अन्य कृषि यंत्रों पर मिलने वाली भारी सब्सिडी के बारे में जानकारी दी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा: किसानों को समय पर पंजीकरण कराने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) बनवाने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों को सुरक्षित करने के तौर-तरीके समझाए गए।

किसान संवाद और समस्या समाधान: गोष्ठी के अंत में एक खुला सत्र आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने अपनी व्यक्तिगत कृषि समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा और मौके पर ही उनका समाधान प्राप्त किया

पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड स्थित रामदेली पंचायत के डुमरा गांव में आयोजित शारदीय खरीफ किसान गोष्ठी ग्रामीण विकास और कृषि उन्नति की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल किसानों का ज्ञानवर्धन होता है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक खेती के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त होता है। जब देश और राज्य का किसान आधुनिक तकनीकों से जुड़ेगा, तभी ग्रामीण भारत सही मायनों में आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकेगा।