बिहार में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बड़ी सौगात: नीतीश सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों के मानदेय भुगतान हेतु 2000 करोड़ रुपये की दी स्वीकृति; 1000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह किया गया मानदेय, 1 जुलाई 2025 से है प्रभावी

पटना (बिहार): बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं (ASHA Workers) और आशा फैसिलिटेटरों के लिए एक बहुत ही राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने इनके मानदेय और संविदा सेवाओं के भुगतान के लिए 2000 करोड़ रुपये (दो अरब रुपये) की राशि की स्वीकृति प्रदान कर दी है। स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए जाने के बाद से सूबे की हजारों महिला स्वास्थ्य कर्मियों में हर्ष का माहौल है। पूर्व में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जो कि 1 जुलाई 2025 से प्रभावी हो चुका है। इस वित्तीय स्वीकृति से मुजफ्फरपुर सहित पूरे बिहार की हजारों आशा कार्यकर्ताओं के बढ़े हुए मानदेय के भुगतान का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

ऐतिहासिक निर्णय: मानदेय में तीन गुना की वृद्धि

बिहार सरकार के इस कदम से लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत स्वास्थ्य कर्मियों को बड़ी आर्थिक संबलता मिली है।

एक हजार से बढ़कर हुआ तीन हजार रुपये: इससे पहले वर्ष 2019 में आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 1000 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था, जो वर्तमान समय की महंगाई के लिहाज से काफी कम था। उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए सरकार ने इसे तीन गुना बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दिया है।

दो अरब रुपये के बजट का प्रावधान: बढ़े हुए मानदेय के सुचारू भुगतान और वित्तीय वर्ष के मदों को मैनेज करने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति की मांग के बाद सरकार ने संविदा सेवाएं मद में व्यय के लिए इस भारी-भरकम राशि पर मुहर लगाई है। मुजफ्फरपुर जिले की बात करें तो अकेले यहाँ लगभग 3400 आशा कार्यकर्ता और 150 आशा फैसिलिटेटर कार्यरत हैं, जिन्हें इस संशोधित व्यवस्था का सीधा लाभ मिलेगा।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में आशा और ममता कार्यकर्ताओं की भूमिका

बिहार के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुधारने में इन जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को हमेशा से अहम माना गया है।

टीकाकरण और प्रसव में सहभागिता: आशा कार्यकर्ताएं गांवों में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, संस्थागत प्रसव, बच्चों के टीकाकरण और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने का कार्य करती हैं।

ममता कार्यकर्ताओं के प्रोत्साहन में भी हुई थी वृद्धि: उल्लेखनीय है कि इसी कड़ी में सरकार ने अस्पतालों में सेवा दे रही ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि को भी प्रति प्रसव 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया था। सरकार के इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल बढ़ाना है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके

बिहार सरकार द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में की गई इस वृद्धि और उसके भुगतान के लिए 2000 करोड़ रुपये की स्वीकृति यह दर्शाती है कि प्रशासन ग्रामीण स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के प्रति गंभीर है। लंबे समय से कम मानदेय को लेकर चिंतित रहने वाली इन महिला कर्मियों को अब वित्तीय स्थिरता मिलने की पूरी उम्मीद है, जिससे राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।