मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी का बड़ा खुलासा: ट्रक से बरामद 127 कार्टन विदेशी शराब, एक ही वाहन पर मिले पांच से अधिक नंबर प्लेट
बिहार में मद्य निषेध कानून को धता बताने वाले तस्करों के खिलाफ उत्पाद विभाग ने मुजफ्फरपुर में एक बड़ी सफलता हासिल की है। जिले के शिवदाहा गांव के समीप एक संदिग्ध ट्रक को जब्त कर विभाग ने न केवल भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की, बल्कि तस्करों के उस संगठित जाल का भी पर्दाफाश किया है, जिसे वे पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए इस्तेमाल करते थे।
घटना का विवरण: मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई
उत्पाद विभाग को लंबे समय से गुप्त सूचना मिल रही थी कि मुजफ्फरपुर के रास्ते भारी मात्रा में विदेशी शराब की तस्करी की जा रही है। शनिवार को विभाग को पुख्ता जानकारी मिली कि एक संदिग्ध ट्रक, जो तस्करी के सामान से लदा है, शिवदाहा गांव के पास से गुजरने वाला है। सूचना मिलते ही उत्पाद विभाग की टीम ने घेराबंदी की और शिवदाहा गांव के पास उक्त ट्रक को रुकने का इशारा किया।
ट्रक चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम की मुस्तैदी के कारण उसे दबोच लिया गया। जब ट्रक की सघन तलाशी ली गई, तो उसमें से 127 कार्टन विदेशी शराब बरामद की गई। शराब की यह खेप इतनी अधिक थी कि इसे पुलिस की गाड़ी में ले जाने के लिए कई चक्कर लगाने पड़े।
तस्करों की 'हाई-टेक' चालाकी: पांच से अधिक नंबर प्लेट
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब ट्रक के केबिन की तलाशी ली गई। पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारी यह देखकर दंग रह गए कि चालक के पास पांच से अधिक अलग-अलग नंबर प्लेट मौजूद थीं।
क्या था उद्देश्य? तस्कर अलग-अलग राज्यों और जिलों के नंबर प्लेटों का इस्तेमाल पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए करते थे। हर चेकपोस्ट पर ट्रक का नंबर बदल दिया जाता था ताकि किसी को संदेह न हो।
सुनियोजित साजिश: यह स्पष्ट करता है कि शराब तस्करी का यह खेल कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है, बल्कि यह एक संगठित गिरोह द्वारा चलाया जा रहा है, जो आधुनिक तकनीक और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कानून को चुनौती दे रहा है।
डिलीवरी का नेटवर्क और पूछताछ
प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह खेप मुजफ्फरपुर के ही किसी बड़े शराब माफिया को डिलीवर की जानी थी। उत्पाद विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ट्रक चालक ने अभी तक गिरोह के सरगनाओं के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन बरामद नंबर प्लेट और शराब की पैकिंग देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह खेप पड़ोसी राज्यों से तस्करी कर लाई गई थी।
पुलिस और प्रशासन की चुनौती
मुजफ्फरपुर में इस तरह की बरामदगी ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्कर जिस तरह से बेखौफ होकर एक ही वाहन पर कई नंबर प्लेट लगाकर सड़कों पर घूम रहे हैं, वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। उत्पाद विभाग ने अब जिले के तमाम एंट्री पॉइंट्स और नेशनल हाईवे पर चेकिंग अभियान को तेज कर दिया है।
कानून का उल्लंघन और संभावित सजा
बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत इस मामले में कठोर कार्रवाई का प्रावधान है:
जब्ती: शराब के साथ-साथ तस्करी में प्रयुक्त ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है।
दंडात्मक कार्रवाई: पकड़े गए चालक और गिरोह के अन्य सदस्यों पर गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
संगठित अपराध: चूंकि मामले में फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग हुआ है, इसलिए इसमें जालसाजी (Forgery) की अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
मुजफ्फरपुर के शिवदाहा गांव में हुई यह कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि शराब तस्करों ने अब अपने तौर-तरीके पूरी तरह बदल लिए हैं। अब वे केवल छिपकर सामान नहीं ले जा रहे, बल्कि फर्जी पहचान और नंबर प्लेटों का उपयोग कर प्रशासनिक तंत्र को चुनौती दे रहे हैं।
उत्पाद विभाग की इस जीत से स्पष्ट है कि यदि मुखबिर तंत्र और पुलिस की सक्रियता बनी रहे, तो तस्करों के इन हथकंडों को बेनकाब किया जा सकता है। अब जनता को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले की तह तक जाकर उन 'माफियाओं' तक पहुंचेगा, जिनके इशारे पर यह ट्रक चल रहा था।