भागलपुर में विषहरी पूजा विसर्जन के दौरान भारी हंगामा अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर रोक के खिलाफ फूटा गुस्सा, दो जुलूसों में झड़प के बाद पुलिस ने संभाला मोर्चा
भागलपुर : अंग क्षेत्र की लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक महापर्व विषहरी पूजा के विसर्जन जुलूस के दौरान बुधवार को भागलपुर में अजीबोगरीब और तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। जिला प्रशासन द्वारा शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विसर्जन जुलूस में अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था, जिसका कड़ा विरोध पूजा समितियों और अखाड़ाधारियों ने किया। प्रतिबंध के विरोध और प्रशासनिक बंदिशों के बीच माहौल उस वक्त और अधिक गर्मा गया जब दो अलग-अलग जुलूसों के आमने-सामने आने पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प शुरू हो गई। हालांकि, मौके पर मुस्तैद भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को बिगड़ने से बचा लिया और दोनों पक्षों को शांत कराया।
प्रशासन की सख्ती: अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर क्यों लगाई गई थी रोक?
विषहरी पूजा के पारंपरिक विसर्जन जुलूसों में वर्षों से तलवार, भाला, लाठी और अन्य पारंपरिक हथियारों के साथ करतब दिखाने की पुरानी परंपरा रही है:
कानून-व्यवस्था और सुरक्षा: पिछले कुछ समय से आयोजनों के दौरान सुरक्षा मानकों को कड़ा करते हुए जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का सार्वजनिक प्रदर्शन या हर्ष फायरिंग नहीं की जाएगी।
संवेदनशील इलाकों में निगरानी: भागलपुर के संवेदनशील शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शांतिपूर्ण तरीके से विसर्जन संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बलों की तैनाती की थी।
प्रशासन का पक्ष: अधिकारियों का मानना था कि भीड़भाड़ वाले विसर्जन मार्ग पर हथियारों का प्रदर्शन जनसुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक था।
पूजा समितियों का विरोध: "धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं"
प्रशासन के इस प्रतिबंध के लागू होते ही शहर की विभिन्न पूजा समितियों और अखाड़ा कमेटियों में असंतोष की लहर दौड़ गई:
परंपरा से छेड़छाड़ का आरोप: पूजा समिति के सदस्यों और युवाओं का कहना था कि अस्त्र-शस्त्र संचालन और पारंपरिक करतब दिखाना उनकी सदियों पुरानी संस्कृति और अनुष्ठान का अभिन्न हिस्सा है। इसके बिना विसर्जन जुलूस का उत्साह फीका पड़ जाता है।
सड़कों पर उतरा आक्रोश: बैनर-पोस्टर के साथ समितियों के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक आदेश के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। उनका तर्क था कि प्रशासन को असामाजिक तत्वों पर नकेल कसनी चाहिए, न कि पारंपरिक आयोजनों पर रोक लगानी चाहिए।
दो जुलूसों के बीच उपजा विवाद और झड़प की स्थिति
विरोध और तनाव के इस माहौल के बीच बुधवार को जब विभिन्न इलाकों से विषहरी माता की प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस मुख्य मार्गों से गुजर रहे थे, तब एक अप्रिय घटना घटित हुई:
आमने-सामने आए जुलूस: दो अलग-अलग क्षेत्रों की पूजा समितियों के जुलूस जब एक निश्चित चौराहे या संकरे मार्ग पर आमने-सामने आए, तो नारेबाजी और वर्चस्व को लेकर गर्मागर्म बहस शुरू हो गई।
देखते ही देखते बिगड़ी बात: अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन पर रोक को लेकर पहले से ही सुलग रहे गुस्से और दोनों जुलूसों के बीच प्रशासनिक नियमों को लेकर हुई तनातनी ने झगड़े का रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच हाथापाई और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई, जिससे वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
बाजार में अफरातफरी: जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं और आसपास के दुकानदारों में हड़कंप मच गया। क्षण भर के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
पुलिस की तत्परता: त्वरित कार्रवाई से टला बड़ा हादसा
घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाल लिया:
बल प्रयोग और घेराबंदी: स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाते देख पुलिस बल ने तुरंत हस्तक्षेप किया। दोनों पक्षों के उग्र लोगों को खदेड़ा गया और जुलूस के दोनों समूहों को एक-दूसरे से अलग किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की अपील: नगर पुलिस अधीक्षक (SSP) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के प्रमुखों के साथ शांतिपूर्ण संवाद स्थापित किया। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ा विसर्जन: पुलिस की मुस्तैदी और कड़ी निगरानी के बाद स्थिति सामान्य हुई और अंततः भारी पुलिस सुरक्षा के साये में सभी प्रतिमाओं को निर्धारित जलाशयों में शांतिपूर्ण ढंग से विसर्जित किया गया।
भागलपुर में विषहरी पूजा विसर्जन के दौरान अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर रोक को लेकर उपजा विवाद और दो जुलूसों के बीच हुई झड़प यह दर्शाती है कि प्रशासनिक नियमों और पारंपरिक आस्था के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की सूझबूझ और तत्परता के कारण एक संभावित बड़ा उपद्रव टल गया। यह घटना सभी पक्षों के लिए यह संदेश छोड़ जाती है कि पर्व-त्योहारों को आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांति के साथ मनाना ही समाज के हित में है।