हास्य कवि सम्मेलन में देर रात तक उमड़ी भीड़, श्रोता लोटपोट होकर हंसने पर हुए मजबूर
बिहार के पूर्णिया जिले के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र गुलाबबाग स्थित तेरापंथ भवन में रविवार की देर रात तक हँसी, ठहाकों, तालियों और "वाह-वाह" की गूंज से पूरा माहौल सराबोर नजर आया। अवसर था एक भव्य और आकर्षक हास्य कवि सम्मेलन का, जहाँ देश और प्रदेश के जाने-माने हास्य-व्यंग्य कवियों ने अपनी पैनी कविताओं, चुटीले व्यंग्यों और गुदगुदाने वाली रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रविवार की शाम से शुरू हुआ यह सांस्कृतिक कार्यक्रम इतनी ऊर्जा और रोमांच से भरपूर था कि दर्शक और श्रोतागण अपनी कुर्सियों पर देर रात तक जमे रहे और कवियों की हर एक प्रस्तुति पर जमकर तालियाँ बजाईं। इस आयोजन ने पूर्णियावासियों को तनाव भरी दिनचर्या से निकालकर खुलकर हंसने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया।
क्या था कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण और आयोजन का माहौल?
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, गुलाबबाग के तेरापंथ भवन में आयोजित इस हास्य कवि सम्मेलन की शुरुआत संध्या बेला में दीप प्रज्वलन और पारंपरिक वंदना के साथ हुई। कार्यक्रम के आयोजकों और स्थानीय गणमान्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
जैसे ही मंच पर एक के बाद एक आमंत्रित कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपनी कविताओं का पाठ शुरू किया, वैसे ही पूरा सभागार हँसी के फव्वारों से गूंज उठा। कवियों ने केवल हंसाने का काम ही नहीं किया, बल्कि समाज की कुरीतियों, राजनीति की उठापटक, आधुनिक जीवनशैली और पारिवारिक रिश्तों की विसंगतियों पर भी बेहद खूबसूरत और तीखे व्यंग्य कसे, जिन्हें श्रोताओं ने बेहद सराहा।
कवियों की अनूठी प्रस्तुतियाँ: समसामयिक मुद्दों और हास्य का बेहतरीन संगम
कवि सम्मेलन के दौरान मंच पर पहुंचे रचनाकारों ने अपनी अलग-अलग शैलियों से लोगों का दिल जीत लिया। प्रस्तुत कविताओं के मुख्य केंद्र-बिंदु निम्नलिखित रहे:
राजनीति और व्यवस्था पर करारा व्यंग्य: कवियों ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से राजनेताओं की कार्यशैली और चुनावी वादों पर ऐसे करारे व्यंग्य कसे कि पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उन पंक्तियों का समर्थन किया।
पति-पत्नी के खट्टे-मीठे रिश्ते: हास्य कविताओं का एक बड़ा दौर पति-पत्नी के आपसी नोकझोंक और घरेलू जीवन पर आधारित रहा। इस शैली ने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को सबसे ज्यादा गुदगुदाया।
आधुनिक टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया का प्रभाव: आज के दौर में मोबाइल, रील्स और सोशल मीडिया के प्रति बढ़ती दीवानगी पर कवियों ने जिस हास्यपूर्ण अंदाज में प्रहार किया, उसने सभी को सोचने पर भी मजबूर किया और हंसाया भी।
श्रोताओं की भारी भीड़ और अनुशासन
गुलाबबाग के तेरापंथ भवन में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर शहर के लोगों में गजब का उत्साह देखा गया। हॉल के भीतर पैर रखने की जगह नहीं बची थी और बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर कविताओं का आनंद ले रहे थे। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—सभी आयु वर्ग के लोग इस हास्य रस में डूबे नजर आए।
देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन के दौरान अनुशासन का भी पूरा ख्याल रखा गया। स्थानीय पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवकों की मुस्तैदी के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। श्रोताओं ने अंतिम समय तक टिके रहकर यह साबित कर दिया कि पूर्णिया के लोगों को कला, साहित्य और संस्कृति से कितना गहरा प्रेम है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी पधारे हुए प्रख्यात कवियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। कवियों ने भी पूर्णिया के प्रेम और आतिथ्य की खुलकर प्रशंसा की।
तेरापंथ भवन गुलाबबाग में आयोजित यह हास्य कवि सम्मेलन केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि यह समाज को जोड़ने, तनाव दूर करने और भारतीय संस्कृति की लोक-काव्य परंपरा को जीवंत रखने का एक शानदार प्रयास साबित हुआ। यह आयोजन लंबे समय तक पूर्णियावासियों की स्मृतियों में ताजा रहेगा।