मुजफ्फरपुर: बोचहां प्रखंड मुख्यालय पर भाकपा-माले और खेग्रामस का जोरदार प्रदर्शन; गरीबों के उजाड़े जा रहे आशियानों और राशन कार्ड से नाम काटने के खिलाफ नेताओं ने किया एक दिवसीय सामूहिक अनशन, प्रशासन पर बोला तीखा हमला

मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड मुख्यालय से जनसमस्याओं और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ एक बड़ी और आक्रामक राजनीतिक खबर सामने आ रही है। भाकपा माले (CPI-ML) और खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर तले बोचहां प्रखंड परिसर में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा एक दिवसीय सामूहिक अनशन का आयोजन किया गया। इस अनशन के माध्यम से वामपंथी दलों के नेताओं ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था गरीबों को बसाने और उन्हें जमीन का पर्चा देने के बजाय उनके बसे-बसाए आशियानों को उजाड़ने का कुत्सित प्रयास कर रही है। इसके साथ ही, जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के राशन कार्ड से लगातार नाम काटे जाने की मनमानी प्रक्रिया पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, मजदूर और पार्टी के प्रमुख नेता शामिल हुए, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए वाम दलों द्वारा उठाए गए इस कदम, उनकी प्रमुख मांगों, सरकार विरोधी तेवरों और इस आंदोलन के व्यापक प्रभावों का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण आइए समझते हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि: गरीबों के आशियाने पर संकट और राशन कटौती

बोचहां प्रखंड में लंबे समय से भूमिहीनों को जमीन और बासगीत पर्चा देने की मांग उठती रही है, लेकिन इसके विपरीत जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

घरों को उजाड़ने का गंभीर आरोप: भाकपा माले और खेग्रामस के नेताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासन द्वारा विकास या अन्य बहानों के नाम पर गरीब और भूमिहीन परिवारों को उनके पुश्तैनी या लंबे समय से बसे घरों से उजाड़ा जा रहा है, जो सरासर अमानवीय है।

राशन कार्ड से नाम विलोपन की साजिश: नेताओं ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के राशन कार्ड से सोची-समझी रणनीति के तहत नाम काटे जा रहे हैं, जिससे उन्हें मिलने वाला खाद्यान्न अधिकार भी छीना जा रहा है। मंहगाई के इस दौर में राशन कार्ड छिन जाने से गरीबों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

जमीन देने के वादों की अनदेखी: सरकार भले ही भूमिहीनों को जमीन देने के दावे करती हो, लेकिन धरातल पर गरीबों को पांच डिसमिल जमीन या बासगीत का पर्चा नसीब नहीं हो रहा है, जिसके चलते मजबूरन वाम दलों को सड़क पर उतरना पड़ा।

सामूहिक अनशन और प्रमुख नेताओं की हुंकार

बोचहां प्रखंड मुख्यालय पर आयोजित इस सामूहिक अनशन के दौरान वक्ताओं ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार दिया।

माले और खेग्रामस की संयुक्त ताकत: अनशन स्थल पर पहुंचे भाकपा माले और खेग्रामस के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक गरीबों का उत्पीड़न बंद नहीं होगा और उनके छीने गए अधिकार वापस नहीं मिलेंगे, तब तक उनका संघर्ष चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

प्रशासन को चेतावनी: नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि गरीबों के उजाड़े जाने वाले घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई तुरंत बंद नहीं की गई और राशन कार्ड से काटे गए नाम बहाल नहीं किए गए, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।

बड़ी संख्या में भागीदारी: इस अनशन में केवल नेता ही नहीं, बल्कि बोचहां क्षेत्र के दर्जनों पीड़ित ग्रामीण, महिलाएं और खेत मजदूर भी शामिल हुए, जिन्होंने अपनी आपबीती सुनाई और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रमुख मांगें: बासगीत पर्चा, आवास और राशन कार्ड बहाली

इस सामूहिक अनशन के दौरान प्रशासन को एक सूत्रीय व बहुसूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:

भूमिहीनों को जमीन और पर्चा: सभी गरीब और भूमिहीन परिवारों को तत्काल बासगीत पर्चा और घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए।

उजाड़े जाने पर रोक: गरीबों के घरों को उजाड़ने की प्रशासनिक कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और जिन लोगों के घर उजड़ चुके हैं, उन्हें उचित मुआवजा व बसावास दिया जाए।

राशन कार्ड की त्रुटियों में सुधार: गरीबों के काटे गए राशन कार्ड के नामों को तुरंत जोड़ा जाए और नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।

महंगाई और रोजगार: बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत काम और मजदूरों को उचित मजदूरी देने की गारंटी सुनिश्चित हो।

 प्रशासनिक प्रतिक्रिया और राजनीतिक मायने

इस प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासन और अंचल कार्यालय पर दबाव बढ़ गया है।

अधिकारियों की सुगबुगाहट: अनशन की सूचना मिलते ही बोचहां प्रशासन हरकत में आया और आंदोलनकारियों के ज्ञापन को लेकर बातचीत के प्रयास शुरू किए गए। अधिकारियों ने मांगों की जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।

विपक्ष और वाम दलों की सक्रियता: मुजफ्फरपुर जिले में ग्रामीण मुद्दों को लेकर भाकपा माले और खेग्रामस की यह सक्रियता आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति को गर्माने का काम कर रही है।

बोचहां प्रखंड में भाकपा माले और खेग्रामस के नेताओं द्वारा किया गया यह सामूहिक अनशन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण इलाकों में गरीबों के अधिकार और उनकी आजीविका पर लगातार संकट मंडरा रहा है। सरकार द्वारा गरीबों को जमीन देने के बजाय उनके घरों को उजाड़ना और राशन कार्ड से नाम काटना एक गंभीर सामाजिक अन्याय है। यदि समय रहते प्रशासन ने इन जनसमस्याओं का संज्ञान नहीं लिया, तो यह चिंगारी पूरे जिले में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकती है। गरीबों, मजदूरों और भूमिहीनों के हक की यह लड़ाई अब और तेज होने के पूरे आसार हैं।