दूसरे दिन मौलाना अशजद रजा खां ने दिया आपसी भाईचारे और मुहब्बत का पैगाम, जुल्म व नफरत से दूर रहने की दी नसीहत

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के औराई प्रखंड अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक मकसूदपुर गाँव में इन दिनों एक बेहद ही रूहानी, अकीदत और उत्साह से भरा माहौल देखने को मिल रहा है। यहाँ स्थित प्रसिद्ध मरसा जामिया कादरिया (Madarsa Jamia Qadriya) में आयोजित सालाना उर्स का कार्यक्रम अपने पूरे रौनक़ और عقیدत (श्रद्धा) के साथ चल रहा है। इस भव्य धार्मिक आयोजन के दूसरे दिन देश के जाने-माने इस्लामिक स्कॉलर और रूहानी शख्सियत मौलाना अशजद रजा खां साहब ने विशेष रूप से शिरकत की। अपने सारगर्भित संबोधन के दौरान उन्होंने वहाँ मौजूद हजारों की भीड़ को आपसी भाईचारे, इंसानी मुहब्बत और समाज में अमन-चैन कायम रखने का बेहद संदेश दिया। उनके इस पैगाम ने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के दिलों को छू लिया।

मदरसा जामिया कादरिया में उर्स का दूसरा दिन और भव्य आयोजन

मकसूदपुर के मदरसा जामिया कादरिया में आयोजित यह सालाना उर्स हर साल की तरह इस बार भी क्षेत्र के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक साबित हो रहा है। उर्स के दूसरे दिन की शुरुआत विशेष दुआओं, कुरआनख्वानी और नात-ओ-मनकबत के कार्यक्रमों के साथ हुई।

अकीदतमंदों का जनसैलाब: उर्स के दूसरे दिन मौलाना अशजद रजा खां साहब के आने की खबर सुनते ही सुबह से ही मदरसे के परिसर और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ जुटने लगी थी। औराई ही नहीं बल्कि मुजफ्फरपुर शहर और पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग अपने इस अजीज आलिम की तकरीर सुनने के लिए पहुँचे थे।

रूहानी माहौल: पूरे परिसर को सुंदर लाइटों और फूलों से सजाया गया था। चारों तरफ गूंजती नातों और दरूद-ओ-سلام की आवाज़ ने पूरे इलाके को एक आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण माहौल में तब्दील कर दिया था।

मौलाना अशजद रजा खां साहब का मुख्य संबोधन: भाईचारे और अमन की सीख

जब मंच पर मौलाना अशजद रजा खां साहब ने अपनी तकरीर (प्रवचन) की शुरुआत की, तो पूरा पंडाल पूरी तरह शांत होकर उन्हें सुनने लगा। उन्होंने अपने संबोधन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों पर जोर दिया:

आपसी भाईचारे और एकता का पैगाम: मौलाना साहब ने कहा कि इस्लाम धर्म हमेशा से अमन, शांति और मानवता का संदेश देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश और समाज की तरक्की के लिए विभिन्न समुदायों के बीच आपसी भाईचारे, मेल-जोल और एकता का होना बेहद जरूरी है। नफरत की दीवारों को गिराकर मुहब्बत के पुल बनाने की आज सबसे बड़ी आवश्यकता है।

जुल्म और नफरत से बचने की सख्त ताकीद: अपने संबोधन में उन्होंने समाज में फैल रही कुरीतियों, नफरत और जुल्म-ज्यादती पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने उपस्थित लोगों को नसीहत दी कि किसी भी इंसान पर जुल्म करना या किसी के प्रति दिल में नफरत रखना मानवता के खिलाफ है। उन्होंने फरमाया कि एक सच्चा आस्तिक और इंसान वही है जो दूसरों को तकलीफ देने से बचे और समाज के कमजोर तबके की मदद करे।

तालीम (शिक्षा) और अच्छे चरित्र पर जोर: मदरसे की अहमियत को रेखांकित करते हुए मौलाना ने शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी तालीम (आधुनिक शिक्षा) से भी लैस करें, ताकि वे समाज और देश के विकास में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकें। साथ ही उन्होंने अच्छे अखलाक (चरित्र) को अपनाने की बात कही।

स्थानीय लोगों और प्रबंधन की भूमिका

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में मदरसा जामिया कादरिया के प्रबंधन समिति, स्थानीय बुद्धिजीवियों और युवाओं की भूमिका सराहनीय रही। कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय औराई थाना पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। तकरीर के अंत में देश में अमन, चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ माँगी गई, जिसमें हजारों लोगों ने एक साथ हाथ उठाकर आमीन कहा।

औराई के मकसूदपुर गाँव स्थित मदरसा जामिया कादरिया में आयोजित उर्स के दूसरे दिन मौलाना अशजद रजा खां साहब द्वारा दिया गया आपसी भाईचारे और नफरत से दूर रहने का संदेश आज के दौर में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। इस तरह के धार्मिक आयोजन न केवल हमारी आध्यात्मिक संस्कृति को पोषित करते हैं, बल्कि समाज को जोड़ने और एक-दूसरे के प्रति प्रेम व सद्भाव की भावना को भी मजबूत करने का काम करते हैं। यह आयोजन मुजफ्फरपुर के इतिहास में एकता और शांति की एक और बेहतरीन मिसाल बन गया है।