तेज धूप और उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल, बारिश थमने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें; मौसम विभाग ने जारी किया ‘येलो अलर्ट’
बिहार के पूर्णिया जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार सुहावने बने हुए मौसम के मिजाज ने अचानक एक बार फिर से यू-टर्न ले लिया है। आसमान साफ होने के साथ ही तेज धूप और प्रचंड उमस भरी गर्मी ने आम जनजीवन को बुरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ एक तरफ गर्मी और उमस से लोग पसीना-पसीना हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ धान की फसल और खेती-किसानी से जुड़े किसानों की चिंताएं एक बार फिर से आसमान छूने लगी हैं। बारिश का सिलसिला थमने के कारण खेतों में नमी तेजी से घट रही है और पानी का स्तर नीचे जाने लगा है, जिससे फसलों के सूखने का खतरा मंडराने लगा है। इस बीच, मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्णिया समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में आगामी दिनों के लिए 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी कर दिया है, जिससे मौसम के पल-पल बदलते मिजाज को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
क्या है वर्तमान मौसम की स्थिति और क्यों बढ़ी किसानों की मुश्किलें?
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण पूर्णिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मौसम काफी सुहाना और किसानों के अनुकूल बना हुआ था। धान की रोपनी और शुरुआती विकास के लिए खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध था।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से अचानक तेज धूप खिलने और बादलों के गायब होने से तापमान में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। इस उमस भरी गर्मी के कारण निम्नलिखित परेशानियाँ सामने आ रही हैं:
खेतों में घटता जलस्तर: झमाझम बारिश न होने और तेज धूप के कारण खेतों की मिट्टी तेजी से सूख रही है। जिन खेतों में धान की फसल लहलहा रही थी, वहाँ दरारें पड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
सिंचाई का बढ़ता खर्च: जिन किसानों के पास बोरिंग या निजी सिंचाई के साधन नहीं हैं, उन्हें महंगे दामों पर डीजल पंपसेट चलाकर अपनी फसलों को बचाना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत काफी बढ़ गई है।
शारीरिक स्वास्थ्य पर असर: अचानक बढ़ी इस चिलचिलाती धूप और उमस के कारण बच्चों, बुजुर्गों और खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूरों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और वायरल बुखार जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
मौसम विभाग का 'येलो अलर्ट': आने वाले दिनों में क्या है पूर्वानुमान?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मानसून की टर्फ रेखा की स्थिति में बदलाव और स्थानीय मौसमी दशाओं के कारण पूर्णिया जिले में मौसम कभी भी करवट ले सकता है। विभाग द्वारा जारी किए गए 'येलो अलर्ट' का मतलब यह है कि लोगों को अचानक होने वाले मौसमी बदलावों—विशेषकर वज्रपात (आकाशीय बिजली), तेज हवाओं और अचानक झमाझम बारिश—के प्रति बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि वर्तमान में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हैं, लेकिन वातावरण में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के कारण आने वाले 48 से 72 घंटों के भीतर जिले के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यदि यह बारिश समय पर हो जाती है, तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है।
किसानों और आम जनता के लिए क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?
पूर्णिया के कृषि विशेषज्ञों और कृषि विज्ञान केंद्र के जानकारों का कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। यदि आसमान से बारिश नहीं होती है, तो किसानों को वैकल्पिक माध्यमों से खेतों में पानी की निरंतरता बनाए रखनी होगी, अन्यथा पैदावार पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और अपनी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करें। साथ ही, आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि इस उमस भरे मौसम में अत्यधिक धूप में निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ और अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
मौसम की अनिश्चितता के बीच प्रशासन और जनता की निगाहें आसमान पर
पूर्णिया में मौसम की यह लुकाछिपी एक बार फिर यह साबित करती है कि खेती-किसानी और आम जनजीवन किस हद तक प्रकृति पर निर्भर है। जहाँ एक तरफ आम आदमी इस उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए बादलों के बरसने का इंतजार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अन्नदाता किसान अपनी सूखी फसलों को बचाने के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठा है। देखना यह होगा कि मौसम विभाग का यह 'येलो अलर्ट' पूर्णिया के निवासियों के लिए राहत की कितनी बूंदें लेकर आता है।