सीवरेज और नल-जल योजना की खुदाई के बाद नहीं हुआ स्थायी निर्माण, बड़े-बड़े गड्ढों और जलजमाव से हजारों लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर

बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर मुंगेर (Munger) में विकास के दावों की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। शहर के व्यस्त और प्रमुख व्यापारिक केंद्र तोपखाना बाजार की मुख्य सड़क (Topkhana Bazar Main Road) पिछले तीन लंबे वर्षों से अत्यंत दयनीय, जर्जर और बदहाल स्थिति में पड़ी है। सीवरेज पाइपलाइन बिछाने और नल-जल योजना (Nal-Jal Yojana) के तहत की गई बेतरतीब खुदाई के बाद इस सड़क का आज तक स्थायी निर्माण या डब्लूबीएम (WBM)/पक्कीकरण का कार्य नहीं कराया गया है।

परिणामस्वरूप, हल्की बारिश में भी यह सड़क कीचड़ और बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे रोजाना गुजरने वाले हजारों स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों, स्कूली बच्चों और राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोग रोजमर्रा की जिंदगी में नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। आइए मुंगेर के तोपखाना बाजार की इस बदहाल सड़क, इसके पीछे के प्रशासनिक दावों, स्थानीय लोगों के दर्द और इस समस्या के संपूर्ण पहलुओं का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

समस्या की जड़: सीवरेज और नल-जल योजना के नाम पर बेतरतीब खुदाई

किसी भी शहर के विकास के लिए भूमिगत सीवर लाइन और घर-घर शुद्ध पेयजल पहुँचाना सराहनीय कदम है, लेकिन यदि विकास कार्यों के पूरा होने के बाद सड़कों को उनकी मूल स्थिति में वापस नहीं लाया जाए, तो वही विकास जनता के लिए जी का जंजाल बन जाता है।

तीन साल पहले खुदी सड़क: स्थानीय निवासियों के अनुसार, तोपखाना बाजार की इस मुख्य सड़क पर लगभग तीन वर्ष पूर्व सीवरेज प्रोजेक्ट और हर घर नल का जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ था। इसके लिए सड़क के बीचों-बीच और किनारों पर गहरी खंदकें खोदी गईं।

खुदाई के बाद मरम्मत की अनदेखी: पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा होने या बीच में ही काम अधूरा छोड़ दिए जाने के बाद संबंधित विभाग और ठेकेदारों ने सड़क की मरम्मत करना मुनासिब नहीं समझा। तब से लेकर आज तक यह सड़क केवल धूल, मिट्टी, गड्ढों और कीचड़ का पर्याय बन कर रह गई है।

सड़क पर बने जानलेवा गड्ढे और जलजमाव का संकट

तोपखाना बाजार मुंगेर का एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है, जहाँ प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। सड़क की वर्तमान स्थिति ने यहाँ के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

तालाब में तब्दील सड़क: थोड़ी सी भी बारिश होने पर सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे यह पहचान पाना असंभव हो जाता है कि सड़क कहाँ है और गड्ढा कहाँ। कई बार बाइक सवार और साइकिल चालक इन अदृश्य गड्ढों में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

उड़ती धूल और स्वास्थ्य समस्याएं: शुष्क मौसम में वाहनों के गुजरने से सड़क पर इतनी धूल उड़ती है कि आसपास के दुकानदारों का अपनी दुकानों में बैठना मुश्किल हो गया है। सांस की बीमारियां, एलर्जी और आंखों में संक्रमण जैसी समस्याएं स्थानीय लोगों में आम होती जा रही हैं।

व्यापारियों और दुकानदारों का आर्थिक संकट

तोपखाना बाजार मुंगेर की एक स्थापित बाजार है, जहाँ कपड़े, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी सामानों की दर्जनों दुकानें हैं। सड़क की बदहाली का सीधा असर यहां के व्यापार पर पड़ा है।

ग्राहकों की घटती संख्या: सड़क की खराब स्थिति और कीचड़-गड्ढों के कारण ग्राहक इस बाजार में आने से कतराने लगे हैं। लोग वैकल्पिक और बेहतर सड़कों वाले बाजारों का रुख कर रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों के व्यवसाय में भारी गिरावट आई है।

दुकानदारों का दर्द: दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले, जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

मुंगेर के विकास को लेकर बड़े-बड़े वादे करने वाले प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रनिधि इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदकर बैठे नजर आते हैं।

विभागीय समन्वय की कमी: नगर निगम, पथ निर्माण विभाग और जलापूर्ति से जुड़ी एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय की भारी कमी है। हर विभाग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है, और पिसती सिर्फ आम जनता है।

आश्वासनों का झुनझुना: स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय या जब भी मीडिया में यह मुद्दा उठता है, तो अधिकारियों द्वारा जल्द ही सड़क निर्माण शुरू कराने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर महीनों बीत जाने के बाद भी कोई पहल नहीं होती।

मुंगेर के तोपखाना बाजार की मुख्य सड़क की पिछले तीन वर्षों से बनी यह जर्जर स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता का एक जीता-जागता उदाहरण है। सीवरेज और नल-जल योजना के नाम पर खोदी गई इस सड़क का स्थायी निर्माण न होना न केवल विकास के दावों पर सवालिया निशान लगाता है, बल्कि हजारों नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। यदि समय रहते जिला प्रशासन और नगर निगम ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो स्थानीय लोग बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। आवश्यकता इस बात की है कि युद्ध स्तर पर इस सड़क का पक्कीकरण किया जाए ताकि तोपखाना बाजार के लोगों को इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।