राजकीय श्रावणी मेला 2026 को लेकर पीएचईडी (PHED) की बड़ी तैयारी; श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कांवरिया पथ पर बनाए गए 720 शौचालय और 30 प्याऊ, पेयजल व स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम

भागलपुर, विशेष संवाददाता: देवघर और सुलतानगंज के रास्ते बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा करने वाले लाखों शिवभक्तों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के मद्देनजर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने कांवरिया पथ से लेकर शहर के विभिन्न पड़ावों तक श्रद्धालुओं के लिए व्यापक पेयजल और स्वच्छता की चाक-चौबंद व्यवस्था कर दी है। कांवरियों को अपनी कठिन पैदल यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए विभाग ने इस वर्ष युद्धस्तर पर काम किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पूरे रूट पर कुल 720 अत्याधुनिक टॉयलेट (शौचालय) और 30 पेयजल प्याऊ स्थापित किए गए हैं, जिससे सुल्तानगंज से लेकर झारखंड सीमा तक शिवभक्तों को हर कदम पर शुद्ध पेयजल और स्वच्छ माहौल मिल सके।

क्या है पूरी योजना और क्यों पड़ी इसकी आवश्यकता?

हर साल सावन के पवित्र महीने में देश के कोने-कोने से करोड़ों की संख्या में कांवरिया शिव भक्त उत्तर दिशा में स्थित पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा (सुल्तानगंज) से जल भरकर पैदल ही झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना होते हैं। लगभग 105 किलोमीटर लंबे इस कठिन कांवरिया मार्ग पर साफ-सफाई और पेयजल की उपलब्धता हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है।

बढ़ती भीड़ और प्रशासनिक चुनौतियां: श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों के हुजूम को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन हर वर्ष विशेष इंतजाम करता है। इस बार पीएचईडी ने पिछले वर्षों के अनुभवों से सबक लेते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाया है।

स्वच्छता मिशन पर विशेष जोर: खुले में शौच की समस्या से निपटने और महिला कांवरियों को किसी प्रकार की शर्मिंदगी या परेशानी न हो, इसके लिए इस बार रूट पर विशेष रूप से मोबाइल टॉयलेट्स और प्री-फैब्रिकेटेड शौचालयों का जाल बिछाया गया है।

720 शौचालयों का निर्माण और उनकी विशेषताएं

महिला एवं पुरुष कांवरियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए पीएचईडी ने कांवरिया पथ और ठहराव स्थलों पर कुल 720 शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित की है।

अलग-अलग व्यवस्था: इन शौचालयों में महिला और पुरुष कांवरियों के लिए अलग-अलग इकाइयां बनाई गई हैं, जिससे उन्हें किसी भी तरह की असुविधा न हो।

नियमित साफ-सफाई (सैनिटाइजेशन): विभाग ने इन सभी शौचालयों की साफ-सफाई के लिए विशेष कर्मियों (सफाई मित्रों) की ड्यूटियां लगाई हैं। 24 घंटे रोस्टर के आधार पर इन परिसरों का सैनिटाइजेशन किया जा रहा है ताकि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की गंदगी या बीमारी फैलने का खतरा न रहे।

पर्याप्त पानी की आपूर्ति: प्रत्येक शौचालय के पास पानी के कनेक्शन और स्टोरेज टैंक की मुकम्मल व्यवस्था की गई है, जिससे फ्लशिंग और हाथ धोने में किसी प्रकार की बाधा न आए।

जगह-जगह स्थापित किए गए 30 शुद्ध पेयजल प्याऊ

भयंकर उमस और गर्मी के बीच लंबी पैदल यात्रा करने वाले शिवभक्तों के लिए डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) एक बड़ी समस्या बन जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए पीएचईडी ने पूरे कांवरिया पथ पर कुल 30 अत्याधुनिक प्याऊ स्थापित किए हैं।

ठंडे और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था: इन प्याऊ केंद्रों पर आरओ (RO) और वाटर कूलर्स लगाए गए हैं, जिससे कांवरियों को भीषण गर्मी में भी ठंडा और स्वच्छ पेयजल मिल सके।

हैंडपंप और ट्यूबवेल का बैकअप: बिजली गुल होने या किसी तकनीकी खराबी की स्थिति से निपटने के लिए इन प्याऊ और कैंपों के पास डीप बोरिंग हैंडपंपों का भी बैकअप तैयार रखा गया है ताकि जलापूर्ति कभी बाधित न हो।

क्यूआर कोड और मॉनिटरिंग: पानी की गुणवत्ता की जांच नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य विभाग और पीएचईडी की संयुक्त टीमों द्वारा की जा रही है ताकि किसी भी तरह के जलजनित रोग से बचा जा सके।

विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा और अधिकारियों के निर्देश

पीएचईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में मेला क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर इन تمام व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता और कार्यपालक इंजीनियरों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मेले के दौरान किसी भी प्वाइंट पर पानी या साफ-सफाई को लेकर कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए।

कंट्रोल रूम स्थापित: विभाग की ओर से एक विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Room) भी बनाया गया है, जिसका नंबर सार्वजनिक कर दिया गया है ताकि यदि किसी कांवरिया को पानी या शौचालय से जुड़ी कोई समस्या हो, तो वह तुरंत सूचना दे सके और कुछ ही मिनटों में उसका समाधान किया जा सके।

राजकीय श्रावणी मेले के दौरान लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा की गई ये व्यापक व्यवस्थाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार कांवरियों की सेवा और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 720 शौचालयों और 30 आधुनिक प्याऊ का यह नेटवर्क न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम और आरामदायक बनाएगा, बल्कि 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत धार्मिक मेलों में स्वच्छता के एक नए मानक भी स्थापित करेगा। बाबा के भक्तों की यह कठिन यात्रा अब इन प्रशासनिक सुविधाओं के बदौलत काफी हद तक सुगम साबित हो रही है।