तारापुर में 30 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावणी मेले की तैयारियां अंतिम चरण में, लेकिन गोगाचक धर्मशाला के पास अधूरे कार्यों और गंदे शौचालय से श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें; प्रशासनिक दावों की खुली पोल

बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक परिदृश्य में श्रावण मास का विशेष महत्व है। इस पवित्र महीने में देवघर जाने वाले कांवरियों और शिवभक्तों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन द्वारा हरसंभव प्रयास किए जाने के दावे किए जाते हैं। इसी कड़ी में मुंगेर जिले के तारापुर (Tarapur) अनुमंडल क्षेत्र में 30 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावणी मेले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। कांवरिया पथ पर सुरक्षा, पेयजल, रोशनी और विश्राम स्थलों की व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।

लेकिन इन तमाम प्रशासनिक दावों और कागजी तैयारियों के बीच धरातल की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। मेले के शुभारंभ से ठीक पहले तारापुर के गोगाचक स्थित धर्मशाला के पास व्यवस्था की पोल खोलती एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। धर्मशाला के शौचालय की सेप्टिक टंकी की लंबे समय से सफाई न होने के कारण वहां भीषण बदबू फैल रही है, जिससे दूर-दूर से आने वाले शिवभक्तों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आइए तारापुर में श्रावणी मेले की तैयारियों के इस स्याह पहलू, गोगाचक धर्मशाला की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

तारापुर में श्रावणी मेले का आगाज: प्रशासनिक दावे बनाम धरातल की हकीकत

प्रतिवर्ष श्रावण मास में तारापुर और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों से हजारों की संख्या में कांवरिया सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर की ओर प्रस्थान करते हैं। इस मार्ग पर पड़ने वाले विश्राम स्थलों और धर्मशालाओं की साफ-सफाई रखना प्रशासन की मुख्य जिम्मेदारी होती है।

कागजों पर पूरी तैयारियां: प्रशासन का दावा है कि 30 जुलाई से शुरू होने वाले इस मेले के लिए सभी आवश्यक तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। कांवरिया पथ पर जगह-जगह शिविर लगाए जा रहे हैं और स्वच्छता कर्मचारियों की फौज तैनात करने की बात कही जा रही है।

अधूरे कार्य और लापरवाही: इसके विपरीत, जमीनी हकीकत यह है कि कई महत्वपूर्ण स्थानों पर विकास और स्वच्छता के कार्य अभी भी अधूरे पड़े हैं। मेला शुरू होने में महज कुछ ही घंटे शेष हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है।

गोगाचक धर्मशाला की बदहाली: सेप्टिक टंकी की सफाई न होने से फैली भयंकर बदबू

तारापुर के गोगाचक स्थित धर्मशाला को कांवरियों के विश्राम के लिए एक प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहाँ दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त कुछ पल विश्राम करते हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति ने इस धर्मशाला की उपयोगिता पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

शौचालय की सेप्टिक टंकी ओवरफ्लो: गोगाचक धर्मशाला परिसर स्थित शौचालय की सेप्टिक टंकी लंबे समय से भरी हुई है और उसकी समय पर सफाई नहीं कराई गई है। इसके परिणामस्वरूप टंकी का गंदा पानी और कचरा बाहर रिसने लगा है, जिससे पूरे परिसर में असहनीय बदबू फैल गई है।

स्वच्छता अभियानों की पोल: एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत मिशन और मेलों में स्वच्छता के लाख दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख कांवरिया मार्ग पर स्थित इस धर्मशाला की ऐसी दुर्दशा प्रशासनिक स्वच्छता दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती मुश्किलें और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा

श्रावण मास में नंगे पांव और कठिन साधना के साथ यात्रा करने वाले कांवरिया पहले से ही शारीरिक थकान से जूझते हैं। ऐसे में जब उन्हें विश्राम के लिए गंदे और बदबूदार स्थानों का सामना करना पड़े, तो उनकी आस्था को गहरी ठेस पहुंचती है।

संक्रमण और बीमारियों का खतरा: सेप्टिक टंकी के खुले में बहने और भीषण बदबू के कारण वहां मक्खियों और मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है। इस दूषित वातावरण में सांस लेना भी मुहाल हो गया है, जिससे श्रद्धालुओं में उल्टी, दस्त, डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

महिला श्रद्धालुओं की लाचारी: विशेष रूप से महिला कांवरियों और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को इस गंदे शौचालय और बदबू के कारण भयंकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। मजबूरन उन्हें खुले में या अन्य असहज विकल्पों की तलाश करनी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

गोगाचक धर्मशाला की इस दयनीय स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध नागरिकों में प्रशासन और नगर पंचायत के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

शिकायतों के बावजूद अनदेखी: स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

समय सीमा पर सवाल: जब मेला 30 जुलाई से शुरू होना है, तो उससे ठीक पहले इस तरह की बुनियादी समस्याओं का समाधान न होना प्रशासनिक सुस्ती को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या महामारी के इंतजार में है?

तारापुर में 30 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावणी मेले की चमक-दमक के बीच गोगाचक स्थित धर्मशाला के शौचालय की सेप्टिक टंकी से फैलती बदबू और अधूरे पड़े कार्य प्रशासनिक व्यवस्था की कलई खोलते हैं। एक तरफ जहां सरकार और अधिकारी मेले को सफल बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी कांवरियों के सफर को कठिन बना रही है। समय की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल प्रभाव से इस गंभीर समस्या का संज्ञान ले, युद्धस्तर पर सेप्टिक टंकी की सफाई करवाकर सैनिटाइजेशन का काम पूरा करे, ताकि शिवभक्तों की यह पवित्र यात्रा निर्बाध और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके।