एंटी-ब्राइबरी मैनेजमेंट सिस्टम (ABMS) के स्टेज-2 ऑडिट में खरा उतरी परियोजना

कहलगांव (भागलपुर): एनटीपीसी कहलगांव ने अपनी कार्यप्रणाली में शुचिता, पारदर्शिता और नैतिक मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सिद्ध कर दिया है। परियोजना परिसर में 15 और 16 जुलाई 2026 को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की टीम द्वारा 'एंटी-ब्राइबरी मैनेजमेंट सिस्टम' (ABMS - ISO 37001:2016) के स्टेज-2 ऑडिट का समापन सफलतापूर्वक किया गया। इस उपलब्धि ने एनटीपीसी कहलगांव को देश के उन चुनिंदा संस्थानों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है, जो भ्रष्टाचार मुक्त कार्य-संस्कृति के लिए वैश्विक मानकों का पालन कर रहे हैं।

ऑडिट का उद्देश्य: शुचिता और नैतिक कार्य-संस्कृति

एंटी-ब्राइबरी मैनेजमेंट सिस्टम (ABMS) का मुख्य उद्देश्य किसी भी संस्थान में भ्रष्टाचार के जोखिमों को पहचानना, उन्हें नियंत्रित करना और एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जहाँ रिश्वतखोरी की गुंजाइश न हो। 15 और 16 जुलाई को आयोजित इस दो-दिवसीय ऑडिट के दौरान भारतीय मानक ब्यूरो की टीम ने एनटीपीसी कहलगांव के विभिन्न विभागों, प्रक्रियाओं और रिकॉर्ड्स का गहन निरीक्षण किया।

BIS टीम की सकारात्मक टिप्पणी

ऑडिट प्रक्रिया के समापन के बाद, भारतीय मानक ब्यूरो की टीम ने एनटीपीसी कहलगांव की कार्यप्रणाली की भूरी-भूरी प्रशंसा की। टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि एनटीपीसी कहलगांव में न केवल एंटी-ब्राइबरी सिस्टम के सभी मानकों का प्रभावी कार्यान्वयन किया गया है, बल्कि प्रबंधन और कर्मचारियों का दृष्टिकोण भी पूरी तरह से भ्रष्टाचार-मुक्त वातावरण बनाने के प्रति समर्पित है।

टीम ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

प्रक्रियात्मक पारदर्शिता: खरीद (Procurement), मानव संसाधन, वित्त और अन्य प्रशासनिक विभागों में प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण।

कर्मचारी जागरूकता: संगठन के हर स्तर पर कर्मचारियों को एथिक्स (Ethics) और 'जीरो टॉलरेंस' नीति के बारे में निरंतर प्रशिक्षित किया जा रहा है।

प्रबंधन की प्रतिबद्धता: परियोजना प्रबंधन द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना।

एनटीपीसी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑडिट?

एनटीपीसी, भारत की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक कंपनी के रूप में, हमेशा से ही अपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए जानी जाती है। कहलगांव परियोजना में ABMS का सफलतापूर्वक ऑडिट पूरा होना इस बात का प्रमाण है कि कंपनी न केवल बिजली उत्पादन में बल्कि अपनी प्रशासनिक जवाबदेही में भी विश्वस्तरीय मानकों का पालन कर रही है। यह प्रमाणन भविष्य में कंपनी की साख को और अधिक मजबूत करेगा और हितधारकों (Stakeholders) के विश्वास को बढ़ाएगा।

कार्यस्थल पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति

एनटीपीसी कहलगांव के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त कार्यस्थल केवल एक नियम नहीं, बल्कि हमारी कार्य-संस्कृति का अभिन्न अंग है। ऑडिट टीम के साथ बैठक के दौरान उन्होंने दोहराया, "हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन के लक्ष्य प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा कार्य-वातावरण तैयार करना है जहाँ सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता सर्वोपरि हो। BIS का यह सफल ऑडिट हमारे संकल्प को और मजबूत करता है।"

भविष्य की राह: सतत सुधार

स्टेज-2 ऑडिट की सफलता के साथ ही एनटीपीसी कहलगांव अब इस प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम करेगा। यह ऑडिट केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निरंतर सुधार (Continuous Improvement) की एक यात्रा है। आने वाले समय में परियोजना प्रशासन और अधिक तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से 'ह्यूमन इंटरफेस' को कम करने पर जोर देगा, ताकि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को शून्य किया जा सके।

परियोजना के कर्मचारियों में हर्ष

इस उपलब्धि के बाद एनटीपीसी कहलगांव के कर्मचारियों में भी काफी उत्साह है। अधिकारियों ने सभी विभागों के प्रमुखों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। इस अवसर पर परियोजना परिसर में एक छोटी बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें नैतिक मूल्यों के प्रति पुनः संकल्प लिया गया।

एनटीपीसी कहलगांव का यह कदम न केवल बिजली क्षेत्र के लिए, बल्कि भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एक प्रेरणा है। यह संदेश देता है कि यदि नियत साफ हो और प्रणाली मजबूत हो, तो किसी भी संस्थान को विश्वस्तरीय मानक हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता।