पूर्णिया: आरसेटी द्वारा आयोजित 10 दिवसीय निःशुल्क गाय पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य समापन; 31 ग्रामीण महिलाओं (दीदियों) को मिला प्रमाण पत्र, आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ा मजबूत कदम
पूर्णिया (बिहार): बिहार के सीमांचल और पूर्णिया जिले के ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी एक बेहद प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक खबर सामने आ रही है। पूर्णिया जिले में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संचालित और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) द्वारा प्रायोजित आरसेटी (RSETI - ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय 'गाय पालन एवं प्रबंधन' प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आईं कुल 31 जीविका दीदियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी फार्मिंग (गाय पालन) के गुर सीखे। समापन समारोह के दौरान आरसेटी के निदेशक अमर कुमार ने सभी सफल प्रशिक्षणार्थियों को विधिवत प्रमाण पत्र वितरित किए, जिससे महिलाओं के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।
महिला सशक्तिकरण, पशुपालन व्यवसाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के दृष्टिकोण से इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। आइए इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम, इसके उद्देश्यों, डेयरी फार्मिंग के महत्व और समापन समारोह के विभिन्न पहलुओं का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण समझते हैं।
आरसेटी प्रशिक्षण कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और इसका मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या दूर करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए आरसेटी (RSETI) लगातार सराहनीय प्रयास कर रहा है।
कौशल विकास और स्वरोजगार: इस 10 दिवसीय आवासीय या गैर-आवासीय प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल पारंपरिक चूल्हे-चौके तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाना था।
डेयरी फार्मिंग का बढ़ता दायरा: पूर्णिया जैसे कृषि प्रधान जिले में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन (Dairy Farming) रोजगार का एक बहुत बड़ा और सुरक्षित साधन माना जाता है, इसी को ध्यान में रखते हुए गाय पालन का विशेष पाठ्यक्रम चुना गया था।
31 दीदियों की सक्रिय भागीदारी: इस कार्यक्रम में ग्रामीण इलाकों से जुड़ी 31 उत्साही महिलाओं और दीदियों ने पूरी निष्ठा के साथ भाग लिया और प्रशिक्षण के प्रत्येक सत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण के दौरान सिखाई गई महत्वपूर्ण तकनीकी बातें
गाय पालन को सिर्फ शौक या पारंपरिक काम के रूप में न देखकर इसे एक आधुनिक और मुनाफा कमाने वाले व्यवसाय के रूप में कैसे चलाया जाए, इसकी विस्तृत ट्रेनिंग दी गई।
नस्ल सुधार और चयन: विशेषज्ञों ने महिलाओं को उच्च नस्ल की गायों (जैसे जर्सी, एचएफ या उन्नत देसी नस्ल) की पहचान करने और उनके रख-रखाव के बारे में बारीकी से समझाया।
चारा प्रबंधन और स्वास्थ्य देखभाल: गायों को दिए जाने वाले संतुलित आहार, हरा चारा, सूखा चारा और खनिज मिश्रण (Mineral Mixture) की जानकारी दी गई, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ सके।
टीकाकरण और रोग नियंत्रण: विभिन्न संक्रामक पशु रोगों (जैसे खुरपका-मुंहपका रोग) से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण और प्राथमिक पशु चिकित्सा उपचार के गुर भी सिखाए गए।
बैंकिंग और ऋण सुविधा: डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंक से लोन (मुद्रा लोन या डेयरी उद्यमिता योजना के तहत) प्राप्त करने की प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया।
समापन समारोह और निदेशक अमर कुमार का प्रेरणादायक संबोधन
प्रशिक्षण के अंतिम दिन एक भव्य समापन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान के अधिकारियों ने भाग लिया।
प्रमाण पत्रों का वितरण: आरसेटी के निदेशक अमर कुमार ने अपने हाथों से सभी 31 प्रशिक्षित महिलाओं को कोर्स पूरा होने का प्रमाण पत्र सौंपा। यह प्रमाण पत्र न केवल उनकी योग्यता को दर्शाता है, बल्कि बैंक से ऋण प्राप्त करने में भी काफी मददगार साबित होगा।
निदेशक का संदेश: इस अवसर पर निदेशक अमर कुमार ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि "आज के समय में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यदि आप पूरी लगन और वैज्ञानिक तरीकों से गाय पालन का व्यवसाय शुरू करती हैं, तो यह न केवल आपके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारेगा, बल्कि समाज में आपको एक नई पहचान भी दिलाएगा।"
आत्मनिर्भरता का संकल्प: प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाओं ने कहा कि अब वे अपने गांवों में जाकर खुद का छोटा डेयरी फार्म शुरू करेंगी और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनेंगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण पर प्रभाव
इस प्रकार के कार्यक्रमों के दीर्घकालिक परिणाम ग्रामीण समाज पर बहुत गहरे और सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
महिलाएं बन रही हैं उद्यमी: जीविका और आरसेटी जैसी संस्थाओं के माध्यम से आज ग्रामीण महिलाओं में जो आत्मविश्वास जगा है, वह महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी मिसाल है।
दूध उत्पादन को बढ़ावा: पूर्णिया जिले में इस तरह के प्रशिक्षित पशुपालक आने से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय डेयरियों और बाजार को मजबूती मिलेगी।
पूर्णिया में आरसेटी द्वारा आयोजित गाय पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का यह सफल समापन ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर को बयां करता है। निदेशक अमर कुमार के मार्गदर्शन में 31 दीदियों द्वारा प्राप्त यह प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र उनके जीवन में एक नई सुबह की तरह है। जब देश की नारी शक्ति स्वरोजगार के मार्ग पर आगे बढ़ती है, तो पूरा समाज और राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। सरकार और संस्थानों के ऐसे प्रयास वाकई सराहनीय हैं जो हुनर को हकीकत में बदलते हैं।