पूर्णिया: दो महीने बीतने के बाद भी पीजी परीक्षा का रिजल्ट घोषित नहीं होने से छात्रों में आक्रोश; सेशन विलंब होने की चिंता से सहमे विद्यार्थी, विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के उच्च शिक्षा जगत से एक अत्यंत गंभीर, चिंताजनक और छात्रों के भविष्य से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्णिया विश्वविद्यालय (Purnia University) द्वारा आयोजित स्नातकोत्तर (PG) की परीक्षाएं समाप्त हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक परीक्षाफल (Result) घोषित नहीं किया गया है। परिणाम जारी न होने के कारण पीजी के हजारों छात्र-छात्राओं में भारी निराशा, आक्रोश और अपने सेशन के भारी रूप से विलंब (Session Delay) होने की गहरी चिंता सता रही है। छात्र संगठनों और प्रभावित विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर व्यवस्था और सुस्त कार्यशैली के चलते उनका भविष्य अधर में लटक गया है। एक तरफ जहां अन्य विश्वविद्यालयों में सत्र समय पर चल रहे हैं, वहीं पूर्णिया यूनिवर्सिटी में परीक्षा के बाद कॉपियों के मूल्यांकन और रिजल्ट प्रकाशन में हो रही अनावश्यक देरी के कारण छात्रों को उच्च शिक्षा, शोध कार्यों और आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे नेट, जेआरएफ या राज्य स्तरीय शिक्षक बहाली) से वंचित होने का खतरा मंडराने लगा है।
पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत उच्च शिक्षा की व्यवस्था, परीक्षा तंत्र की कमियों, छात्रों के सामने उत्पन्न शैक्षणिक संकट और प्रशासनिक उदासीनता का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण आइए समझते हैं।
संकट की पृष्ठभूमि: परीक्षा खत्म, कॉपियां बंद और रिजल्ट का इंतजार
पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा सत्र नियमितीकरण के लाख दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
दो महीने का लंबा अंतराल: विश्वविद्यालय द्वारा पीजी (विभिन्न सत्रों) की सेमेस्टर परीक्षाएं करीब दो महीने पहले शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करा ली गई थीं। नियमानुसार परीक्षा समाप्त होने के 40 से 45 दिनों के भीतर रिजल्ट आ जाना चाहिए था, लेकिन 60 दिन पार हो जाने के बाद भी पोर्टल पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।
छात्रों की मानसिक प्रताड़ना: परीक्षा देने के बाद छात्र अपने आगे की पढ़ाई या रोजगार की तैयारी करते हैं, लेकिन रिजल्ट अटका रहने के कारण वे न तो अगले सेमेस्टर में चैन से पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही कोई दूसरा कदम उठा पा रहे हैं।
विश्वविद्यालय का मौन: परीक्षा विभाग की तरफ से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कॉपियों की जांच पूरी हुई है या नहीं और रिजल्ट किस तिथि तक प्रकाशित किया जाएगा, जिससे संशय की स्थिति और अधिक गहरा गई है।
सेशन विलंब होने की चिंता और भविष्य पर मंडराता खतरा
पीजी के छात्रों के लिए सेशन का विलंब होना उनके पूरे करियर ग्राफ को प्रभावित करता है, जिसे लेकर युवाओं में भारी रोष है।
उच्च शिक्षा और रिसर्च पर ब्रेक: जो छात्र आगे पीएचडी (PhD) या नेट (NET/JRF) की तैयारी कर रहे हैं, उनका बहुमूल्य समय विश्वविद्यालय की सुस्ती की वजह से बर्बाद हो रहा है। कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के फॉर्म भरने के लिए पीजी का फाइनल मार्कशीट या पासिंग सर्टिफिकेट जरूरी होता है।
रोजगार और नौकरियों के अवसर छिनना: आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में हर डिग्री समय पर होना अनिवार्य है। यदि समय पर मास्टर डिग्री पूरी नहीं होगी, तो युवा सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियों के अवसरों से वंचित हो जाएंगे।
मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान: दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पूर्णिया आकर पढ़ाई करने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को हॉस्टल, मेस और किराए के मकान का अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है, क्योंकि सेशन लेट होने से उनकी पढ़ाई की अवधि बढ़ जाती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल और छात्र संगठनों का रुख
पूर्णिया विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र लंबे समय से सुस्ती के लिए आलोचनाओं के घेरे में रहे हैं।
सिस्टम में समन्वय की कमी: जानकारों का मानना है कि परीक्षा विभाग और डेटा सेल के बीच आपसी समन्वय की भारी कमी है, जिसके कारण कॉपियों के मूल्यांकन के बाद अंकों की प्रविष्टि (Marks Entry) और टैबुलेशन का काम समय पर पूरा नहीं हो पाता।
छात्र संगठनों की चेतावनी: विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों (जैसे एआईएसएफ, एनएसयूआई, अभाविप आदि) ने चेतावनी दी है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर पीजी का रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया गया, तो वे विश्वविद्यालय मुख्यालय पर जोरदार ताला बंदी और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात: छात्र नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही परीक्षा नियंत्रक और कुलपति (VC) से मिलकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहा है, ताकि रिजल्ट प्रकाशन की तिथि जल्द से जल्द सार्वजनिक की जा सके।
विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई और तकनीकी अड़चनें
मामले के तूल पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय के सूत्रों से कुछ तकनीकी कारणों का हवाला दिया जा रहा है।
मूल्यांकन में देरी: प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कुछ विषयों में प्रोफेसरों द्वारा कॉपियों का मूल्यांकन समय पर पूरा करके नहीं लौटाया गया था, जिसके कारण प्रक्रिया में विलंब हुआ। हालांकि, अब डेटा प्रोसेसिंग का काम अंतिम चरण में है।
जल्द रिजल्ट जारी करने का आश्वासन: विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी त्रुटियों को दूर किया जा रहा है और बहुत जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर रिजल्ट अपलोड कर दिया जाएगा।
पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा दो महीने बीत जाने के बाद भी पीजी परीक्षा का रिजल्ट घोषित न किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है। यह केवल एक परीक्षा का परिणाम रुकने का मामला नहीं है, बल्कि यह सैकड़ों-हजारों छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य और उनके अमूल्य समय की बर्बादी से जुड़ा गंभीर मसला है। विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागते हुए युद्ध स्तर पर काम करना चाहिए और तत्काल प्रभाव से रिजल्ट जारी करना चाहिए, ताकि छात्रों के मन में बैठी सेशन विलंब होने की चिंता समाप्त हो सके और वे अपने भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें