रेलवे बोर्ड का बड़ा कदम: सभी जोन्स से 15 तारीख तक मांगा डिवीजनवार एक्शन प्लान, मानवरहित और व्यस्त गुमटियों को हटाने की तैया
भारतीय रेलवे ने ट्रेन संचालन को सुरक्षित, निर्बाध और तेज बनाने के लिए एक बार फिर से कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में रेलवे बोर्ड ने देश के सभी रेलवे जोन से 15 तारीख तक डिवीजनवार (मंडलवार) विस्तृत एक्शन प्लान (कार्ययोजना) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह पूरा निर्देश मुख्य रूप से देश भर के रेलवे नेटवर्कों पर मौजूद लेवल क्रॉसिंग्स यानी रेलवे गुमटियों (Level Crossings - LCs) को हटाने, उनके स्थान पर रोड ओवर ब्रिज (ROB) या रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण और सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने से जुड़ा हुआ है। बोर्ड के इस कड़े रुख से रेलवे महकमे में हलचल तेज हो गई है।
क्यों उठाया गया यह कदम? (पृष्ठभूमि)
भारतीय रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मालगाड़ियां चलती हैं। इसके बावजूद, आज भी कई मार्गों पर रेलवे गुमटियां (Level Crossings) मौजूद हैं।
दुर्घटनाओं की आशंका: समपार फाटकों (गुमटियों) पर अक्सर लापरवाही के कारण सड़क हादसों और ट्रेन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार वाहन ट्रैक पर फंस जाते हैं, जिससे बड़ी अनहोनी हो जाती है।
ट्रेनों की रफ्तार में बाधा: व्यस्त गुमटियों के बार-बार खुलने और बंद होने के कारण ट्रेनों को अपनी गति धीमी करनी पड़ती है या रोकना पड़ता है, जिससे ट्रेनें लेट होती हैं और रेलवे को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
शून्य दुर्घटना नीति (Zero Accident Mission): रेलवे का लक्ष्य नेटवर्क से सभी लेवल क्रॉसिंग्स को चरणबद्ध तरीके से खत्म करना है ताकि हादसों की गुंजाइश को पूरी तरह से नकारा जा सके।
एक्शन प्लान में क्या-क्या शामिल होगा?
रेलवे बोर्ड द्वारा मांगे गए इस डिवीजनवार एक्शन प्लान में प्रत्येक मंडल को निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट और भविष्य की रूपरेखा तैयार करके देनी होगी:
गुमटियों की मौजूदा स्थिति: संबंधित डिवीजन के तहत आने वाले सभी ए, बी, सी और डी श्रेणी के समपार फाटकों (LCs) की वर्तमान संख्या और उनकी व्यस्तता (Traffic Density) का पूरा डेटा।
आरओबी (ROB) और आरयूबी (RUB) का प्रस्ताव: जहां यातायात का दबाव अधिक है, वहां सड़क ओवरब्रिज या अंडरब्रिज बनाने के लिए अब तक क्या प्रगति हुई है और आगामी महीनों में इसके निर्माण का क्या ब्लूप्रिंट है।
सब्सिट्यूट रोड नेटवर्क: रेलवे ट्रैक के समानांतर या वैकल्पिक रास्ते बनाकर गुमटियों को पूरी तरह बंद करने की योजना।
समयबद्ध क्रियान्वयन (Time-bound Execution): किस प्रोजेक्ट को कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी एक स्पष्ट समय-सारणी (Timeline)।
रेलवे जोन्स और डिवीजनों पर बढ़ी प्रशासनिक हलचल
रेलवे बोर्ड के इस आदेश के बाद देश के सभी जोनल मुख्यालयों (जैसे सेंट्रल रेलवे, नॉर्दर्न रेलवे, ईस्ट सेंट्रल रेलवे आदि) में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। सभी जोन्स ने अपने-अपने अधीन आने वाले मंडलों (Divisions) को निर्देशित कर दिया है कि वे निर्धारित डेडलाइन (15 तारीख) से पहले अपना ठोस और व्यावहारिक एक्शन प्लान तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजें। बोर्ड इस प्लान की गहन समीक्षा करेगा और इसके बाद बजट आवंटन व निर्माण कार्यों को गति दी जाएगी।
रेलवे बोर्ड का यह कदम भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और सुरक्षा सुधारों की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि मानवरहित और व्यस्त गुमटियों को समय पर हटाकर उनकी जगह आरयूबी या आरओबी का निर्माण पूरा कर लिया जाता है, तो इससे न केवल ट्रेन हादसों में भारी कमी आएगी, बल्कि ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी और यात्रियों का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगा। सभी की निगाहें अब 15 तारीख पर टिकी हैं कि विभिन्न जोन किस प्रकार का एक्शन प्लान बोर्ड के सामने पेश करते हैं।