11 साल बाद RJD का राजभवन मार्च, 5 साल बाद सड़क पर उतरे तेजस्वी; छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
पटना: बिहार की राजनीति में बुधवार, 19 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिला। लालू प्रसाद यादव की पार्टी करीब 11 साल बाद राजभवन मार्च के लिए सड़क पर उतरी। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी करीब पांच साल बाद इस तरह के पैदल राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय रूप से सड़क पर दिखाई दिए। मार्च का केंद्र छात्रों, युवाओं, बेरोजगारी, पेपर लीक और सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित AK-47 फायरिंग का मुद्दा रहा।
राजद ने इस मार्च के जरिए बिहार सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता पटना की सड़कों पर उतरे। मार्च को लेकर सुबह से ही राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी।
11 साल बाद राजभवन मार्च से RJD का शक्ति प्रदर्शन
राष्ट्रीय जनता दल के लिए यह मार्च इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी ने लंबे अंतराल के बाद राजभवन की ओर इस तरह का बड़ा मार्च निकाला। 11 साल बाद सड़क पर उतरकर आरजेडी ने अपने संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता का प्रदर्शन किया।
पार्टी ने मार्च को केवल एक घटना के विरोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे छात्र और युवा मुद्दों से जोड़कर व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप देने की कोशिश की। तेजस्वी यादव ने पेपर लीक, बेरोजगारी, परीक्षा में पारदर्शिता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को भी उठाया।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो यह मार्च तेजस्वी यादव के लिए भी अहम है। पिछले कुछ वर्षों में उनकी सड़क पर आंदोलनकारी नेता के रूप में सक्रियता की तुलना में चुनावी और राजनीतिक गतिविधियां अधिक चर्चा में रही थीं। ऐसे में उनका खुद कार्यकर्ताओं के साथ पैदल मार्च में उतरना पार्टी के लिए अलग संदेश देता है।
पांच साल बाद सड़क पर आंदोलन करते दिखे तेजस्वी
तेजस्वी यादव के लिए इस मार्च का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि वह करीब पांच साल बाद सड़क पर पैदल आंदोलन करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ आगे बढ़कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
तेजस्वी के नेतृत्व में मार्च का उद्देश्य सरकार तक छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि छात्रों के अधिकार, रोजगार और परीक्षा में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा।
यह सक्रियता ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार में छात्र और युवा मुद्दे राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील बने हुए हैं। पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर छात्र संगठनों की ओर से भी आवाज उठती रही है।
सिवान फायरिंग बना मार्च का प्रमुख मुद्दा
राजद के इस प्रदर्शन का तत्काल राजनीतिक कारण सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान कथित AK-47 फायरिंग की घटना रही। विपक्ष ने इस घटना को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि छात्रों पर AK-47 से फायरिंग का आदेश किसने दिया। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
हालांकि, घटना की परिस्थितियों और फायरिंग के लिए जिम्मेदारी से जुड़े सभी तथ्यों को आधिकारिक जांच के आधार पर ही अंतिम रूप से स्थापित किया जा सकता है। फिलहाल विपक्ष ने इसे सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाया है।
जेपी गोलंबर से शुरू हुआ मार्च
राजद के कार्यक्रम में बदलाव के बाद मार्च बुधवार सुबह करीब 10 बजे जेपी गोलंबर से शुरू किया गया। तेजस्वी यादव ने पार्टी के नेताओं, सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की थी।
जेपी गोलंबर से शुरू हुए मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हाथों में पार्टी के झंडे और विभिन्न मुद्दों से जुड़े पोस्टर लिए कार्यकर्ता आगे बढ़ते रहे।
राजधानी के प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के पहुंचने के कारण यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा। प्रशासन ने पहले से ही कई इलाकों में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर तैयारी की थी।
पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च रोकने की कोशिश की
मार्च को देखते हुए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।
बाद में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने कुछ बैरिकेड्स तोड़ दिए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद स्थिति और गरमा गई। तेजस्वी यादव ने पुलिस कार्रवाई पर सरकार को निशाने पर लिया और कहा कि उनका संघर्ष जारी रहेगा।
तेजस्वी यादव हिरासत में लिए गए
मार्च के दौरान पुलिस ने तेजस्वी यादव और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। एनडीटीवी की लाइव रिपोर्ट के अनुसार, मार्च को आयकर विभाग के पास रोक दिया गया था और इसके बाद तेजस्वी यादव को हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद भी तेजस्वी ने अपने आंदोलन को जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह छात्रों के अधिकारों, बेरोजगारी कम करने, पेपर लीक रोकने और परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर आवाज उठाते रहेंगे।
इस घटनाक्रम ने मार्च को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया।
छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर जोर
तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में केवल सिवान की घटना पर बात नहीं की। उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े कई मुद्दों को उठाया।
इनमें प्रमुख रूप से बेरोजगारी, पेपर लीक, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था शामिल रहे। उन्होंने सरकार पर युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया।
आरजेडी की रणनीति यह रही कि सिवान की घटना को व्यापक छात्र-युवा आंदोलन से जोड़ा जाए। इससे पार्टी को बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीतिक रूप से जोड़ने का अवसर भी मिल सकता है।
सरकार पर तेजस्वी का हमला
मार्च के दौरान तेजस्वी यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकार को जवाब देना होगा।
पुलिस कार्रवाई के बाद उन्होंने सरकार के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही। वाटर कैनन के इस्तेमाल पर भी उन्होंने सरकार को निशाने पर लिया और दावा किया कि इससे आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
तेजस्वी का यह रुख बताता है कि आरजेडी आने वाले दिनों में छात्र और युवा मुद्दों को राजनीतिक अभियान के केंद्र में रख सकती है।
NDA ने मार्च पर साधा निशाना
जहां आरजेडी इस मार्च को छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने इसे अलग नजरिए से देखा। एनडीए नेताओं ने तेजस्वी यादव के मार्च पर राजनीतिक तंज भी कसा और इसे उनके राजनीतिक करियर से जोड़कर निशाना बनाया।
इस तरह मार्च के बाद बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। एक ओर आरजेडी इसे छात्रों के मुद्दों की लड़ाई बता रही है, वहीं एनडीए इसे राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में देख रहा है।
महागठबंधन की राजनीति पर भी असर
आरजेडी के इस मार्च के बीच विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में आरजेडी और अन्य विपक्षी दलों के बीच कार्यक्रमों और रणनीति को लेकर अलग-अलग रुख का उल्लेख किया गया है।
राजनीतिक रूप से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में विपक्षी दलों के सामने सरकार के खिलाफ साझा रणनीति बनाने की चुनौती बनी हुई है। आरजेडी यदि छात्र और युवा मुद्दों पर अकेले बड़े आंदोलन खड़े करती है तो इससे उसकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
तेजस्वी के लिए राजनीतिक वापसी का संकेत?
तेजस्वी यादव के पांच साल बाद सड़क पर पैदल आंदोलन करने को उनके राजनीतिक सक्रियता अभियान के रूप में भी देखा जा रहा है। कुछ राजनीतिक विश्लेषण इसे युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और विपक्ष के नेता के तौर पर सड़क पर सक्रिय उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश मान रहे हैं।
बिहार में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या है। रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दे उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इन मुद्दों पर आंदोलन के जरिए तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
कानून-व्यवस्था और प्रशासन पर भी सवाल
सिवान की कथित फायरिंग की घटना ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया।
वहीं, प्रशासन की ओर से मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तथा बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक व्याख्या आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
RJD के लिए आगे की चुनौती
मार्च के जरिए आरजेडी ने अपनी राजनीतिक सक्रियता जरूर दिखाई है, लेकिन अब चुनौती इस आंदोलन को लगातार बनाए रखने की है। केवल एक दिन के प्रदर्शन से छात्र और युवा वर्ग के बीच स्थायी राजनीतिक समर्थन हासिल करना आसान नहीं होगा।
पार्टी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह पेपर लीक, बेरोजगारी, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार से किन ठोस कदमों की मांग कर रही है।
यदि आरजेडी इन मुद्दों पर लगातार अभियान चलाती है तो यह आंदोलन व्यापक राजनीतिक रूप ले सकता है। वहीं, यदि आंदोलन केवल तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रिया तक सीमित रहता है तो इसका प्रभाव सीमित हो सकता है।
बिहार की राजनीति में 19 अगस्त 2026 का दिन आरजेडी और तेजस्वी यादव के लिए महत्वपूर्ण रहा। 11 साल बाद पार्टी के राजभवन मार्च और करीब पांच साल बाद तेजस्वी के सड़क पर पैदल आंदोलन ने विपक्ष की सक्रियता का नया संदेश दिया।
सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान कथित AK-47 फायरिंग इस मार्च का तत्काल कारण बनी, लेकिन तेजस्वी यादव ने इसके साथ बेरोजगारी, पेपर लीक, परीक्षा में पारदर्शिता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे व्यापक मुद्दों को भी जोड़ा।
मार्च के दौरान पुलिस की बैरिकेडिंग, वाटर कैनन का इस्तेमाल और तेजस्वी यादव समेत प्रदर्शनकारियों की हिरासत ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया।
अब देखना होगा कि यह आंदोलन बिहार की राजनीति में कितना लंबा असर छोड़ता है और क्या आरजेडी छात्र-युवा मुद्दों को अपने व्यापक राजनीतिक अभियान में बदल पाती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तेजस्वी यादव ने सड़क पर उतरकर सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की है कि छात्र, युवा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे आने वाले राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में रहेंगे।