जमीन विवाद के कारण रुका सड़क निर्माण, सिसौनी-शंकर लोहार मुख्य सड़क पर बालू लदा ओवरलोड ट्रक फंसा; सात घंटे की मशक्कत के बाद निकला वाहन
दरभंगा। जिले के सिसौनी-शंकर लोहार मुख्य सड़क पर जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा सड़क निर्माण एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया। शनिवार को सड़क के अधूरे हिस्से पर बालू से लदा एक ओवरलोड ट्रक दलदल में फंस गया। ट्रक को बाहर निकालने के लिए ग्रामीणों, स्थानीय लोगों और मशीनों की मदद से करीब सात घंटे तक लगातार प्रयास करना पड़ा। इस दौरान सड़क पर आवागमन पूरी तरह बाधित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का लगभग 25 मीटर हिस्सा पिछले काफी समय से जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है। कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी देने के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय पर इस विवाद का निपटारा कर सड़क का निर्माण पूरा करा दिया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
अधूरी सड़क से रोजाना हो रही परेशानी
सिसौनी-शंकर लोहार मुख्य सड़क क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसी सड़क से प्रतिदिन किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचाते हैं, छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज जाते हैं तथा स्थानीय व्यापारी आवश्यक सामान का परिवहन करते हैं।
लेकिन सड़क का अधूरा हिस्सा लोगों के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है। बरसात के मौसम में यहां कीचड़ और जलभराव हो जाता है, जिससे भारी वाहनों के साथ-साथ छोटे वाहन और पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बालू लदा ओवरलोड ट्रक बीच सड़क में धंसा
शनिवार सुबह एक ओवरलोड बालू लदा ट्रक इस मार्ग से गुजर रहा था। जैसे ही वाहन अधूरे और कच्चे हिस्से पर पहुंचा, सड़क की मिट्टी धंस गई और ट्रक के पिछले पहिए कीचड़ में फंस गए।
चालक ने वाहन निकालने का प्रयास किया, लेकिन हर कोशिश के साथ ट्रक और गहराई तक धंसता चला गया। कुछ ही देर में सड़क पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
सात घंटे तक चला बचाव अभियान
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने पहले अपने स्तर पर रस्सियों और ट्रैक्टर की मदद से ट्रक निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद जेसीबी मशीन और अन्य भारी उपकरण बुलाए गए। लगातार करीब सात घंटे तक चले संयुक्त प्रयास के बाद ट्रक को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इसके बाद ही सड़क पर यातायात सामान्य हो पाया।
इस दौरान कई लोग घंटों जाम में फंसे रहे, जबकि कुछ वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा।
25 मीटर सड़क का निर्माण बना सबसे बड़ी बाधा
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का अधिकांश भाग बनकर तैयार है, लेकिन केवल लगभग 25 मीटर का हिस्सा जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है। यही छोटा-सा हिस्सा पूरे मार्ग को अनुपयोगी बना रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि इस हिस्से का निर्माण पूरा हो जाए, तो हजारों लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी और दुर्घटनाओं तथा जाम की समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
प्रशासन के प्रति लोगों में नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग के प्रति नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार अधिकारियों को आवेदन देकर सड़क निर्माण पूरा कराने और जमीन विवाद का समाधान करने की मांग कर चुके हैं।
उनका आरोप है कि केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। परिणामस्वरूप आम लोगों को हर दिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों और व्यापारियों पर असर
यह सड़क आसपास के गांवों की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। किसान इसी मार्ग से धान, मक्का, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचाते हैं।
सड़क खराब होने के कारण परिवहन लागत बढ़ रही है और कई बार समय पर सामान बाजार तक नहीं पहुंच पाता। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि निर्माण सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होती है।
विद्यार्थियों और मरीजों को भी परेशानी
स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को प्रतिदिन इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में सड़क इतनी खराब हो जाती है कि बच्चों को पैदल चलना पड़ता है।
इसके अलावा एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी इस अधूरे हिस्से से गुजरने में कठिनाई होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाना पड़े तो देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
जमीन विवाद बना विकास में सबसे बड़ी बाधा
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं में जमीन विवाद अक्सर सबसे बड़ी बाधा बन जाते हैं। समय पर विवाद का समाधान नहीं होने से परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रह जाती हैं और इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन, राजस्व विभाग और संबंधित पक्षों को मिलकर इस विवाद का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि विकास कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।
ग्रामीणों की प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग से मांग की है कि सड़क के अधूरे हिस्से का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि जमीन विवाद का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में इससे भी बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
लोगों ने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि सात घंटे तक चले इस घटनाक्रम से सबक लेते हुए संबंधित विभाग और जिला प्रशासन जमीन विवाद का समाधान कर सड़क निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराएंगे।
यदि सड़क का शेष 25 मीटर हिस्सा भी बन जाता है, तो क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी, व्यापार और कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी तथा छात्रों, मरीजों और आम नागरिकों को रोजाना होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। ग्रामीणों का मानना है कि विकास कार्यों में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं का समय पर समाधान ही क्षेत्र के समग्र विकास का आधार बन सकता है।