अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ ने जिला शिक्षा पदाधिकारी के समक्ष रखी शिक्षकों की समस्याएं, समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग
भागलपुर: जिले के शैक्षणिक माहौल को सुदृढ़ करने और शिक्षकों की लंबित समस्याओं के निराकरण के लिए ‘अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ’ का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से मिला। संघ के सचिव सोहिल दास के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को जिले के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की विभिन्न कठिनाइयों से विस्तार से अवगत कराया।
शिक्षकों की प्रमुख समस्याएं और मांगें
बैठक के दौरान संघ के सचिव सोहिल दास ने कई ऐसे ज्वलंत मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया, जो पिछले काफी समय से शिक्षकों के बीच असंतोष का कारण बने हुए हैं। सोहिल दास ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब तक शिक्षकों की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
प्रोन्नति (Promotion) का मामला: जिले के सैकड़ों शिक्षकों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से लंबित है। संघ ने मांग की कि अविलंब विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित कर पात्र शिक्षकों को उनका हक दिया जाए।
वेतन भुगतान और एरियर: कई शिक्षकों के वेतन भुगतान में अनियमितता और लंबे समय से लंबित एरियर के भुगतान को लेकर सोहिल दास ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि समय पर वेतन न मिलने से शिक्षकों का मनोबल गिरता है और इसका सीधा असर पठन-पाठन पर पड़ता है।
स्थानांतरण नीति: शिक्षकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता लाने और आपसी सहमति या विशेष परिस्थितियों वाले स्थानांतरण आवेदनों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया गया।
कार्यालयों में शोषण से मुक्ति: संघ के सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि कई शिक्षकों को विभिन्न कार्यालयी कार्यों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय बर्बाद होता है। उन्होंने इस प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाने की मांग की।
डीईओ ने दिया आश्वासन
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने संघ के प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर संभव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा। वेतन और एरियर से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने के लिए उन्होंने संबंधित लिपिकीय शाखा को तत्काल निर्देश देने की बात कही।
संघ का रुख: 'शिक्षकों का मान-सम्मान सर्वोपरि'
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सचिव सोहिल दास ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ हमेशा से अपने सदस्यों और शिक्षकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी प्रकार का विवाद नहीं चाहता, बल्कि वह प्रशासन और शिक्षकों के बीच एक सेतु (Bridge) बनकर काम करना चाहता है।
उन्होंने आगे कहा, "हम चाहते हैं कि भागलपुर जिले के स्कूलों में शिक्षकों को ऐसा माहौल मिले, जहां वे बिना किसी मानसिक तनाव के छात्रों को शिक्षा दे सकें। यदि हमारी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो संघ भविष्य में अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होगा।"
शैक्षणिक सुधार में संघ की भूमिका
इस बैठक का एक सकारात्मक पहलू यह भी था कि संघ ने केवल समस्याओं की चर्चा नहीं की, बल्कि शैक्षणिक सुधार में भी सहयोग का आश्वासन दिया। संघ ने कहा कि वे न केवल शिक्षकों की मांगों के लिए लड़ रहे हैं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में ‘निपुण भारत’ जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी विभाग के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे।
भागलपुर शिक्षा विभाग और अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ के बीच हुई यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिक्षकों के मुद्दों को लेकर अब प्रशासन ने जिस प्रकार का रुख अपनाया है, उससे शिक्षकों में उम्मीद जगी है। जिले के शैक्षणिक जगत में इस प्रतिनिधिमंडल की पहल को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासनों पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी ढंग से अमल होता है।
इस अवसर पर संघ के अन्य पदाधिकारी और कई वरिष्ठ शिक्षक भी मौजूद थे, जिन्होंने सामूहिक रूप से अपनी मांगों को एक स्वर में दोहराया। संघ ने स्पष्ट किया है कि वे लगातार विभाग के संपर्क में रहेंगे ताकि समस्याओं का निराकरण समयबद्ध तरीके से हो सके।