सावन की अंतिम सोमवारी पर पूर्णिया जिले के मीरगंज, हरदा, रूपौली, कसबा और जलालगढ़ में उमड़ा आस्था का सैलाब: शिवालयों में गूंजे 'हर-हर महादेव' के जयकारे
सार्वसंक्षेप: पवित्र श्रावण मास के अंतिम पड़ाव यानी अंतिम सोमवारी के अवसर पर बिहार के पूर्णिया जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों में अभूतपूर्व भक्तिमय माहौल देखने को मिला। जिले के प्रमुख कस्बों और बाजारों—मीरगंज, हरदा, रूपौली, कसबा और जलालगढ़ के सभी छोटे-बड़े शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। चिलचिलाती धूप और उमस की परवाह किए बिना शिव भक्तों ने मंदिरों में लंबी कतारों में लगकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और भक्ति संगीत की गूंज से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। भक्तों ने देवाधिदेव महादेव से अपने परिवार और समाज के लिए सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
विभिन्न क्षेत्रों में उमड़ी भीड़: आस्था के आगे फीकी पड़ी धूप
सावन की अंतिम सोमवारी होने के कारण पूर्णिया के इन सभी पांचों क्षेत्रों (मीरगंज, हरदा, रूपौली, कसबा और जलालगढ़) के मंदिरों में श्रद्धालुओं का उत्साह अपने चरम पर था।
अहले सुबह से शुरू हुआ तांता: सूर्योदय से पहले ही मंदिरों के कपाट खुल चुके थे और स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा सामग्री (गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग) लेकर पहुंचने लगे थे।
लंबी कतारें और अनुशासन: मीरगंज और कसबा के पुराने शिव मंदिरों में पैर रखने की जगह नहीं बची थी। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया और पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
जलालगढ़, रूपौली और हरदा के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान
पूर्णिया के इन ऐतिहासिक और व्यावसायिक केंद्रों पर स्थित मंदिरों में सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर विशेष प्रबंध और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए थे।
जलालगढ़ और रूपौली के ग्रामीण शिवालय: जलालगढ़ और रूपौली के ग्रामीण अंचलों में स्थित शिव मंदिरों में विशेष रूप से रुद्राभिषेक और हवन का आयोजन किया गया। दूर-दराज से आए भक्तों ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की।
हरदा और मीरगंज की बाजार समितियां और चौक: हरदा बाजार तथा मीरगंज क्षेत्र के प्रमुख शिवालयों को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय युवाओं और कमेटियों द्वारा पेयजल व छांव की सुंदर व्यवस्था की गई थी।
भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक-आध्यात्मिक उल्लास
केवल जलाभिषेक ही नहीं, बल्कि इस अंतिम सोमवारी के अवसर पर पूरा इलाका भक्ति संगीत और संकीर्तन से गूंज उठा।
संध्याकालीन भजन-कीर्तन: मंदिरों के प्रांगण में महिलाओं और स्थानीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक शिव भजनों ("बम-बम भोले", "शिव शंभू", और "हर-हर गंगे") की प्रस्तुतियां दी गईं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।
सुख-समृद्धि की कामना: भक्तों ने भगवान शिव और माता पार्वती से अपने जीवन में सुख, आरोग्य, अच्छी फसल और पारिवारिक समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। किसानों ने इस दौरान अच्छी बारिश और फसल की पैदावार के लिए विशेष प्रार्थना की।
प्रशासनिक चौकसी और शांतिपूर्ण समापन
इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कई क्षेत्रों में भीड़ जुटने के कारण स्थानीय पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: मीरगंज, कसबा और जलालगढ़ के मुख्य चौराहों तथा मंदिरों के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि यातायात सुचारू रहे और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।
शांतिपूर्ण माहौल: प्रशासन और स्थानीय समितियों के आपसी सहयोग से सावन की यह अंतिम सोमवारी शांतिपूर्ण और पूरी तरह अनुशासित तरीके से संपन्न हुई।
पूर्णिया जिले के मीरगंज, हरदा, रूपौली, कसबा और जलालगढ़ में सावन की अंतिम सोमवारी पर उमड़े श्रद्धालुओं का यह सैलाब इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और भगवान शिव के प्रति लोगों की अटूट आस्था आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है। इस अंतिम सोमवारी के साथ ही इस वर्ष के सावन मास के अनुष्ठानों का समापन हर्षोल्लास के साथ हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।