शिक्षा, संस्कारों और छात्र-हित के नए आयामों पर हुई विशेष चर्चा; विद्यालय परिसर में गूंजे प्रेरणादायी विचार

बिहार के पूर्णिया जिले के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार एसआरडीएवी पब्लिक स्कूल (SRDAV Public School) के प्रांगण में सोमवार को एक बेहद भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय के यशस्वी और ऊर्जावान प्राचार्य (Principal) अश्विनी कुमार सिंह के नेतृत्व एवं कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह शिक्षण संस्थान केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development), नैतिक मूल्यों और उच्च संस्कारों को गढ़ने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सोमवार की सुबह से ही विद्यालय परिसर में एक अलग ही उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला, जहाँ शिक्षक, शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और अभिभावक पूरी तल्लीनता के साथ इस आयोजन का हिस्सा बने।

क्या था कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य और आयोजन की रूपरेखा?

प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारना, उन्हें आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना तथा शैक्षणिक सत्र की आगामी गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। विद्यालय के प्राचार्य अश्विनी कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए स्वागत गान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। विद्यालय का पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर नजर आ रहा था।

प्राचार्य अश्विनी कुमार सिंह का प्रेरणादायक संबोधन: "विद्यार्थियों के लिए अनुशासन और कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी"

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता और विद्यालय के प्राचार्य अश्विनी कुमार सिंह ने अपने संबोधन में शिक्षकों, अभिभावकों और विशेष रूप से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण और प्रेरक बातें कहीं। उन्होंने अपने संबोधन के मुख्य बिंदुओं में निम्नलिखित बातों पर विशेष जोर दिया:

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कार: प्राचार्य सिंह ने कहा कि डीएवी संस्थाएं हमेशा से शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार डालने के लिए जानी जाती हैं। आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल उच्च अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक अच्छा इंसान बनना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

समय का सदुपयोग और लक्ष्य निर्धारण: विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती। इसके पीछे एक छात्र का कड़ा अनुशासन, निरंतर अभ्यास और अपने माता-पिता तथा गुरुजनों के प्रति आदरभाव होना अनिवार्य है।

तकनीक और नैतिकता का संतुलन: आज की डिजिटल दुनिया में बच्चों को तकनीक का उपयोग अपनी शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए, न कि अपना समय व्यर्थ गंवाने के लिए।

शिक्षकों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी

इस आयोजन में विद्यालय के सभी शिक्षकों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बौद्धिक प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रोजेक्ट्स और मॉडल्स ने यह दर्शा दिया कि एसआरडीएवी पब्लिक स्कूल के बच्चे सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और प्रायोगिक ज्ञान में भी कितने आगे हैं।

अभिभावकों ने भी इस कार्यक्रम की भूरी-भरी प्रशंसा की। कई अभिभावकों का कहना था कि विद्यालय प्रशासन द्वारा समय-समय पर इस तरह के आयोजनों के किए जाने से बच्चों का मानसिक और बौद्धिक विकास बहुत तेजी से होता है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

समापन समारोह और भविष्य के संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और उन्हें भविष्य में और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया गया। अंत में राष्ट्रगान के साथ इस भव्य कार्यक्रम का शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण समापन हुआ।

पूर्णिया के एसआरडीएवी पब्लिक स्कूल में प्राचार्य अश्विनी कुमार सिंह के सान्निध्य में हुआ यह आयोजन एक बार फिर इस बात की गवाही देता है कि यदि शिक्षण संस्थानों में सही दिशा और मजबूत नेतृत्व मिल जाए, तो छात्र राष्ट्र के भविष्य को संवारने में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह कार्यक्रम लंबे समय तक विद्यालय के इतिहास में एक यादगार मील का पत्थर बना रहेगा।