पक्की सीढ़ी घाट पर स्नान करने की मिली खास सुविधा; तरह-तरह के रूपों और अनूठे अंदाज में बाबाधाम की ओर बढ़ रहे शिवभक्त
सुल्तानगंज/भागलपुर (विशेष संवाददाता): देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र श्रावण मास (सावन) के इस पावन और आध्यात्मिक अवसर पर बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तर वाहिनी गंगा के तट से लेकर झारखंड के देवघर (बाबानगरी) तक जाने वाले कांवरिया पथ पर आस्था का एक अत्यंत ही भव्य और अलौकिक नजारा देखने को मिल रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच सुल्तानगंज के प्रसिद्ध पक्की सीढ़ी घाट और नए सीढ़ी घाट पर कांवरियों को स्नान करने की विशेष सुविधा मिलने लगी है, जिससे शिवभक्तों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। इस सावन मेले में देश के कोने-कोने से पहुँचे श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और भक्ति का प्रदर्शन करने के लिए तरह-तरह के अनोखे रूपों और अंदाज में बाबा बैद्यनाथ के दरबार की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। केसरिया वस्त्रों में रंगे कांवरिया मार्ग पर गूंजते 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय हो चुका है।
पक्की सीढ़ी घाट पर स्नान की सुविधा और गंगा के बढ़ते जलस्तर का प्रभाव
श्रावणी मेले के परवान चढ़ने के साथ ही सुल्तानगंज के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है:
घाटों पर उमड़ी भीड़ और सुविधा: उत्तर वाहिनी गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण पानी अब पक्की सीढ़ियों तक पहुँचने लगा है। इससे दूर-दराज से आ रहे कांवरियों को पक्की सीढ़ी घाट पर स्नान करने और पवित्र जल भरने में काफी सुविधा मिल रही है। हालांकि, कुछ स्थानों पर फिसलन और पानी फैलने से शुरुआती प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कांवरियों का उत्साह इन छोटी-सी कठिनाइयों पर भारी पड़ रहा है।
प्रशासनिक चौकसियाँ और व्यवस्थाएं: कांवरियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा घाट से लेकर कांवरिया पथ तक जगह-जगह मजिस्ट्रेट, पुलिस बल, स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और चेंजिंग रूम जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो।
तरह-तरह के रूपों में बाबाधाम की यात्रा कर रहे शिवभक्त
सावन की इस पावन यात्रा में भक्तों की निष्ठा और आराधना के तौर-तरीके इतने विविध और अनोखे हैं कि देखने वाले दंग रह जाते हैं:
कोई सामान्य बम तो कोई डांडी बम: कांवरिया पथ पर कोई सामान्य कांवर कंधे पर रखकर बोलबम का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ रहा है, तो कोई कठिन 'डांडी बम' बनकर दंड-प्रणाम करते हुए पूरी निष्ठा के साथ बाबा के मार्ग पर बढ़ रहा है।
अनोखे स्वरूप और झांकियां: कई जत्थे विशेष प्रकार के भव्य और भारी-भरकम कांवर, आकर्षक झांकियां तथा धार्मिक प्रतीकों को सजाकर चल रहे हैं। बच्चों, युवाओं से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक—सभी के चेहरों पर लंबी पैदल यात्रा की थकान के बजाय सिर्फ बाबा के दर्शन की ललक और एक अलग ही ऊर्जा साफ झलक रही है।
अमीरी-गरीबी का भेद मिटाकर एक हो रहे शिवभक्त
इस यात्रा की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहाँ आकर समाज के सारे भेद स्वतः समाप्त हो जाते हैं:
अनेकताप में एकता का संदेश: देश के विभिन्न राज्यों से आए अमीर, गरीब, ऊंच-नीच का भेद भुलाकर एक ही रंग यानी भगवा रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। सभी एक ही कतार में, एक ही स्वर में 'बोल बम' का नारा लगाते हुए बाबा बैद्यनाथ की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
कांवरियों के अनुभव: छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के विभिन्न जिलों से आए कांवरियों ने बताया कि रास्ते में भले ही कुछ भौतिक परेशानियां हों, लेकिन बाबा की कृपा और पक्की सीढ़ी घाट पर गंगा स्नान का सुखद अनुभव उनकी सारी थकान को चुटकियों में दूर कर देता है।
पक्की सीढ़ी घाट पर स्नान की सुविधा मिलने और शिवभक्तों द्वारा तरह-तरह के अनूठे रूपों में बाबाधाम की यात्रा करने का यह दृश्य सावन के इस महीने को ऐतिहासिक बना रहा है। कांवरियों का यह अटूट साहस, अनुशासन और अटूट विश्वास यह प्रमाणित करता है कि सच्चे मन से की गई आराधना हर बाधा को पार कर लेती है। सुल्तानगंज से देवघर तक गूंजते बोल बम के जयकारों से पूरा कांवरिया पथ शिवमय हो चुका है।