बिहुला-विषहरी की अमर लोकगाथा पर सजे मंच ने बांधा समां पारंपरिक भगतेन नृत्य और लोकनाट्य ने मोहा दर्शकों का मन, उत्कृष्ट कलाकारों को मिला सम्मान
भागलपुर: अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, पौराणिक कथाओं और लोक संस्कृति के जीवंत प्रतीक महापर्व विषहरी पूजा के पावन अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भागलपुर में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक समारोह के दौरान मां विषहरी और भक्त बाला लखेंद्र व बिहुला की अमर प्रेम-कथा और संघर्ष पर आधारित 'भगतेन नृत्य' और पारंपरिक लोकनाट्य का मंचन किया गया। इस मनमोहक प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कलाकारों ने अपनी कला का ऐसा जादू बिखेरा कि पूरा सभागार अंग जनपद की प्राचीन संस्कृति में डूब गया। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
बिहुला-विषहरी की लोकगाथा: अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान
भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में बिहुला-विषहरी की कथा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि यहां की लोकआस्था की आत्मा है:
पतिव्रता बिहुला का संघर्ष: मंच पर कलाकारों ने माता विषहरी के कोप और पति बाला लखेंद्र की सर्पदंश से हुई मृत्यु के बाद बिहुला द्वारा मंजूषा में बैठकर किए गए ऐतिहासिक और दुष्कर जलमार्ग यात्रा का सजीव चित्रण किया।
भावुक कर देने वाले दृश्य: कलाकारों की सधी हुई अभिनय शैली और संवाद अदायगी ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। यह प्रस्तुति दर्शाती है कि कैसे नारी शक्ति और अटूट विश्वास ने मौत को भी मात दे दी थी।
पारंपरिक 'भगतेन नृत्य' और लोकनाट्य का आकर्षण
इस सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण पारंपरिक 'भगतेन नृत्य' और लोकनाट्य की ऊर्जावान प्रस्तुतियां रहीं:
भगतेन नृत्य की लय और ताल: ढोल, ढाक, झांझ और मंजीरों की थाप पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भगतेन नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों के सशक्त शारीरिक हाव-भाव और कदमों की ताल ने पूरे माहौल को ऊर्जावान बना दिया।
लोकनाट्य का सजीव मंचन: स्थानीय लोक कलाकारों ने नाटक के माध्यम से अंगिका संस्कृति की पुरानी परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया। संवादों में स्थानीय भाषा की मिठास और लोकगीतों की गूंज ने दर्शकों को अपनी जड़ों से जुड़ाव का अहसास कराया।
अतिथियों और आयोजकों की उपस्थिति
कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय सांस्कृतिक समितियों और गणमान्य लोगों का विशेष योगदान रहा:
कला और संस्कृति को प्रोत्साहन: समारोह में पहुंचे मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी युवा पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति और लोकगाथाओं से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होते हैं।
अंगिका संस्कृति का संरक्षण: आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी लोक कलाओं और पारंपरिक नृत्यों को संजोकर रखना बेहद जरूरी है, ताकि हमारी ऐतिहासिक धरोहर आने वाले समय में भी जीवित रहे।
कलाकारों का सम्मान: प्रमाण-पत्र व स्मृति चिह्न प्रदान किए गए
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अपनी कला से समां बांधने वाले कलाकारों को सम्मानित करने का विशेष सत्र आयोजित हुआ:
उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना: मंच पर बेहतरीन अभिनय, नृत्य और संगीत देने वाले कलाकारों को मुख्य अतिथियों के हाथों प्रशस्ति पत्र (Certificate) और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।
उत्साहवर्धन: पुरस्कार प्राप्त करने वाले कलाकारों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। इस प्रकार के सम्मान से न केवल कलाकारों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि लोक कलाओं के प्रति उनका समर्पण भी और अधिक मजबूत होता है।
भागलपुर में आयोजित बिहुला-विषहरी की लोकगाथा पर आधारित भगतेन नृत्य और लोकनाट्य का यह आयोजन पूरी तरह सफल और ऐतिहासिक रहा। इस सांस्कृतिक संध्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अंग क्षेत्र की लोककथाएं आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही जीवित और प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुति और उन्हें मिले सम्मान ने इस आयोजन को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।