राज्य सरकार ने संभाली परियोजना की कमान, छह महीने में डीपीआर तैयार करने का लक्ष्य

पटना: बिहार में सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने बक्सर से भागलपुर तक सिक्स-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। पहले इस परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन के माध्यम से हाई-स्पीड कॉरिडोर के रूप में विकसित किए जाने की योजना थी। इसके लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।

अब इस परियोजना में बड़ा बदलाव करते हुए बिहार सरकार ने इसे स्वयं विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत मौजूदा मार्ग को चौड़ा करने के बजाय पूरी तरह नए ग्रीनफील्ड रूट पर आधुनिक एक्सप्रेसवे विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस कदम को राज्य की कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बिहार सरकार ने संभाली परियोजना की जिम्मेदारी

नई योजना के तहत बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के अधीन कार्यरत बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDCL) इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाएगा।

बीएसआरडीसीएल ने 16 जुलाई को परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और ट्रांजैक्शन एडवाइजर (TA) की तैयारी हेतु परामर्श सेवाओं के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इसके साथ ही परियोजना के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे क्या होता है?

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का अर्थ है ऐसा नया राजमार्ग, जिसे पहले से मौजूद सड़क के विस्तार के बजाय पूरी तरह नए मार्ग पर विकसित किया जाता है।

इस प्रकार के एक्सप्रेसवे में आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों, बेहतर सुरक्षा, सीमित प्रवेश (Access Controlled), उच्च गति और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निर्माण किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनफील्ड परियोजनाएं लंबे समय में अधिक प्रभावी और टिकाऊ परिवहन नेटवर्क उपलब्ध कराती हैं।

छह महीने में डीपीआर तैयार करने का लक्ष्य

सरकारी एजेंसी ने परियोजना की डीपीआर छह महीने के भीतर तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

डीपीआर में प्रस्तावित मार्ग, भूमि अधिग्रहण, पुल-पुलिया, इंटरचेंज, लागत, पर्यावरणीय प्रभाव, यातायात अनुमान और परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन शामिल होगा।

डीपीआर तैयार होने के बाद निर्माण कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बक्सर से भागलपुर तक बेहतर कनेक्टिविटी

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वर्तमान में बक्सर से भागलपुर की यात्रा में कई घंटे लगते हैं। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रा का समय काफी कम होने की संभावना है, जिससे लोगों, उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

औद्योगिक और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे केवल परिवहन परियोजना नहीं होते, बल्कि वे आर्थिक विकास के इंजन भी साबित होते हैं।

बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स, कृषि उत्पादों की ढुलाई और पर्यटन को गति मिलेगी। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क और व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

रोजगार के नए अवसर

परियोजना के निर्माण चरण में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

निर्माण कार्य, इंजीनियरिंग सेवाएं, मशीनरी संचालन, निर्माण सामग्री की आपूर्ति और अन्य सहायक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो सकता है।

निर्माण पूरा होने के बाद भी रखरखाव, टोल प्रबंधन, सुरक्षा और सेवा केंद्रों के संचालन में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा एक्सप्रेसवे

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रस्तावित सिक्स-लेन एक्सप्रेसवे में आधुनिक परिवहन सुविधाओं को शामिल किया जा सकता है।

संभावित सुविधाओं में शामिल हो सकते हैं:

  • छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल हाईवे
  • आधुनिक इंटरचेंज और फ्लाईओवर
  • आपातकालीन सहायता केंद्र
  • एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग व्यवस्था
  • सीसीटीवी आधारित निगरानी
  • इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन
  • विश्राम स्थल और ईंधन स्टेशन
  • हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण के उपाय

अंतिम सुविधाओं का निर्धारण डीपीआर के आधार पर किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण होगी बड़ी चुनौती

किसी भी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना में भूमि अधिग्रहण सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण चरण होता है।

सरकार को प्रस्तावित मार्ग के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता होगी। इसके लिए प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमि अधिग्रहण समय पर पूरा हो जाता है, तो परियोजना की गति तेज बनी रह सकती है।

पर्यावरणीय पहलुओं का भी होगा अध्ययन

डीपीआर के दौरान पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत मूल्यांकन भी किया जाएगा।

यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परियोजना से जंगल, जल स्रोत, वन्यजीव और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। आवश्यक होने पर पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष उपाय भी प्रस्तावित किए जाएंगे।

परिवहन नेटवर्क को मिलेगी मजबूती

यह एक्सप्रेसवे बिहार के अन्य राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के साथ बेहतर संपर्क स्थापित करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह परियोजना राज्य के समग्र परिवहन नेटवर्क को अधिक सक्षम बनाएगी और लंबी दूरी की यात्रा को आसान बनाएगी।

निवेशकों के लिए बढ़ेगा आकर्षण

बेहतर सड़क अवसंरचना किसी भी राज्य में निवेश आकर्षित करने का महत्वपूर्ण आधार होती है।

यदि बक्सर–भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे समय पर पूरा होता है, तो इससे औद्योगिक निवेश, विनिर्माण इकाइयों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए बिहार अधिक आकर्षक बन सकता है।

सरकार की दीर्घकालिक योजना

राज्य सरकार का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि बिहार में आधुनिक परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिले और क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सके।

इस परियोजना को राज्य के दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

बक्सर–भागलपुर सिक्स-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के सड़क विकास इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक बन सकता है। परियोजना की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा अपने हाथ में लेना एक बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।

यदि निर्धारित समय के भीतर डीपीआर तैयार होकर निर्माण कार्य शुरू होता है, तो यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी बिहार के बीच तेज, सुरक्षित और आधुनिक संपर्क स्थापित करेगा। साथ ही, यह औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक प्रगति को नई गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।