पूर्णिया पूर्व प्रखंड मुख्यालय सभागार में पंचायत समिति की सामान्य बैठक का हंगामाखेज आयोजन; जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों पर कसा शिकंजा, विधायक विजय खेमका ने जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर दिया जोर

पूर्णिया/पूर्णिया पूर्व (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों से एक बहुत ही बड़ी, अहम और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पूर्णिया पूर्व प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में बुधवार को पंचायत समिति की एक उच्चस्तरीय और बेहद महत्वपूर्ण सामान्य बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख ने की, जिसमें क्षेत्रीय विधायक विजय खेमका विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभिन्न पंचायतों से आए मुखिया, पंचायत समिति सदस्यों (पंसस) और जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की कार्यशैली पर जमकर सवाल उठाए और कई मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाया। बैठक में मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, नल-जल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और सड़क निर्माण जैसे गंभीर मुद्दों पर लंबी चर्चा हुई। विधायक विजय खेमका ने सभी विभागों के अधिकारियों को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि सरकार की हर एक जनकल्याणकारी योजना का पारदर्शी लाभ क्षेत्र के हर एक जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सुनिश्चित किया जाए।

त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में पंचायत समिति की बैठकें स्थानीय विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। आइए इस पूरी बैठक के एजेंडे, जनप्रतिनिधियों के तेवर, विधायक के कड़े निर्देशों और उठाए गए प्रमुख मुद्दों का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण समझते हैं।

बैठक का माहौल और अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का आक्रोश

किसी भी ग्रामीण विकास समीक्षा बैठक में जब स्थानीय प्रतिनिधि खुलकर अपनी बात रखते हैं, तो प्रशासन की कार्यप्रणाली की वास्तविक तस्वीर सामने आती है।

मुखिया और पंसस का आक्रामक रुख: पूर्णिया पूर्व प्रखंड सभागार में आयोजित इस बैठक की शुरुआत से ही माहौल काफी गर्म रहा। विभिन्न पंचायतों से पहुंचे मुखिया और पंचायत समिति सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की सुस्ती को लेकर अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग: जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में आरोप लगाया कि कई विभागों के अधिकारी न तो फोन उठाते हैं और न ही पंचायत स्तर पर हो रहे कार्यों की ठीक से मॉनिटरिंग करते हैं। सदस्यों ने ऐसे लापरवाह और सुस्त अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए उच्चाधिकारियों से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

विकास कार्यों में विलंब पर नाराजगी: ग्रामीण सड़कों की मरम्मत, नाली-गली निर्माण और आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को लेकर सदस्यों ने भारी नाराजगी जताई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के विकास फंड में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 विधायक विजय खेमका की दो टूक: जनता के हितों से कोई समझौता नहीं

बैठक में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए स्थानीय विधायक विजय खेमका ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया।

जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन: विधायक विजय खेमका ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अरबों रुपये भेजे जा रहे हैं, लेकिन यदि धरातल पर उसका सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा है, तो यह स्वीकार्य नहीं है।

अधिकारियों को सख्त निर्देश: विधायक ने सभी विभागीय अधिकारियों (विशेषकर ग्रामीण कार्य विभाग, पीएचईडी, बिजली और स्वास्थ्य विभाग) को निर्देश दिया कि वे जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुनें और उनका त्वरित समाधान करें।

पारदर्शिता और ईमानदारी पर जोर: विधायक ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनप्रतिनिधि जनता की आवाज होते हैं। इसलिए अधिकारियों को पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

 बैठक में उठे प्रमुख मुद्दे और समस्याएं

पूर्णिया पूर्व प्रखंड की इस सामान्य बैठक में कई ज्वलंत और आम जनता से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।

पेयजल और नल-जल योजना की पोल: कई वार्डों में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के तहत लगाए गए नल सूखे पड़े हैं या पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिस पर पीएचईडी के अधिकारियों को तुरंत मरम्मत कराने का टास्क सौंपा गया।

बिजली विभाग की लचर व्यवस्था: ग्रामीण इलाकों में लो-वोल्टेज, जले हुए ट्रांसफार्मर को समय पर न बदलने और मनमाने बिजली बिलों की शिकायतों को लेकर सदस्यों ने बिजली विभाग के कनीय अभियंता को घेरा।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति तथा दवाइयों की कमी का मुद्दा छाया रहा, जिस पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को फटकार लगाई गई।

शिक्षा और राशन कार्ड के मामले: विद्यालयों में एमडीएम (मध्याह्न भोजन) की गुणवत्ता और नए राशन कार्ड के लंबित मामलों के निष्पादन में हो रही देरी पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय और समाधान की रूपरेखा

बैठक के अंत में सभी पक्षों की सहमति से कुछ ठोस निर्णय लिए गए ताकि आने वाले दिनों में क्षेत्र का विकास गति पकड़ सके।

समस्याओं के समाधान की समय-सीमा: अधिकारियों को यह अल्टीमेटम दिया गया कि बैठक में उठाए गए बिंदुओं पर अगले 15 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

संयुक्त निरीक्षण: विकास कार्यों में हो रही गड़बड़ियों की जांच के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाकर औचक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

पूर्णिया पूर्व प्रखंड मुख्यालय में आयोजित पंचायत समिति की यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि जब जनता के चुने हुए प्रतिनिधि अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग होते हैं, तो प्रशासन को भी पटरी पर आना पड़ता है। मुखिया और पंसस द्वारा अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बनाना तथा विधायक विजय खेमका द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का निर्देश देना एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। यदि इस बैठक में लिए गए निर्णयों का ईमानदारी से पालन किया जाए, तो पूर्णिया पूर्व प्रखंड के गांवों में विकास की रफ्तार और तेज होगी तथा आम जनता को राहत मिलेगी।