मधुरापुर प्राथमिक विद्यालय के छात्र ने शिक्षक पर लगाया बेरहमी से मारपीट का गंभीर आरोप; बीडीओ सुप्रभात मिश्रा की पहल पर अभिभावक को बुलाकर कराया गया समझौता
भागलपुर/नारायणपुर (विशेष संवाददाता): बिहार के भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड क्षेत्र से शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक-छात्र संबंधों को झकझोर देने वाला एक मामला प्रकाश में आया है। प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुस्लिम टोला मधुरापुर प्राथमिक विद्यालय के एक छात्र ने विद्यालय के ही एक शिक्षक पर पढ़ाई के दौरान बेरहमी से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना की जानकारी मिलते ही छात्र के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद मामला सीधे नारायणपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के कार्यालय तक जा पहुंचा। छात्र ने बीडीओ के समक्ष पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई और शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। हालांकि, प्रशासनिक सूझबूझ का परिचय देते हुए नारायणपुर के बीडीओ सुप्रभात मिश्रा ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और दोनों पक्षों—पीड़ित छात्र के अभिभावक और संबंधित शिक्षक—को कार्यालय में तलब कर आपसी सहमति से पूरे मामले का शांतिपूर्ण समाधान करा दिया।
क्या है पूरा मामला? मधुरापुर प्राथमिक विद्यालय की घटना
प्राप्त विवरण के अनुसार, नारायणपुर प्रखंड के मुस्लिम टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय में रोज की तरह पठन-पाठन का कार्य चल रहा था। इसी दौरान कक्षा में किसी बात को लेकर शिक्षक और छात्र के बीच विवाद उत्पन्न हो गया:
छात्र का आरोप: पीड़ित छात्र का कहना है कि शिक्षक ने मामूली सी बात पर अपना आपा खो दिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी, जिससे उसके शरीर पर चोट के निशान भी आए। इस घटना से सहमा हुआ छात्र रोते हुए अपने घर पहुंचा और परिजनों को पूरी बात बताई।
परिजनों का गुस्सा: जब छात्र के घर वालों को स्कूल के अंदर एक शिक्षक द्वारा बच्चे के साथ मारपीट किए जाने की बात पता चली, तो उनका आक्रोश भड़क उठा। ग्रामीण और अभिभावक फौरन एकजुट होकर न्याय की गुहार लगाने के लिए नारायणपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित बीडीओ कार्यालय पहुँच गए।
बीडीओ कार्यालय में मचा हंगामा और प्रशासनिक हस्तक्षेप
अचानक बड़ी संख्या में अभिभावकों और छात्र के बीडीओ कार्यालय पहुँचने से वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया:
छात्र ने बीडीओ को सुनाई आपबीती: बीडीओ कार्यालय पहुंचे छात्र ने ब्लॉक प्रमुख अधिकारियों के सामने रोते हुए अपनी पीड़ा बयां की और शिक्षक के अमानवीय रवैये की शिकायत की।
बीडीओ सुप्रभात मिश्रा की त्वरित कार्रवाई: स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नारायणपुर के बीडीओ सुप्रभात मिश्रा ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने आक्रोशित भीड़ और अभिभावकों को शांत कराया और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
अभिभावकों को बुलाकर आपसी सहमति से हुआ समाधान
मामले को तूल पकड़ने से रोकने और शैक्षणिक माहौल को खराब होने से बचाने के लिए प्रशासन ने सूझबूझ से काम लिया:
बैठक का आयोजन: बीडीओ सुप्रभात मिश्रा ने विद्यालय के संबंधित शिक्षक, प्रधानाध्यापक और पीड़ित छात्र के माता-पिता/अभिभावकों को अपने कार्यालय कक्ष में आमने-सामने बिठाया। दोनों पक्षों की बातें विस्तार से सुनी गईं।
आपसी सुलह और समझौता: बातचीत के दौरान शिक्षक ने अपनी गलती का अहसास करते हुए खेद व्यक्त किया, वहीं अभिभावकों ने भी मामले को और आगे न खींचने की सहमति जताई। बीडीओ सुप्रभात मिश्रा ने इस संबंध में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया:
"नारायणपुर के मुस्लिम टोला मधुरापुर प्राथमिक विद्यालय के एक छात्र द्वारा शिक्षक पर मारपीट किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया गया। दोनों पक्षों—अभिभावक और शिक्षक—को कार्यालय में बुलाकर उनकी उपस्थिति में बातचीत कराई गई, जिसके बाद आपसी सहमति और सूझबूझ के साथ पूरे मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान कर लिया गया है।"
विद्यालयों में अनुशासन और बाल अधिकारों की बहस
इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के तौर-तरीकों और छात्रों के अधिकारों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है:
शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध: शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) और बाल अधिकार संरक्षण आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी स्कूल में बच्चों के साथ शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना (Corporal Punishment) नहीं की जा सकती। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है।
संवाद की कमी का असर: शिक्षाविदों का मानना है कि शिक्षकों और छात्रों के बीच संवादहीनता और गुस्से पर काबू न रख पाने के कारण ऐसी नौबत आती है। स्कूलों में सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे भयमुक्त होकर शिक्षा ग्रहण कर सकें।
नारायणपुर के मुस्लिम टोला मधुरापुर प्राथमिक विद्यालय में छात्र और शिक्षक के बीच उपजा यह विवाद भले ही बीडीओ सुप्रभात मिश्रा की सूझबूझ और मध्यस्थता से सुलझा लिया गया हो, लेकिन यह घटना शिक्षा प्रणाली से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ा सबक है। प्रशासनिक स्तर पर मामले का समाधान होना राहत की बात है, परंतु यह सुनिश्चित किया जाना भी उतना ही आवश्यक है कि भविष्य में शिक्षण संस्थानों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, ताकि नौनिहाल बिना किसी खौफ के अपना भविष्य संवार सकें।