सावन की दूसरी सोमवारी पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

नवगछिया/तिनटंगा (संवाद सूत्र): सावन मास की पवित्रता और शिव भक्ति के उल्लास के बीच, नवगछिया अनुमंडल के तिनटंगा करारी स्थित ऐतिहासिक जहाज घाट पर सोमवार को आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। सावन की दूसरी सोमवारी के पावन अवसर पर गंगा तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

भोर से ही शुरू हो गया था श्रद्धालुओं का आगमन

सावन की सोमवारी का महत्व हिंदू धर्म में विशेष माना जाता है, यही कारण है कि तिनटंगा करारी के जहाज घाट पर भोर के चार बजे से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था:

गंगा स्नान का महत्व: कांवरियों और आम शिव भक्तों का मानना है कि सावन की सोमवारी पर गंगा स्नान करने और उसके बाद पास के शिवालयों में जल चढ़ाने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी कष्टों का निवारण होता है।

घाटों पर रौनक: जहाज घाट पर बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे। गंगा जल भरकर कांवरियों ने अपनी यात्रा का शुभारंभ किया, जिससे पूरा घाट केसरिया रंग में रंगा हुआ नजर आया।

जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का क्रम

गंगा स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने पास के मंदिरों और स्थानीय शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित की:

श्रद्धा के साथ मांगी मन्नतें: श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में घंटों तक मंत्रोच्चार और शिव भजनों का क्रम चलता रहा।

सामुदायिक सहयोग: स्थानीय युवाओं और पूजा समितियों ने श्रद्धालुओं की सहायता के लिए बढ़-चढ़कर भाग लिया। घाट पर साफ-सफाई और जल अर्पण में किसी को परेशानी न हो, इसके लिए विशेष स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी।

प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

हजारों की संख्या में जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती होती है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली थी:

पुलिस बल की तैनाती: तिनटंगा करारी के जहाज घाट पर किसी भी अनहोनी या भगदड़ की स्थिति को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस बल और महिला सुरक्षाकर्मियों की पर्याप्त तैनाती की गई थी।

घाटों पर निगरानी: गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए घाटों पर बैरिकेडिंग की गई थी और गोताखोरों (Naviks) को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे। नावों के परिचालन पर भी विशेष निगरानी रखी गई ताकि श्रद्धालुओं को घाट पार करने में कोई कठिनाई न हो।

दंडाधिकारी की निगरानी: प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और दंडाधिकारियों ने लगातार क्षेत्र का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस और प्रशासन के तालमेल के कारण पूरा दिन शांतिपूर्ण ढंग से व्यतीत हुआ।

यातायात और व्यवस्था पर प्रशासन की पैनी नजर

भीड़ अधिक होने के कारण मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति न बने, इसके लिए विशेष प्रबंध थे:

रूट डायवर्जन: श्रद्धालुओं के पैदल चलने के मार्ग और वाहनों के आवागमन के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए गए थे। इससे स्थानीय निवासियों और यात्रियों को भी ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

पेयजल और स्वच्छता: घाट पर जिला प्रशासन द्वारा पेयजल और स्वच्छता के लिए विशेष डस्टबिन और शौचालय की अस्थायी व्यवस्था की गई थी, जिससे गंगा तट की स्वच्छता बनी रहे।

तिनटंगा करारी के जहाज घाट पर सावन की दूसरी सोमवारी के अवसर पर उमड़ा यह जनसैलाब न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करता है। प्रशासन द्वारा की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की मुस्तैदी ने श्रद्धालुओं के मनोबल को और बढ़ाया, जिससे वे बिना किसी भय के अपनी पूजा संपन्न कर सके। सावन का यह पावन पर्व क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सामाजिक सद्भाव का संदेश लेकर आया। यह दिन श्रद्धालुओं के लिए महादेव की भक्ति में लीन रहने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक अत्यंत सुखद और यादगार अनुभव बन गया।