जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत लायंस क्लब ऑफ भागलपुर रॉयल की अनूठी पहल; पर्यावरण संरक्षण को लेकर शहर में चलाया गया वृहद पौधरोपण सह जागरूकता अभियान

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी और दूरगामी 'जल-जीवन-हरियाली अभियान' को जन-जन तक पहुँचाने तथा पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से सिल्क सिटी भागलपुर में सामाजिक और मानवीय सरोकारों से जुड़ी अग्रणी संस्था लायंस क्लब ऑफ भागलपुर रॉयल (Lions Club of Bhagalpur Royal) द्वारा एक व्यापक पौधरोपण सह जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। शहर के विभिन्न पार्कों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के तहत न केवल सैकड़ों पौधे रोपे गए, बल्कि स्थानीय नागरिकों, युवाओं और स्कूली बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति शपथ भी दिलाई गई। इस अभियान ने शहर में हरियाली को बढ़ावा देने और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने की दिशा में एक मिसाल पेश की है।

अभियान का शुभारंभ और अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय एक प्रमुख सार्वजनिक उद्यान परिसर में मुख्य अतिथियों और लायंस क्लब के पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से पौधे में जलार्पण (Watering the plant) कर की गई।

क्लब के अध्यक्ष का संदेश: लायंस क्लब ऑफ भागलपुर रॉयल के अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक शहरीकरण और अंधाधुंध वनों की कटाई के कारण आज हमारा पर्यावरण गंभीर खतरे में है। यदि हमने आज पेड़ नहीं लगाए और जलस्रोतों का संरक्षण नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियों को विनाशकारी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 'जल-जीवन-हरियाली' सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह हम सबका नैतिक कर्तव्य है।

पर्यावरणविदों की सहभागिता: कार्यक्रम में शहर के कई प्रख्यात पर्यावरणविद, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने क्लब के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की और लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन के हर विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, वर्षगांठ आदि) पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी संतानों की तरह देखभाल करें।

छायादार और औषधीय पौधों का रोपण

इस विशेष अभियान के तहत भागलपुर के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 500 से अधिक पौधे रोपे गए, जिनकी प्रजातियों का चयन पर्यावरण की अनुकूलता को ध्यान में रखकर किया गया था:

विविध पौधों की प्रजातियां: अभियान के दौरान नीम, पीपल, बरगद, शीशम, अर्जुन, अमलतास और महोगनी जैसे विशाल छायादार और ऑक्सीजन उत्पादक पेड़ों के साथ-साथ आंवला, जामुन और अमरूद जैसे फलदार पौधे भी लगाए गए।

संरक्षण की पुख्ता व्यवस्था: केवल पौधे लगाना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि क्लब के सदस्यों ने यह भी सुनिश्चित किया कि रोपे गए प्रत्येक पौधे की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड (Tree Guards) लगाए जाएं और उनके नियमित रूप से पानी देने की जिम्मेदारी स्थानीय युवाओं और पार्क समितियों को सौंपी जाए, ताकि पौधों के जीवित रहने का प्रतिशत शत-प्रतिशत सुनिश्चित हो सके।

'जल-जीवन-हरियाली' का संदेश: जल संरक्षण पर विशेष बल

चूंकि यह अभियान बिहार सरकार के 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के तहत आयोजित किया गया था, इसलिए इसमें जल संरक्षण को लेकर भी विशेष जन-जागरूकता फैलाई गई:

भूजल स्तर में गिरावट पर चिंता: वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि भागलपुर सहित पूरे उत्तर बिहार में भूजल स्तर (Groundwater Level) लगातार नीचे गिर रहा है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा संकट है।

वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): लोगों को प्रेरित किया गया कि वे अपने घरों और कार्यालयों में वर्षा जल संचयन प्रणाली (Rainwater Harvesting System) अनिवार्य रूप से लगाएं। इसके साथ ही पुराने कुओं, तालाबों और आहर-पाइपलाइन के जीर्णोद्धार पर जोर दिया गया ताकि बारिश के पानी को बेकार बहने से रोका जा सके।

स्कूली बच्चों और युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी

इस वृक्षारोपण और जागरूकता अभियान में शहर के विभिन्न विद्यालयों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में हिस्सा लिया:

बच्चों ने हाथों में पर्यावरण बचाओ के तख्तियां और बैनर लेकर शहर में एक छोटी जागरूकता रैली भी निकाली।

स्कूली बच्चों के बीच पर्यावरण पर आधारित चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विजयी प्रतिभागियों को लायंस क्लब की ओर से पुरस्कृत किया गया। बच्चों के इस उत्साह ने यह साबित कर दिया कि युवा पीढ़ी पर्यावरण के प्रति अब कहीं अधिक संवेदनशील और जागरूक हो रही है।

लायंस क्लब ऑफ भागलपुर रॉयल द्वारा 'जल-जीवन-हरियाली अभियान' के तहत चलाया गया यह वृहद पौधरोपण और जन-जागरूकता अभियान भागलपुर के पर्यावरण को हरा-भरा और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। ऐसे सामाजिक आयोजनों से न केवल शहर की आबोहवा में सुधार होता है, बल्कि आम नागरिकों के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना भी जागृत होती है। क्लब ने संकल्प लिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले मानसून सत्र में हजारों और पौधे रोपे जाएंगे और उनकी देखभाल की जाएगी।