बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में गूंजी कहलगांव की आवाज; विधायक शुभानंद मुकेश ने जनसुरक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए, सरकार का ध्यान किया आकृष्ट

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: राज्य के नीति-निर्धारण और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए आहूत बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भागलपुर जिले के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब कहलगांव के लोकप्रिय विधायक शुभानंद मुकेश ने सदन के पटल पर अपने क्षेत्र की ज्वलनशील समस्याओं और विकास की मांगों को जोर-शोर से उठाया। विधायक ने जनसुरक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली की निर्बाध आपूर्ति और बुनियादी संरचना (Infrastructure) के सुदृढ़ीकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न सदन में रखे। उनके द्वारा उठाए गए इन मुद्दों से न केवल कहलगांव बल्कि पूरे भागलपुर जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने विधायक की इस मुखरता का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।

क्या थे मुख्य मुद्दे और सदन में क्या रखी गईं मांगें?

विधानसभा सत्र के दौरान विधायक शुभानंद मुकेश ने कहलगांव विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को आधार बनाते हुए सिलसिलेवार तरीके से कई अहम मांगें सरकार के समक्ष रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ जहाँ कहलगांव तेजी से औद्योगिक और शहरी विकास की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण और तटीय इलाकों में आज भी कई ऐसी बुनियादी समस्याएं हैं, जिनके समाधान के बिना आम जनजीवन को सुगम नहीं बनाया जा सकता।

श्रद्धालुओं और तटवर्ती नागरिकों की सुरक्षा: कहलगांव क्षेत्र गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है, जहाँ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इसके अलावा बाढ़ और जलस्तर बढ़ने के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना अति आवश्यक है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का अभाव आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसे दूर करने के लिए ठोस प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की गई।

ऊर्जा और सड़क नेटवर्क: बिजली की आंख-मिचौली और खराब सड़कों के जीर्णोद्धार को लेकर भी सदन का ध्यान आकृष्ट कराया गया।

गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ (SDRF) इकाई और मोटरबोट की मांग

विधायक शुभानंद मुकेश ने सदन में सबसे प्रमुख मांग कहलगांव के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर उठाई। उन्होंने सरकार को बताया कि कहलगांव का उत्तर वाहिनी गंगा तट और स्थानीय घाट धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र हैं, जहाँ कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति, और विभिन्न पर्व-त्योहारों के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते हैं।

स्थायी एसडीआरएफ कैंप: विधायक ने मांग की कि संभावित दुर्घटनाओं को रोकने और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कहलगांव में एक स्थायी एसडीआरएफ (State Disaster Response Force) इकाई की तैनाती की जाए।

आधुनिक मोटरबोट और गोताखोर: गंगा नदी के तेज बहाव और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के तहत आधुनिक मोटरबोट, लाइफ जैकेट और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की मांग प्रमुखता से रखी गई ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके।

स्वास्थ्य और बुनियादी संरचना पर जोर

क्षेत्र में चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करते हुए विधायक ने कहलगांव अनुमंडल अस्पताल और ग्रामीण स्वास्थ्य उप-केंद्रों में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की उपलब्धता और आधुनिक उपकरणों के सुदृढ़ीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गंभीर रोगियों को बेहतर इलाज के लिए अक्सर भागलपुर या पटना रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। अतः स्थानीय स्तर पर ही स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में सड़कों के जाल को मजबूत करने और सिंचाई की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए।

सदन में गूंजने के बाद प्रशासनिक महकमे में बढ़ी हलचल

विधायक शुभानंद मुकेश द्वारा विधानसभा के मानसून सत्र में इन तमाम गंभीर मुद्दों को उठाए जाने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। संबंधित विभागों के अधिकारी अब इन प्रस्तावों और मांगों के तकनीकी पहलुओं का आकलन करने में जुट गए हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का मानना है कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए जल्द ही धरातल पर काम शुरू करती है, तो कहलगांव क्षेत्र की तस्वीर काफी हद तक बदल जाएगी।

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में कहलगांव के विधायक शुभानंद मुकेश द्वारा उठाए गए ये जनहित के मुद्दे इस बात का प्रमाण हैं कि एक जनप्रतिनिधि अपनी जनता की अपेक्षाओं के प्रति कितना संवेदनशील है। जनसुरक्षा के लिए एसडीआरएफ और मोटरबोट की मांग तथा स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे से जुड़े इन विषयों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कहलगांव के विकास के लिए सदन के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर प्रयास तेज हो चुके हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या और कब तक व्यावहारिक कदम उठाती है।