पुलिस की पैनी नजर से बचने के लिए महिला और नाबालिगों को बनाया जा रहा है 'पेडलर', हालिया मामलों में कई गिरफ्तार और संरक्षित
भागलपुर, मुख्य संवाददाता: भागलपुर जिले में इन दिनों अपराध का एक बेहद चिंताजनक और खतरनाक चेहरा सामने आ रहा है। मादक पदार्थों (नशीले पदार्थों), अवैध शराब, गांजा और ब्राउन शुगर के धंधे में संलिप्त तस्करों व माफियाओं ने पुलिस की सख्त कार्रवाई से बचने के लिए एक नया और शातिर पैंतरा अपनाया है। अब ये गिरोह महिलाओं और कम उम्र के नाबालिग बच्चों को बतौर 'पेडलर' (कूरियर या वाहक) इस्तेमाल कर रहे हैं। चंद पैसों के लालच या बहकावे में आकर ये मासूम और महिलाएं कानून की नजरों से बचकर अवैध खेप एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का जरिया बन रहे हैं। हाल के दिनों में जिले के विभिन्न थानों की पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कई महिलाओं की गिरफ्तारी और नाबालिगों को संरक्षण में लिए जाने के बाद इस काले कारोबार की परतें खुलकर सामने आई हैं।
पुलिस से बचने के लिए अपनाई जा रही है 'मोडस आपरेंडी' (तरीका)
भागलपुर पुलिस के खुफिया और एंटी-नारकोटिक्स विंग की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि बड़े ड्रग्स तस्कर और शराब माफिया खुद पुलिस के रडार पर आने से डरते हैं। पुलिस की चौकसी और लगातार हो रही छापेमारी के कारण तस्करों ने अब ऐसे चेहरों को आगे करना शुरू कर दिया है जिन पर आम तौर पर पुलिस को शक नहीं होता।
इन माफियाओं द्वारा गरीब बस्तियों या सुदूर इलाकों के युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। उन्हें कुछ हजार रुपयों का प्रलोभन देकर या डर दिखाकर इस दलदल में धकेला जा रहा है। महिलाएं थैलों, झोलियों या कपड़ों के भीतर छिपाकर शराब और गांजा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाती हैं, वहीं नाबालिग बच्चे साइकिल या पैदल ही कम वजन के ड्रग्स (जैसे ब्राउन शुगर या प्रतिबंधित कफ सिरप) की पुड़िया तय ठिकानों तक पहुंचाते हैं।
हाल के दिनों में सामने आए प्रमुख मामले और गिरफ्तारियां
हाल ही में भागलपुर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई पुलिस कार्रवाई इस बात की गवाह है कि महिलाएं और नाबालिग किस तरह इस अवैध धंधे में धकेले जा रहे हैं:
लोहिया पुल और कोतवाली क्षेत्र: गत 19 जून को कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत लोहिया पुल के पास पुलिस ने झारखंड से आ रहे दो नाबालिगों को अपनी संरक्षण में लिया। ये दोनों नाबालिग एक ऑटो-टेम्पो के जरिए भारी मात्रा में (करीब 58 बोतल) विदेशी शराब झारखंड से भागलपुर लेकर आ रहे थे। शातिर तस्करों ने सोच-समझकर बच्चों को इस काम में झोंका था ताकि पुलिस चेकिंग के दौरान उन पर शक न हो।
तातारपुर और हबीबपुर कनेक्शन: गत 16 जुलाई को तातारपुर पुलिस ने हबीबपुर थाना क्षेत्र के पंखा टोली निवासी मो. छोटू को गिरफ्तार किया था, जिसके साथ एक नाबालिग को भी संरक्षण में लिया गया था। उनके पास से हथियार और मोबाइल के साथ-साथ अवैध कारोबार से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे थे, जिसमें नाबालिगों के इस्तेमाल की बात पुष्ट हुई।
रेलवे स्टेशनों पर महिलाओं की संलिप्तता (गांजा और शराब तस्करी): जीआरपी (GRP) की टीम द्वारा भागलपुर रेलवे स्टेशन पर चलाए गए अभियानों में भी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गत 17 मार्च को रेलवे स्टेशन से दो महिलाओं (अनिता और सुगनी, निवासी छोटी परबत्ता, नवगछिया) को 6 किलोग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में खुलासा हुआ था कि वे विक्रमशिला एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए इस गांजा की बड़ी खेप को दिल्ली भेजने की फिराक में थीं, जिसका सीधा कनेक्शन अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ा था। इसी तरह मई और अप्रैल के महीनों में भी बबरगंज, मोजाहिदपुर और रेलवे स्टेशन परिसरों से पुतुल देवी, कांती देवी समेत कई अन्य महिलाओं को भारी मात्रा में देशी व विदेशी शराब के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।
मासूमों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और सामाजिक चिंता
अपराध जगत के इन शातिर सौदागरों द्वारा महिलाओं और बच्चों का इस तरह इस्तेमाल किया जाना समाज के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है।शोषण के इस चक्रव्यूह में फंसकर कम उम्र के बच्चे अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। एक बार जब वे इस अवैध धंधे का हिस्सा बन जाते हैं, तो जुर्म की दुनिया से उनका निकलना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, जिन परिवारों की महिलाएं इस प्रकार की तस्करी में पकड़ी जाती हैं, वे सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तबाह हो जाते हैं।
प्रशासनिक सख्ती और पुलिस की आगे की रणनीति
इस बढ़ते ट्रेंड को देखकर भागलपुर के पुलिस प्रशासन ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशानुसार अब थानों की पुलिस केवल मुख्य तस्करों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस सिंडिकेट के हर उस मोहरे पर नजर रखी जा रही है जो पर्दे के पीछे से महिलाओं और बच्चों का इस्तेमाल कर रहा है।
काउंसलिंग और जागरूकता: पुलिस और सामाजिक संगठनों द्वारा यह प्रयास किया जा रहा है कि सुदूर और संवेदनशील बस्तियों में जाकर युवाओं व महिलाओं को जागरूक किया जाए ताकि वे किसी के बहकावे में आकर अपनी जिंदगी बर्बाद न करें।
सख्त कानूनी कार्रवाई: किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) और एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत ऐसे मामलों में संलिप्त मुख्य सरगनाओं को बेनकाब करने के लिए पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।
नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में महिलाओं और नाबालिगों का पेडलर के रूप में इस्तेमाल होना यह दर्शाता है कि अपराधी कितने गिर चुके हैं। भागलपुर में हाल के दिनों में हुई कार्यवाहियों ने इस बात को उजागर कर दिया है कि यदि समय रहते समाज और प्रशासन ने मिलकर इस नेक्सस (Nexus) को नहीं तोड़ा, तो यह अपराध युवा पीढ़ी के भविष्य को पूरी तरह लील जाएगा। इस दिशा में पुलिस की मुस्तैदी और समाज की जागरूकता ही इस नासूर पर लगाम कस सकती है।