पवित्र सावन मास में भगवान भोलेनाथ की आराधना का दौर चरम पर; बेलपत्र और सुगंधित फूलों की भारी मांग, मंदिरों के बाहर सजी सनातनी दुकानों पर उमड़ रही है शिव भक्तों की भीड़

भागलपुर, विशेष संवाददाता: देवों के देव महादेव को अतिप्रिय पवित्र सावन (श्रावण) मास के शुरू होते ही संपूर्ण सिल्क सिटी भागलपुर और इसके आसपास का पूरा क्षेत्र 'हर हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंज उठा है। इस पावन महीने में देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु नाना प्रकार के अनुष्ठान और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इस धार्मिक माहौल के बीच भगवान शिव के अभिषेक और पूजन में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले बेलपत्र (बिलपत्र) और विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूलों की मांग बाजार में अचानक आसमान छूने लगी है। शहर के प्रसिद्ध बूढ़ानाथ मंदिर, भूतनाथ मंदिर, भगवान आग्नेयेश्वर नाथ मंदिर और अन्य शिवालयों के बाहर फूलों और बेलपत्रों की सजी सजी-धजी दुकानें इस पूरे मास के धार्मिक उत्सव और अर्थव्यवस्था को एक नया रंग दे रही हैं।

सावन में क्यों बढ़ जाती है बेलपत्र और फूलों की मांग?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, श्रावण मास भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान विष पान करने से भगवान शिव के शरीर में जो तीव्र उष्णता (गर्मी) उत्पन्न हुई थी, उसे शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन्हें ठंडी तासीर वाली वस्तुएं अर्पित की थीं।

बेलपत्र की महिमा: स्कंद पुराण और शिवपुराण में स्पष्ट रूप से उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव को तीन दलों वाला (त्रिपद) अखंड बेलपत्र अर्पित करने मात्र से वे अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं। बेलपत्र न केवल भगवान शिव को शीतलता प्रदान करता है, बल्कि यह त्रिगुणात्मक चेतना और मनुष्य के तीन पापों (कायिक, वाचिक, मानसिक) के नाश का प्रतीक भी है।

पुष्पों का महत्व: भोलेनाथ को धतूरा, आक (मदार) के फूल, गेंदा, गुलाब, और कनेर के फूल विशेष रूप से प्रिय हैं। सावन के दिनों में इन प्राकृतिक और सुगंधित पुष्पों से शिव का शृंगार करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिसके कारण बाजार में इनकी जबरदस्त डिमांड बनी रहती है।

मंदिरों के बाहर सजी दुकानें: महिलाओं और छोटे व्यापारियों के लिए रोजगार का बड़ा अवसर

सावन के सोमवार और विशेष तिथियों पर भागलपुर के प्रमुख शिवालयों के बाहर का नजारा देखते ही बनता है। मंदिरों के रास्तों और मुख्य द्वारों पर सजी दुकानें इस मौसम में विशेष रौनक बिखेरती हैं:

रंग-बिरंगे फूलों और पत्तों का आकर्षण: दुकानों पर गेंदे की माला, धतूरे के फल, मदार के फूल, कमल के फूल, बेलपत्र की सजी हुई गड्डियां और पूजन सामग्री (भांग, धतूरा, अक्षत, रोली, चंदन और कच्चा दूध) करीने से सजाई जाती हैं।

स्थानीय छोटे दुकानदारों की आय: शहर और ग्रामीण इलाकों से आने वाले छोटे फूल विक्रेता, किसान और महिलाएं सावन के इस महीने में अपने खेतों या बाग-बगीचों से तोड़कर लाए गए ताजे बेलपत्र और फूल बेचकर अच्छी खासी आमदनी अर्जित करती हैं। विक्रेताओं का कहना है कि सालभर वे अन्य छोटे-मोटे काम करते हैं, लेकिन सावन के इन चार हफ्तों में फूलों की बिक्री से उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिलता है।

बढ़ती मांग और महंगाई का असर: ताजे पत्तों और फूलों के दाम में उछाल

मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) के इस खेल में सावन के दौरान बेलपत्र और फूलों के दामों में भी तेजी देखी जा रही है:

बेलपत्र की कीमत: जो बेलपत्र सामान्य दिनों में आसानी से या बहुत कम कीमत पर मिल जाते हैं, वे सावन के हर सोमवार को अपनी शुद्धता और आकार के आधार पर अच्छी कीमतों पर बिकते हैं। बिना कटे-फटे, तीन पत्तियों वाले अखंड बेलपत्र की मांग सबसे अधिक होती है।

फूलों के दाम: सावन के पहले और दूसरे सोमवार पर फूलों की मालाओं और मिश्रित पूजन सामग्री के पैकेटों की कीमतें बढ़ जाती हैं, इसके बावजूद शिव भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आती। भक्त बिना किसी मोल-भाव के महादेव को अर्पित करने के लिए सर्वोत्तम फूल और बेलपत्र खरीदते हैं।

पर्यावरण और प्राकृतिक संरक्षण का संदेश

इस पूरी परंपरा का एक सकारात्मक पहलू पर्यावरण और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। सावन के महीने में बेलपत्र और फूलों की मांग बढ़ने से लोग अपने घरों के आसपास, उद्यानों और मंदिरों के प्रांगण में बेल के पेड़ (Aegle marmelos) लगाने और फूलों के पौधे संरक्षित करने के प्रति भी जागरूक हो रहे हैं। वक्ताओं और पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि बेल के पेड़ों का संरक्षण इसी तरह धार्मिक आस्था के साथ जोड़ा जाए, तो इससे औषधीय गुणों से भरपूर इस पौधे का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।

भागलपुर के मंदिरों के बाहर सजी बेलपत्र और फूलों की दुकानें केवल व्यापार का केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह भारत की सनातन संस्कृति, अटूट श्रद्धा और प्रकृति के प्रति समर्पण का जीवंत प्रतीक हैं। सावन की इस पावन बयार में जब एक आम भक्त श्रद्धापूर्वक भगवान शिव को एक अदद बेलपत्र और मदार का फूल अर्पित करता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह मांग और बाजार की यह रौनक इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता की दौड़ के बीच भी हमारी प्राचीन परंपराएं पूरी ऊर्जा और जीवंतता के साथ आज भी समाज में रची-बची हुई हैं।