पिछले वर्ष सामने आए थे 9 मामले, ताजा घटना के बाद फिर उठे सुरक्षा पर सवाल; कचरा और जलजमाव को लेकर चिंता

पटना। जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान संचालन की सुरक्षा से जुड़ी एक बार फिर महत्वपूर्ण चिंता सामने आई है। एयरपोर्ट पर पिछले वर्ष बर्ड हिट के नौ मामले सामने आने के बाद अब ताजा घटना ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। विमानों और पक्षियों के बीच टकराव की घटनाएं विमान परिचालन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। यही कारण है कि एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित एजेंसियां लंबे समय से एयरफील्ड के आसपास पक्षियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने और ऐसे कारणों को दूर करने पर जोर देती रही हैं, जिनसे पक्षी एयरपोर्ट क्षेत्र के आसपास आकर्षित होते हैं।

इसी वर्ष अप्रैल में विमान परिचालन को और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयरफील्ड एनवायरमेंट मैनेजमेंट कमेटी (एईएमसी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में एयरपोर्ट के आसपास स्वच्छता बनाए रखने, खुले में कचरा फेंकने पर रोक लगाने, जलजमाव की स्थिति खत्म करने और नियमित निगरानी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया था।

बैठक में यह भी चर्चा हुई थी कि एयरफील्ड के आसपास गंदगी, खुले कचरे, जलजमाव और मांस-मछली की दुकानों जैसी गतिविधियां पक्षियों को आकर्षित कर सकती हैं। ऐसे स्थानों पर भोजन और पानी की उपलब्धता पक्षियों को वहां आने के लिए प्रेरित करती है। यदि पक्षियों की संख्या एयरपोर्ट के आसपास बढ़ती है तो विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट का खतरा भी बढ़ जाता है।

पिछले वर्ष सामने आए थे बर्ड हिट के नौ मामले

पटना एयरपोर्ट पर पिछले वर्ष बर्ड हिट के नौ मामले सामने आने की जानकारी ने विमान सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई थी। अब ताजा घटना के बाद एक बार फिर एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी और उन्हें आकर्षित करने वाले कारणों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

बर्ड हिट उस स्थिति को कहा जाता है जब उड़ान के दौरान कोई पक्षी विमान से टकरा जाता है। यह घटना आमतौर पर टेकऑफ या लैंडिंग के दौरान अधिक चिंता का विषय होती है, क्योंकि उस समय विमान जमीन के अपेक्षाकृत करीब होता है और उसकी गति भी काफी अधिक रहती है।

पक्षी के विमान के इंजन, विंडशील्ड या अन्य महत्वपूर्ण हिस्से से टकराने पर तकनीकी समस्या उत्पन्न हो सकती है। गंभीर स्थिति में यह विमान और उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

ताजा घटना के बाद फिर बढ़ी चिंता

पटना एयरपोर्ट पर हुई ताजा घटना के बाद बर्ड हिट का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पक्षियों की गतिविधि को सामान्य समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार, विमान संचालन के दौरान पक्षियों से टकराव की संभावना को कम करने के लिए एयरपोर्ट के आसपास के पूरे क्षेत्र पर नजर रखना आवश्यक है। केवल रनवे की निगरानी पर्याप्त नहीं होती। रनवे और उसके आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों को आकर्षित करने वाले कारणों की पहचान करना और उन्हें हटाना भी जरूरी है।

इसी वजह से एईएमसी की बैठक में एयरफील्ड के आसपास के पर्यावरण और स्वच्छता व्यवस्था पर जोर दिया गया था।

अप्रैल में हुई थी एईएमसी की महत्वपूर्ण बैठक

इसी वर्ष अप्रैल में जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयरफील्ड एनवायरमेंट मैनेजमेंट कमेटी की बैठक हुई थी। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट क्षेत्र में विमान परिचालन को और सुरक्षित बनाने के लिए पर्यावरणीय और स्थानीय परिस्थितियों की समीक्षा करना था।

बैठक में एयरपोर्ट के आसपास मौजूद ऐसे स्थानों की पहचान और निगरानी पर जोर दिया गया, जहां पक्षियों को भोजन या पानी आसानी से मिल सकता है।

समिति ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि एयरफील्ड के आसपास सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। खुले में पड़ा कचरा पक्षियों के लिए भोजन का स्रोत बन सकता है। इसी तरह जलजमाव के कारण पानी और अन्य जैविक सामग्री उपलब्ध होने से भी पक्षियों की संख्या बढ़ सकती है।

खुले कचरे से बढ़ता है खतरा

एयरपोर्ट के आसपास खुले में कचरा पड़ा होना विमान सुरक्षा के लिहाज से गंभीर समस्या बन सकता है। भोजन के अवशेष और जैविक कचरे की वजह से पक्षी और अन्य जीव उस क्षेत्र में आकर्षित हो सकते हैं।

यदि एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की संख्या बढ़ती है तो रनवे के आसपास उनकी गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। टेकऑफ और लैंडिंग के समय पक्षियों के झुंड का अचानक सामने आना विमान के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

इसलिए एयरफील्ड एनवायरमेंट मैनेजमेंट के तहत कचरे का उचित निस्तारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

जलजमाव भी बन सकता है कारण

बैठक में जलजमाव को भी पक्षियों को आकर्षित करने वाली परिस्थितियों में शामिल किया गया था। बारिश के बाद एयरपोर्ट के आसपास यदि लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो वहां पक्षियों के लिए भोजन और पानी उपलब्ध हो सकता है।

जलजमाव से कीड़े-मकौड़ों और अन्य छोटे जीवों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे पक्षियों को आसानी से भोजन मिलता है।

इसलिए एयरपोर्ट के आसपास जल निकासी की बेहतर व्यवस्था और नियमित निरीक्षण जरूरी है। किसी भी स्थान पर पानी जमा होने की स्थिति में उसे जल्द हटाने की आवश्यकता होती है।

मांस-मछली की दुकानों पर भी नजर जरूरी

एईएमसी की बैठक में एयरपोर्ट के आसपास मांस और मछली की दुकानों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। ऐसी दुकानों से निकलने वाला कचरा यदि खुले में छोड़ दिया जाए तो पक्षियों को आकर्षित कर सकता है।

मांस-मछली के अवशेष पक्षियों के लिए आसानी से उपलब्ध भोजन का स्रोत बन सकते हैं। इसके कारण पक्षियों की आवाजाही एयरपोर्ट के आसपास बढ़ने की संभावना रहती है।

इसलिए एयरपोर्ट के आसपास संचालित ऐसी दुकानों से निकलने वाले कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

नियमित निगरानी पर जोर

एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना आवश्यक है। इसके लिए नियमित निगरानी और संवेदनशील स्थानों की पहचान की जरूरत होती है।

यदि किसी क्षेत्र में लगातार पक्षियों की संख्या बढ़ रही है तो उसके पीछे के कारणों का पता लगाना जरूरी है। वहां कचरा, पानी, भोजन या अन्य आकर्षक तत्व मौजूद हैं तो उन्हें हटाया जाना चाहिए।

निगरानी व्यवस्था केवल किसी घटना के बाद सक्रिय होने के बजाय नियमित रूप से जारी रहनी चाहिए।

एयरपोर्ट सुरक्षा में कई एजेंसियों की भूमिका

विमान सुरक्षा केवल एयरपोर्ट प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होती। एयरफील्ड के आसपास का पर्यावरण भी कई स्थानीय एजेंसियों से जुड़ा होता है।

नगर निकाय, स्थानीय प्रशासन, सफाई एजेंसियां और अन्य संबंधित विभागों को मिलकर काम करना पड़ता है। यदि एयरपोर्ट के आसपास कोई अवैध डंपिंग, जलजमाव या खुले में खाद्य कचरा जमा है तो उसे हटाने के लिए संबंधित एजेंसी को कार्रवाई करनी होती है।

एईएमसी जैसी समितियों का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना भी है।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

विमान में सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार के संभावित खतरे को कम करना एयरपोर्ट प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

बर्ड हिट की घटनाएं भले ही हर बार गंभीर दुर्घटना में तब्दील न हों, लेकिन इनके जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक छोटी सी घटना भी विमान के इंजन या अन्य महत्वपूर्ण हिस्से को प्रभावित कर सकती है।

यही कारण है कि एयरपोर्ट पर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान पक्षियों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती है।

जागरूकता और स्थानीय सहयोग भी जरूरी

एयरपोर्ट के आसपास रहने वाले लोगों और कारोबारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यदि लोग खुले में कचरा फेंकने या खाद्य अवशेष छोड़ने से बचें तो पक्षियों को आकर्षित करने वाले स्रोत कम किए जा सकते हैं।

स्थानीय दुकानदारों को भी कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था अपनानी चाहिए। मांस-मछली की दुकानों से निकलने वाले अपशिष्ट को खुले में फेंकने से बचना जरूरी है।

इसके अलावा जलजमाव की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग को तत्काल जानकारी देना भी उपयोगी हो सकता है।

बर्ड हिट रोकने के लिए समन्वित रणनीति जरूरी

पटना एयरपोर्ट पर बर्ड हिट की घटनाओं को कम करने के लिए केवल पक्षियों को हटाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ उन कारणों को खत्म करना भी जरूरी है, जिनकी वजह से पक्षी एयरपोर्ट के आसपास आते हैं।

खुले कचरे का निस्तारण, जलजमाव रोकना, खाद्य अपशिष्ट का सुरक्षित प्रबंधन, संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित सफाई और निगरानी जैसी व्यवस्थाएं एक साथ लागू करनी होंगी।

यदि सभी संबंधित विभाग मिलकर काम करें तो पक्षियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

आगे भी निगरानी जरूरी

पिछले वर्ष सामने आए नौ बर्ड हिट मामलों और ताजा घटना के बाद पटना एयरपोर्ट पर इस मुद्दे को गंभीरता से देखना जरूरी हो गया है। अप्रैल में हुई एईएमसी की बैठक में जिन बिंदुओं पर जोर दिया गया था, उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

एयरपोर्ट के आसपास स्वच्छता बनाए रखना, खुले कचरे को हटाना, जलजमाव रोकना और मांस-मछली की दुकानों से निकलने वाले कचरे का उचित प्रबंधन करना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आखिरकार, विमान परिचालन में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। पटना एयरपोर्ट से रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। ऐसे में बर्ड हिट जैसी घटनाओं के जोखिम को न्यूनतम करने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन, स्थानीय निकाय और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।