आठ माह में तैयार होगा अर्बन रिवर मैनेजमेंट मास्टर प्लान, नाथनगर में बनेगा सिल्क हाट गंगा और चंपा नदी के संरक्षण के साथ ईको-पार्क, सीवरेज प्रबंधन और रिवरफ्रंट विकास की तैयारी

भागलपुर:  भागलपुर की नदियों, जलस्रोतों और शहरी पर्यावरण के संरक्षण के लिए अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान (यूआरएमपी) पर काम तेज कर दिया गया है। इस योजना के तहत आठ माह के भीतर विस्तृत सर्वेक्षण के आधार पर एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस मास्टर प्लान में शहर से दूर चली गई गंगा नदी की पुरानी धारा को पुनर्जीवित करने, ऐतिहासिक चंपा नदी का संरक्षण और पुनरुद्धार करने तथा नदी किनारे के क्षेत्रों को पर्यावरण और जनहित के अनुरूप विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

मंगलवार को भागलपुर स्मार्ट सिटी भवन स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान की दूसरी समीक्षा बैठक हुई। बैठक में संबंधित विभागों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ नदी प्रबंधन, जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। तकनीकी टीम को निर्देश दिया गया कि आठ माह के भीतर आवश्यक सर्वेक्षण और अध्ययन पूरा कर विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाए।

नाथनगर में सिल्क हाट का प्रस्ताव

योजना के महत्वपूर्ण प्रस्तावों में नाथनगर में सिल्क हाट का निर्माण भी शामिल है। भागलपुर देश-विदेश में अपनी रेशम और बुनकरी परंपरा के लिए जाना जाता है। ऐसे में सिल्क हाट के माध्यम से स्थानीय रेशम उत्पादों, बुनकरों और व्यापारियों को एक संगठित मंच मिलने की उम्मीद है। यह केंद्र स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के साथ रेशम उद्योग को नई पहचान देने में भी मददगार हो सकता है।

चंपा नदी का होगा पुनरुद्धार

अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान में ऐतिहासिक चंपा नदी की सफाई और पुनरुद्धार पर विशेष जोर दिया गया है। नदी के किनारों को विकसित कर ईको-पार्क बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा गंगा नदी और अन्य जल निकायों के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जा रही है।

योजना का उद्देश्य केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जल प्रवाह, प्रदूषण नियंत्रण, बाढ़ प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन को एक साथ जोड़कर शहरी विकास की रणनीति तैयार करना है। गंगा के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर जल गुणवत्ता की जांच की भी योजना है।

गंगा में गिरने वाले गंदे पानी पर रोक की तैयारी

समीक्षा के दौरान शहर के नालों और औद्योगिक इकाइयों से गंगा में गिरने वाले गंदे पानी का मुद्दा भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में 43 नालों और 12 उद्योगों का गंदा पानी गंगा में पहुंच रहा है। इसे रोकने के लिए वर्ष 2041 की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की आवश्यकता पर विचार किया गया है। बरारी बियाडा क्षेत्र के लिए अलग ट्रीटमेंट प्लांट और सेप्टेज प्रबंधन को मजबूत करने की योजना भी प्रस्तावित है।

ईको-टूरिज्म और मरीन ड्राइव की भी योजना

अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान में भागलपुर को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के प्रस्ताव भी शामिल हैं। विक्रमशिला क्षेत्र को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप विकसित करने, गांगेय डॉल्फिन संरक्षण तथा नदी किनारे ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है।

इसके साथ ही मरीन ड्राइव को बरारी, बाबूपुर, मुसहरी घाट और भूतनाथ मंदिर रोड से जोड़ने की रूपरेखा पर भी विचार किया गया है। बाढ़ से बचाव के लिए प्राकृतिक अवरोध और हरित संरचनाओं को विकसित करने की योजना का प्रस्ताव भी रखा गया है।

दीर्घकालिक विकास पर होगा जोर

अधिकारियों के अनुसार, यह योजना आने वाले 50 से 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। मास्टर प्लान बनने के बाद नदियों और जलस्रोतों के संरक्षण के साथ शहरी विकास, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यटन और बाढ़ प्रबंधन के लिए एक समन्वित कार्ययोजना तैयार हो सकेगी।