भागलपुर में 48 हजार से अधिक विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के डेटाबेस से गायब, 7.67 प्रतिशत बच्चों का डेटा नहीं
भागलपुर। जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार भागलपुर जिले के स्कूलों में कुल 6,32,116 विद्यार्थी नामांकित हैं। इनमें से 5,85,147 विद्यार्थियों का आधार कार्ड रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध है, जबकि 48,499 विद्यार्थियों की आधार संबंधी जानकारी विभागीय डेटाबेस में दर्ज नहीं है।
कुल नामांकन की तुलना में यह संख्या करीब 7.67 प्रतिशत बैठती है। आधार रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पहचान सत्यापन, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से अपडेट रखने जैसी प्रक्रियाओं में विभाग को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
यह स्थिति केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है। राज्य स्तर पर भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध नहीं है। बिहार के सरकारी और निजी स्कूलों में कुल करीब 1.84 करोड़ विद्यार्थी नामांकित हैं। इनमें लगभग 38 लाख विद्यार्थियों के आधार कार्ड की जानकारी विभागीय डेटाबेस में उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।
भागलपुर में कुल 6.32 लाख विद्यार्थी नामांकित
शिक्षा विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भागलपुर जिले में सरकारी और निजी स्कूलों को मिलाकर कुल 6,32,116 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है।
इनमें 5,85,147 विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध है। वहीं 48,499 बच्चों का आधार डेटा अभी विभागीय रिकॉर्ड में नहीं है।
आंकड़ों से स्पष्ट है कि अधिकांश विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास मौजूद है, लेकिन हजारों बच्चों का डेटा अभी भी सिस्टम से जुड़ना बाकी है। विभाग के लिए अब इन विद्यार्थियों के आधार रिकॉर्ड को अपडेट करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि सभी छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध हो सके।
करीब 7.67 प्रतिशत विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड नहीं
भागलपुर जिले के कुल नामांकन के आधार पर करीब 7.67 प्रतिशत विद्यार्थियों के आधार की जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
डिजिटल शिक्षा व्यवस्था में आधार रिकॉर्ड का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विद्यार्थियों की पहचान, स्कूल रिकॉर्ड के सत्यापन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान में आधार से जुड़े डेटा का उपयोग किया जाता है।
ऐसे में जिन बच्चों का आधार रिकॉर्ड डेटाबेस में उपलब्ध नहीं है, उनके रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए स्कूल स्तर पर विशेष प्रयास की जरूरत हो सकती है।
सरकारी और निजी दोनों स्कूलों का डेटा शामिल
भागलपुर के आंकड़ों में सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में नामांकित विद्यार्थी शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि आधार रिकॉर्ड अपडेट करने की चुनौती केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है।
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को भी शिक्षा विभाग के डिजिटल डेटाबेस से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
स्कूलों को विद्यार्थियों के आधार संबंधी विवरण की जांच करने और जहां रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राज्य में करीब 38 लाख बच्चों का आधार डेटा उपलब्ध नहीं
बिहार की स्थिति देखें तो यह आंकड़ा और बड़ा है। राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में कुल करीब 1.84 करोड़ विद्यार्थी नामांकित हैं।
इनमें करीब 38 लाख बच्चों के आधार कार्ड की जानकारी शिक्षा विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। इसका अर्थ है कि राज्य स्तर पर भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को डिजिटल प्रणाली में पूर्ण करने की जरूरत है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य के सरकारी स्कूलों में 1,47,53,759 विद्यार्थी, जबकि निजी स्कूलों में 32,93,421 विद्यार्थी नामांकित हैं।
करीब 1.45 करोड़ विद्यार्थियों का सत्यापित आधार रिकॉर्ड
राज्य स्तर पर करीब 1.45 करोड़ विद्यार्थियों का सत्यापित आधार रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध है। यह बताता है कि बड़ी संख्या में बच्चों के आधार रिकॉर्ड पहले ही डिजिटल सिस्टम में दर्ज और सत्यापित किए जा चुके हैं।
फिर भी शेष विद्यार्थियों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग के सामने डेटाबेस को पूर्ण करने की चुनौती बनी हुई है।
शिक्षा विभाग के लिए यह जरूरी होगा कि जिन विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, उनके लिए स्कूलवार और प्रखंडवार सूची तैयार कर डेटा अपडेट की प्रक्रिया तेज की जाए।
आधार रिकॉर्ड का सत्यापन क्यों जरूरी
शिक्षा विभाग के डिजिटल डेटाबेस में विद्यार्थियों की सही पहचान दर्ज होना कई कारणों से महत्वपूर्ण है। इससे एक ही विद्यार्थी के नाम पर अलग-अलग स्कूलों में दोहरा नामांकन जैसी संभावित गड़बड़ियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
साथ ही सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में भी डिजिटल सत्यापन उपयोगी हो सकता है।
हालांकि आधार से जुड़े किसी भी रिकॉर्ड के इस्तेमाल में लागू गोपनीयता और डेटा सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है।
छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं में उपयोगी
बिहार में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति, पोशाक, साइकिल, प्रोत्साहन और अन्य कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं के लाभार्थियों का सही रिकॉर्ड तैयार करने में डिजिटल डेटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि किसी विद्यार्थी का आधार रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या उसका विवरण गलत दर्ज है, तो सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसलिए शिक्षा विभाग के डेटाबेस में विद्यार्थियों का सही और अद्यतन रिकॉर्ड रखना आवश्यक माना जा रहा है।
स्कूलों की भूमिका अहम
आधार रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया में स्कूलों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है। स्कूलों के पास विद्यार्थियों के नामांकन से संबंधित मूल जानकारी मौजूद होती है।
स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों और अभिभावकों से आवश्यक दस्तावेज लेकर विभागीय पोर्टल पर जानकारी अपडेट कराने में मदद कर सकता है।
इसके लिए स्कूल स्तर पर ऐसे विद्यार्थियों की सूची तैयार की जा सकती है जिनका आधार रिकॉर्ड विभागीय डेटाबेस में उपलब्ध नहीं है।
अभिभावकों को भी करना होगा सहयोग
आधार रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए अभिभावकों का सहयोग भी जरूरी होगा। कई बार नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरण में अंतर होने के कारण डिजिटल सत्यापन में समस्या आती है।
अभिभावकों को चाहिए कि वे स्कूल में जमा किए गए विद्यार्थियों के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी की जांच करें और किसी गलती की स्थिति में उसे समय रहते ठीक कराएं।
सही जानकारी उपलब्ध होने पर शिक्षा विभाग के डेटाबेस को अधिक सटीक बनाया जा सकता है।
डेटा की शुद्धता भी महत्वपूर्ण
सिर्फ आधार नंबर उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है। शिक्षा विभाग के डेटाबेस में विद्यार्थी का नाम, जन्मतिथि, स्कूल, कक्षा और अन्य संबंधित विवरण भी सही होना चाहिए।
यदि आधार रिकॉर्ड और स्कूल रिकॉर्ड में अंतर है तो सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए डेटा अपडेट करते समय केवल संख्या बढ़ाने के बजाय रिकॉर्ड की गुणवत्ता और शुद्धता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
शिक्षा विभाग पिछले कुछ वर्षों में स्कूलों और विद्यार्थियों से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने पर जोर दे रहा है। नामांकन, उपस्थिति, परीक्षा, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक जानकारी को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
ऐसे में विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड भी डिजिटल डेटाबेस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यदि सभी विद्यार्थियों का सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाए तो विभाग के पास राज्य की छात्र आबादी का अधिक व्यवस्थित डिजिटल डेटा तैयार हो सकेगा।
दोहरे नामांकन पर निगरानी में मदद
डिजिटल पहचान से विद्यार्थियों के दोहरे नामांकन की पहचान करने में भी सहायता मिल सकती है। यदि एक ही विद्यार्थी का रिकॉर्ड अलग-अलग स्कूलों में दर्ज है, तो डिजिटल प्रणाली के माध्यम से ऐसे मामलों की पहचान की संभावना बढ़ सकती है।
इससे नामांकन से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि ऐसे मामलों की जांच और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित स्कूल और परिवार से उचित सत्यापन जरूरी होगा।
भागलपुर में विशेष अभियान की जरूरत
भागलपुर में 48,499 विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के आंकड़े को देखते हुए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता हो सकती है।
शिक्षा विभाग स्कूलवार सूची तैयार कर सकता है और प्रधानाध्यापकों एवं स्कूल प्रबंधनों को लंबित रिकॉर्ड अपडेट करने का लक्ष्य दे सकता है।
प्रखंड और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा से यह पता लगाया जा सकता है कि कितने विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड अपडेट हुआ और कितने मामले अभी लंबित हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान
ग्रामीण क्षेत्रों में आधार से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर अभिभावकों को कभी-कभी परेशानी हो सकती है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, दस्तावेजों में त्रुटि और जानकारी के अभाव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
ऐसे क्षेत्रों में स्कूलों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं। अभिभावकों को बताया जा सकता है कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को सही रखने के लिए आवश्यक दस्तावेज और विवरण कैसे उपलब्ध कराए जाएं।
डेटा सुरक्षा का भी ध्यान जरूरी
विद्यार्थियों के आधार जैसे संवेदनशील पहचान संबंधी डेटा के साथ डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा। स्कूलों और शिक्षा विभाग को लागू नियमों के अनुसार ही इस तरह की जानकारी को संग्रहित और इस्तेमाल करना चाहिए।
डेटा का अनधिकृत इस्तेमाल या सार्वजनिक रूप से साझा किया जाना विद्यार्थियों की गोपनीयता के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए आधार रिकॉर्ड अपडेट करने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना भी जरूरी है।
आगे की राह
भागलपुर में 48 हजार से अधिक विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना शिक्षा विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती है। राज्य स्तर पर करीब 38 लाख बच्चों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से यह स्पष्ट है कि समस्या व्यापक है।
विभाग यदि स्कूलवार डेटा की समीक्षा कर लंबित रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए समयबद्ध अभियान चलाता है, तो डिजिटल छात्र डेटाबेस को अधिक पूर्ण और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।
भागलपुर जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में नामांकित 6,32,116 विद्यार्थियों में से 5,85,147 विद्यार्थियों का आधार रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध है, जबकि 48,499 विद्यार्थियों का आधार डेटा अभी दर्ज नहीं है। यह कुल नामांकन का करीब 7.67 प्रतिशत है।
राज्य स्तर पर भी करीब 1.84 करोड़ विद्यार्थियों में से लगभग 38 लाख बच्चों के आधार रिकॉर्ड की जानकारी विभागीय डेटाबेस में उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं करीब 1.45 करोड़ विद्यार्थियों का सत्यापित आधार रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध है।
अब जरूरत इस बात की है कि लंबित रिकॉर्ड को स्कूल और प्रखंड स्तर पर अभियान चलाकर अपडेट किया जाए। साथ ही डेटा की शुद्धता, विद्यार्थियों की गोपनीयता और आधार से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। इससे बिहार की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।