बोलबम के जयकारों के बीच सुरक्षा के अभेद किले में बदला शहर; घुड़सवार दस्ते की गश्त और अनधिकृत पार्किंग पर कड़ा प्रहार
सुल्तानगंज/भागलपुर: देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले लाखों-करोड़ों शिवभक्तों (कांवरियों) की आस्था का केंद्र सुल्तानगंज इन दिनों पवित्र श्रावणी मेले की रौनक से सराबोर है। उत्तरवाहिनी गंगा के पावन तट पर स्थित अजगैवीनाथ धाम से जल भरकर कांवरियों की लंबी कतारें बाबाधाम की ओर प्रस्थान कर रही हैं। कांवरियों की इस अप्रत्याशित भीड़ और सुरक्षा के लिहाज से किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने इस बार कमर कस ली है। मेले के दौरान विधि-व्यवस्था, सुगम यातायात और असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। मेला क्षेत्र में सुरक्षा इतनी चाक-चौबंद कर दी गई है कि चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल के साथ-साथ घुड़सवार दस्ते (Mounted Police) भी गश्त करते नजर आ रहे हैं, वहीं यातायात को बाधित करने वाली अनधिकृत पार्किंग के खिलाफ भी ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है।
श्रावणी मेले में सुरक्षा का महा-अभियान: क्यों पड़ी विशेष प्रबंधों की जरूरत?
सुल्तानगंज का श्रावणी मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शुमार है, जहां देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस विशाल जनसमूह की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता:
भीड़ का भारी दबाव: उत्तरवाहिनी गंगा तट से लेकर नमामि गंगे घाट, कच्ची कांवरिया पथ और रेलवे स्टेशन परिसर तक हर वक्त श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता रहता है। ऐसे में भगदड़ जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए फूलप्रूफ प्लानिंग की गई है।
संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाके: कांवरियों की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले जेबकतरों, उचक्कों और अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों और जोन्स में बांटा गया है।
घुड़सवार दस्तों की गश्त: मेला क्षेत्र में आकर्षण और सुरक्षा का अनूठा समन्वय
इस बार सुल्तानगंज मेले की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा आकर्षण और सामरिक हथियार घुड़सवार पुलिस दस्ता है, जो श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है:
संकरी गलियों और भीड़ में सुगम आवाजाही: कई ऐसे इलाके होते हैं जहां पुलिस के चार पहिया वाहन या वज्र वाहन आसानी से नहीं पहुंच सकते। ऐसी स्थिति में घुड़सवार दस्ते भीड़ के बीच से भी तेजी से गुजरकर स्थिति पर नियंत्रण रख सकते हैं।
ऊंची नजर और मनोवैज्ञानिक खौफ: घोड़े पर सवार पुलिसकर्मियों की ऊंचाई के कारण उन्हें दूर तक की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जाती है। साथ ही, असामाजिक तत्वों और मनचलों के मन में पुलिस के इस रूप से कड़ा खौफ पैदा होता है, जिससे वे किसी भी प्रकार की शरारत करने से बचते हैं।
यातायात प्रबंधन और अनधिकृत पार्किंग पर कड़ा प्रहार
श्रावणी मेले के दौरान सबसे बड़ी समस्या सड़कों पर लगने वाला भीषण जाम होती है, जिससे कांवरियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है:
जीरो टालरेंस नीति: जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मेला क्षेत्र और मुख्य मार्गों पर किसी भी प्रकार की अवैध या अनधिकृत पार्किंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सड़कों किनारे या नो-पार्किंग जोन में खड़े मिलने वाले वाहनों को या तो क्रेन से उठाया जा रहा है या उनपर भारी जुर्माना (चालान) लगाया जा रहा है।
सुगम कांवरिया मार्ग: पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त होने से न केवल ट्रैफिक सुचारू रूप से चल रहा है, बल्कि पैदल चलने वाले शिवभक्तों को भी आवागमन में किसी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। ट्रैफिक पुलिस चौबीसों घंटे तैनात रहकर वाहनों को निर्धारित डाइवर्टेड रूटों पर संचालित कर रही है।
कमांड कंट्रोल सेंटर और सीसीटीवी से चप्पे-चप्पे पर नजर
सुरक्षा को केवल शारीरिक बल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे पूरी तरह आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है:
सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे: उत्तरवाहिनी गंगा घाट से लेकर पूरे मेला रूट पर हाई-डिफ़िनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से भी भीड़ की गतिविधियों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है।
कमांड एंड कंट्रोल रूम: सुल्तानगंज में स्थापित विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Room) से हर गतिविधि पर 24 घंटे अधिकारी नजर बनाए हुए हैं। किसी भी आपात स्थिति या सूचना पर तुरंत त्वरित कार्रवाई दल (QRT) को मौके पर रवाना किया जाता है।
खोया-पाया केंद्र और स्वास्थ्य सेवाएं
प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा है:
खोया-पाया केंद्र: भारी भीड़ में अपनों बिछड़ जाने वाले श्रद्धालुओं की मदद के लिए जगह-जगह 'खोया-पाया केंद्र' बनाए गए हैं, जहां से लगातार सार्वजनिक घोषणाएं की जा रही हैं।
स्वास्थ्य शिविर: कांवरियों के स्वास्थ्य की जांच और प्राथमिक उपचार के लिए मेला क्षेत्र में दर्जनभर से अधिक अस्थायी चिकित्सा शिविर और एंबुलेंस तैनात हैं, जहां डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ चौबीसों घंटे मुस्तैद हैं।
सुल्तानगंज में श्रावणी मेले के दौरान की गई ये चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्थाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार और प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। घुड़सवार दस्तों की गश्त, अनधिकृत पार्किंग पर सख्त कार्रवाई और तकनीकी निगरानी के चलते इस बार का मेला न केवल अनुशासित और व्यवस्थित नजर आ रहा है, बल्कि शिवभक्त पूरी तरह सुरक्षित माहौल में अपनी आस्था की यात्रा पूरी कर रहे हैं। प्रशासन की इस मुस्तैदी से कांवरियों में भी एक सकारात्मक संदेश गया है और वे बिना किसी भय के बाबा भोलेनाथ के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं।