बिहार में 5 हजार से अधिक संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान, पटना-चंपारण क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले

पटना। बिहार में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। इसी क्रम में बिहार पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किए जाने वाले पांच हजार से अधिक संदिग्ध म्यूल खातों को चिह्नित किया है। इन खातों को लेकर पुलिस को आशंका है कि इनका इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने या रकम को छिपाने के लिए किया जा रहा है।

संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान के बाद साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर पुलिस की निगरानी और सख्त होने की संभावना है। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक पटना और चंपारण क्षेत्र में ऐसे खातों की संख्या सबसे अधिक मिली है। राज्य में चिह्नित कुल संदिग्ध म्यूल खातों में 30 प्रतिशत से अधिक खाते इसी क्षेत्र में पाए गए हैं।

इन आंकड़ों में पटना सबसे आगे है। पटना जिले में 672 संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान की गई है। इसके बाद मोतिहारी में 509 और बेतिया में 454 ऐसे खाते मिले हैं। नालंदा और गया भी संदिग्ध खातों की संख्या के मामले में राज्य के शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त रकम को ट्रांसफर करने, निकालने या आगे भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक स्वयं साइबर अपराध में सीधे शामिल नहीं होता, लेकिन उसका बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह द्वारा अवैध लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कभी-कभी खाताधारकों को कमीशन या किसी अन्य लालच का भरोसा देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं कुछ मामलों में फर्जी पहचान, किराये के बैंक खाते या दूसरे तरीकों से भी ऐसे खातों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है।

साइबर ठगी की रकम जब पीड़ित के खाते से निकलती है तो उसे कई अलग-अलग खातों में भेजा जा सकता है। इस तरह रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर करने से अपराधियों के लिए पैसे के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल बनाने का प्रयास किया जाता है। इसी वजह से म्यूल खातों की पहचान साइबर अपराध की जांच में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पटना में सबसे अधिक 672 संदिग्ध खाते

राज्य में चिह्नित संदिग्ध म्यूल खातों में पटना सबसे ऊपर है। राजधानी में 672 ऐसे बैंक खातों की पहचान की गई है जिनके लेन-देन पर संदेह जताया गया है।

पटना राज्य का प्रमुख प्रशासनिक, आर्थिक और व्यावसायिक केंद्र है। बड़ी आबादी और व्यापक बैंकिंग एवं डिजिटल लेन-देन के कारण साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच में राजधानी महत्वपूर्ण क्षेत्र बन जाती है।

पुलिस द्वारा संदिग्ध खातों को चिह्नित किए जाने के बाद इन खातों से जुड़े लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण होगी। संदिग्ध ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि रकम कहां से आई, किस खाते में गई और उसके बाद किन खातों में स्थानांतरित हुई।

मोतिहारी में 509 और बेतिया में 454 खाते

पटना के बाद मोतिहारी में 509 और बेतिया में 454 संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान हुई है। दोनों जिले चंपारण क्षेत्र का हिस्सा हैं। यही वजह है कि पटना के साथ चंपारण क्षेत्र भी संदिग्ध खातों के मामले में महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने आया है।

राज्य में मिले कुल म्यूल खातों में 30 प्रतिशत से अधिक इसी क्षेत्र में पाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच में इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

मोतिहारी और बेतिया में चिह्नित खातों की संख्या यह संकेत देती है कि साइबर ठगी के पैसे के संभावित लेन-देन की निगरानी केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखी जा सकती। जिला स्तर पर बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच भी साइबर अपराध की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

नालंदा और गया भी शीर्ष पांच में

संदिग्ध म्यूल खातों की संख्या के मामले में नालंदा और गया भी राज्य के शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं। इसका मतलब है कि साइबर ठगी से जुड़े संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क की मौजूदगी अलग-अलग जिलों में सामने आ रही है।

पुलिस के लिए चुनौती यह पता लगाना होगी कि चिह्नित खातों में से कितने खाते वास्तव में साइबर अपराध की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल हुए हैं और कितने खातों का इस्तेमाल किसी अन्य वजह से हुआ है। किसी खाते का संदिग्ध सूची में होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। इसलिए आगे की जांच और लेन-देन के रिकॉर्ड की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।

साइबर ठगी के पैसे का नेटवर्क समझना जरूरी

साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। ठगी के बाद रकम को तुरंत दूसरे बैंक खातों में भेजने की कोशिश की जा सकती है। एक खाते से दूसरे खाते और फिर कई अन्य खातों में रकम पहुंचने के कारण जांच एजेंसियों के लिए धन के पूरे प्रवाह को समझना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

म्यूल खातों की पहचान इसी वित्तीय नेटवर्क को समझने में मदद कर सकती है। यदि किसी संदिग्ध खाते में बड़ी संख्या में अलग-अलग लोगों से रकम आती है और फिर थोड़े समय में रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर हो जाती है, तो यह लेन-देन जांच के दायरे में आ सकता है।

पुलिस के लिए ऐसे खातों की निगरानी के साथ-साथ संबंधित बैंकिंग लेन-देन, मोबाइल नंबर, डिजिटल पहचान और अन्य उपलब्ध जानकारी को जोड़ना भी महत्वपूर्ण होगा।

आम लोगों को भी रहना होगा सतर्क

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच आम लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी, ओटीपी या अन्य वित्तीय विवरण उपलब्ध नहीं कराना चाहिए।

कई बार अपराधी बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले पैसे या कमीशन देने का लालच दे सकते हैं। लेकिन यदि उस खाते में साइबर ठगी की रकम का लेन-देन होता है, तो खाताधारक भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है।

इसलिए लोगों को अपने बैंक खाते का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति को करने की अनुमति देने से पहले बेहद सावधान रहना चाहिए। बैंक खाते, एटीएम कार्ड, यूपीआई आईडी या इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

पुलिस के सामने वित्तीय नेटवर्क तोड़ने की चुनौती

साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। पहले जहां ठगी के लिए फोन कॉल और फर्जी संदेशों का इस्तेमाल प्रमुख रूप से किया जाता था, वहीं अब डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल ने अपराधियों के लिए रकम ट्रांसफर करने के नए रास्ते भी बनाए हैं।

ऐसे में पुलिस के सामने केवल ठगों को पकड़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि ठगी की रकम के पूरे वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना भी जरूरी है। संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

पटना, मोतिहारी और बेतिया में बड़ी संख्या में संदिग्ध खाते मिलने के बाद इन क्षेत्रों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की आवश्यकता और बढ़ जाती है। नालंदा और गया जैसे जिलों को भी इस जांच प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

आगे की जांच पर टिकी नजर

पांच हजार से अधिक संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान के बाद अब इन खातों से जुड़े लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण होगी। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि इन खातों में साइबर ठगी की रकम किस तरह पहुंची और आगे कहां-कहां भेजी गई।

जांच के दौरान संदिग्ध खातों के बीच आपसी कनेक्शन सामने आने पर साइबर अपराध से जुड़े बड़े नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। वहीं ऐसे खाताधारक जिनके खाते का गलत इस्तेमाल हुआ है, उनके मामलों को भी जांच के दौरान अलग-अलग देखना आवश्यक होगा।

कुल मिलाकर बिहार में पांच हजार से अधिक संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पटना में 672, मोतिहारी में 509 और बेतिया में 454 संदिग्ध खाते मिलने के साथ ही चंपारण क्षेत्र की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है। नालंदा और गया का शीर्ष पांच जिलों में शामिल होना यह दिखाता है कि संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का दायरा कई जिलों तक फैला हुआ है।

अब इन खातों की जांच और उनके लेन-देन की कड़ियों को जोड़ना पुलिस के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। यदि संदिग्ध खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम के नेटवर्क की पहचान होती है, तो इससे अपराधियों तक पहुंचने और भविष्य में ऐसे वित्तीय रास्तों को रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही आम लोगों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि बैंक खाते या डिजिटल भुगतान से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को उपलब्ध कराने से पहले पूरी सावधानी बरतें।