बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर का निर्माण कार्य श्रावणी मेले के बाद सितंबर से होगा शुरू: 25 करोड़ रुपये की लागत से बदलेगी मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध मंदिर की सूरत, 12 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
बिहार के देवघर कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बहुप्रतीक्षित 'बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर' के निर्माण कार्य को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के संपन्न होने के तुरंत बाद, यानी सितंबर महीने से इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू कर दिया जाएगा। इस पूरी परियोजना पर लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले लाखों शिव भक्तों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना और मंदिर परिसर तथा उसके आसपास के इलाके का कायापलट करना है।
कॉरिडोर प्रोजेक्ट में क्या-क्या कार्य शामिल हैं?
बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर परियोजना के तहत मुजफ्फरपुर शहर के इस मुख्य धार्मिक केंद्र के आसपास के पूरे बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को आधुनिक बनाया जाएगा। इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख कार्य किए जाएंगे:
मंदिर का भव्य सौंदर्यीकरण (Temple Beautification): मंदिर परिसर के आंतरिक और बाहरी हिस्से को आकर्षक रूप दिया जाएगा। गर्भ गृह के आसपास श्रद्धालुओं के लिए दर्शन को सुलभ बनाने, बेहतर प्रकाश व्यवस्था (Lighting) और विश्राम कक्षों का निर्माण किया जाएगा।
सड़क चौड़ाई और एप्रोच रोड का विकास: मंदिर तक पहुंचने वाले संकरे रास्तों और सड़कों को चौड़ा किया जाएगा ताकि भारी भीड़ के दौरान भी किसी प्रकार की भगदड़ या जाम की स्थिति न बने। आपातकालीन वाहनों (एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड) के लिए सुगम मार्ग सुनिश्चित किया जाएगा।
साहू पोखर का विकास और सुंदरीकरण (Sahu Pokhar Development): मंदिर के पास स्थित ऐतिहासिक साहू पोखर का जीर्णोद्धार इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पोखर के चारों तरफ घाटों का पक्का निर्माण, लाइटिंग, पाथवे और बैठने के लिए बेंच आदि की व्यवस्था की जाएगी, जिससे यह क्षेत्र एक सुंदर पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित हो सके।
यात्री सुविधाएं (Pilgrim Facilities): दूर-दराज से आने वाले कांवड़ियों और शिव भक्तों के लिए चेंजिंग रूम, पेयजल की आधुनिक व्यवस्था, शौचालय परिसर और शेड का निर्माण कराया जाएगा।
श्रावणी मेले के बाद क्यों शुरू होगा काम?
मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर उत्तर बिहार की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। प्रतिवर्ष श्रावण मास (सावन) के दौरान यहाँ लाखों की संख्या में कांवड़िए जलार्पण करने के लिए पहुंचते हैं।
भारी भीड़ और प्रबंधन: सावन के महीने में मंदिर और उसके आसपास के इलाकों में भारी पैर-पसार भीड़ होती है। ऐसे में यदि इस दौरान निर्माण कार्य शुरू किया जाता, तो ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा सकती थी और श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता।
प्रशासनिक निर्णय: इसी बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने यह रणनीतिक निर्णय लिया है कि श्रावणी मेले के शांतिपूर्ण समापन के बाद सितंबर माह में विधिवत रूप से निर्माण कार्य की शुरुआत की जाए, ताकि समयसीमा (12 महीने) के भीतर बिना किसी बाधा के कार्य पूरा हो सके।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में उत्साह
इस कॉरिडोर के निर्माण की खबर सामने आने के बाद से मुजफ्फरपुर के स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और व्यापारियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। काशी विश्वनाथ और महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर बाबा गरीबनाथ धाम के सौंदर्यीकरण से मुजफ्फरपुर को एक नई पहचान मिलेगी।
25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर मुजफ्फरपुर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। सितंबर से शुरू होने वाले इस 12 महीने के प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को न केवल बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि मंदिर और साहू पोखर के आसपास का पूरा परिदृश्य ही बदल जाएगा। प्रशासन और संवेदकों द्वारा इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है, और अब सभी को सितंबर माह में कार्य शुरू होने का इंतजार है।