अग्निशमन विभाग का सिपाही विवेक तिलकामांझी में दर्ज मामले में घिर; रजौन थानेदार की भूमिका को लेकर भी गरमाई सियासत और पुलिस महकमा
भागलपुर: बिहार के पुलिस महकमे से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। कानून की रक्षा करने और आग बुझाने की जिम्मेदारी संभालने वाले खाकीधारी खुद जब विवादों के घेरे में आ जाएं, तो महकमे की साख पर सवाल उठना लाजिमी है। अग्निशमन विभाग (Fire Department) में सिपाही के पद पर कार्यरत विवेक कुमार इन दिनों गंभीर कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। भागलपुर के व्यस्त और संवेदनशील तिलकामांझी थाना क्षेत्र में उनके खिलाफ एक संगीन आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इस पूरे प्रकरण में केवल सिपाही विवेक ही नहीं, बल्कि बांका जिले के रजौन थानेदार की संदिग्ध भूमिका और संलिप्तता को लेकर भी महकमे के भीतर सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिससे यह मामला और अधिक उलझ गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद एक सुनियोजित साजिश, व्यक्तिगत रंजिश और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पुलिसिया धौंस दिखाने का है:
तिलकामांझी में दर्ज मामला: भागलपुर के तिलकामांझी थाना क्षेत्र में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, अग्निशमन विभाग के सिपाही विवेक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उसने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए कानून को अपने हाथ में लिया और एक विवादित मामले में अवैध तरीके से हस्तक्षेप किया।
रजौन थानेदार की भूमिका पर उठे सवाल: इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अनुसंधान के दौरान बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र के तत्कालीन थानेदार का नाम इस विवाद से जुड़ गया। आरोप है कि सिपाही विवेक को बचाने या किसी अन्य गुप्त उद्देश्य से रजौन थानेदार ने अपनी पेशेवर सीमा लांघकर अनुचित हस्तक्षेप किया। पुलिस महकमे के अंदर ही यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर एक दूसरे जिले या थाने में तैनात पुलिसकर्मी को बचाने के लिए दूसरा थानेदार कैसे सक्रिय हो गया।
खाकी के रक्षक बने भक्षक: अनुशासनहीनता की हदें पार
पुलिस विभाग में अनुशासन को सबसे सर्वोपरि माना जाता है, लेकिन इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किस तरह कुछ भ्रष्ट तत्व अपनी वर्दी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं:
वर्दी का खौफ दिखाकर दबंगई: स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आ रही है कि सिपाही विवेक अपनी नौकरी और महकमे की धौंस दिखाकर आम नागरिकों पर रौब गांठता रहा है। तिलकामांझी इलाके में हुई घटना के पीछे भी इसी प्रकार के वर्चस्व और मनमानी की बात कही जा रही है।
विभागीय मिलीभगत की बू: जब एक सिपाही पर आपराधिक मामला दर्ज होता है और दूसरे थाने का थानेदार उसकी पैरवी या संरक्षण में जुट जाता है, तो यह स्पष्ट संकेत देता है कि महकमे के भीतर किस स्तर पर सांठगांठ चल रही है।
उच्च अधिकारियों तक पहुंचा मामला, जांच के दायरे में कई चेहरे
इस हाई-प्रोटिफ़ाइल और संवेदनशील मामले के तूल पकड़ने के बाद अब पुलिस के आला अधिकारी पूरी तरह हरकत में आ गए हैं:
वरीय अधिकारियों की सख्त नजर: भागलपुर और बांका जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (DIG और SP) ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किए जाने की बात सामने आ रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल के पीछे कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
रजौन थानेदार पर विभागीय कार्रवाई की तलवार: जिस तरह से रजौन थानेदार का नाम इस विवाद में उछाला गया है, उससे उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। यदि प्रारंभिक जांच में उनकी संलिप्तता या कर्तव्य में लापरवाही साबित होती है, तो उनके खिलाफ तुरंत निलंबन (Suspension) और विभागीय कार्यवाही की गाज गिर सकती है।
आम जनता और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय
इस घटना ने शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और कानूनविदों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है:
कानून का इकबाल बुलंद हो: आम जनता का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाएगी। लोग मांग कर रहे हैं कि सिपाही विवेक और इस मामले में संलिप्त पाए जाने वाले हर एक पुलिसकर्मी (चाहे वह रजौन के थानेदार ही क्यों न हों) के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पारदर्शी जांच की मांग: नागरिकों का मानना है कि इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी या अपराध अनुसंधान विभाग (CID) से कराई जानी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
अग्निशमन विभाग के सिपाही विवेक के खिलाफ तिलकामांझी में दर्ज मामला और उसमें रजौन थानेदार की संलिप्तता के आरोप पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा धब्बा हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि खाकी की आड़ में अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रशासन अपने ही विभाग के दागदार चेहरों के खिलाफ कितनी निष्पक्षता और सख्ती से कार्रवाई करता है, ताकि समाज में खाकी के प्रति विश्वास फिर से कायम हो सके।