औरंगाबाद गांव में मारपीट में एक महिला समेत पांच लोग घायल, दो की हालत गंभीर
कहलगांव (भागलपुर): बिहार के कहलगांव थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव में शुक्रवार को मामूली कहासुनी ने एक बड़े हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया। गांव में दो पक्षों के बीच चल रहे पुराने आपसी विवाद को लेकर हुई मारपीट में एक महिला समेत कुल पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। घायलों को इलाज के लिए कहलगांव अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद दो लोगों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।
घटना का विवरण: खेत की मेड़ से शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ काफी पुरानी बताई जा रही है। शुक्रवार को जब औरंगाबाद गांव के निवासी अपने खेतों के पास थे, तभी किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस ने तीखी नोकझोंक का रूप ले लिया और दोनों तरफ से लाठी-डंडों और धारदार हथियारों के साथ हमला शुरू हो गया।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि संघर्ष इतना तीव्र था कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर वार किए। इस मारपीट की चपेट में आकर एक महिला और चार अन्य पुरुष बुरी तरह जख्मी हो गए। चीख-पुकार सुनकर जब आसपास के लोग दौड़े, तो हमलावर पक्ष के लोग मौके से फरार हो गए।
घायलों की स्थिति और अस्पताल में अफरा-तफरी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से कहलगांव अनुमंडल अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने घायलों की जांच की।
घायलों की सूची: मारपीट में घायल होने वालों में रामविलास सिंह, सुरेश मंडल, सुमन देवी (महिला), अजय कुमार और विजय कुमार शामिल हैं।
गंभीर स्थिति: चिकित्सकों के अनुसार, रामविलास और सुमन देवी के सिर और शरीर के आंतरिक हिस्सों में गहरी चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार न होते देख उन्हें भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया गया। अन्य तीन घायलों का इलाज कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में ही चल रहा है, जहाँ उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही कहलगांव थाना की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि पीड़ित पक्ष द्वारा लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष ने कहा, "हम गांव में शांति बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ा रहे हैं। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी की जा रही है।"
गांव में पसरा तनाव
औरंगाबाद गांव में इस घटना के बाद से ही सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस की तैनाती कर दी गई है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो। ग्रामीण इस हिंसा से बेहद स्तब्ध हैं, क्योंकि दोनों पक्ष लंबे समय से पड़ोसी के तौर पर रह रहे थे। गांव के गणमान्य लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस विवाद का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की हिंसक घटनाएं न हों।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
अक्सर देखा गया है कि गांवों में छोटी-छोटी जमीनी रंजिश या आपसी विवाद बड़ी हिंसक घटनाओं में बदल जाते हैं। स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि समय रहते प्रशासन ने विवादों का निपटारा किया होता, तो आज पांच लोग अस्पताल में न होते।
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि ग्रामीण इलाकों में विवादों के समाधान के लिए जन-संवाद और समय पर पुलिसिया हस्तक्षेप कितना महत्वपूर्ण है। फिलहाल, क्षेत्र में पुलिस कैंप कर रही है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन ने ग्रामीणों से धैर्य बनाए रखने और कानून हाथ में न लेने की अपील की है।