कोलकाता के कांवरिया लेकर निकले 120 किलोग्राम वजनी भव्य पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा; आशीष बम बोले—'शेषनाथ हनुमान मंदिर पूजा समिति' से जुड़ा है हमारा जत्था, आकर्षण का केंद्र बनी यह अनोखी यात्रा
सुल्तानगंज/भागलपुर (विशेष संवाददाता): देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र श्रावण मास (सावन) के इस पावन और आध्यात्मिक अवसर पर बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तर वाहिनी गंगा के पावन तटों से निकलने वाली कांवर यात्राओं में रोजाना नए और अद्भुत आयाम देखने को मिल रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को सुल्तानगंज के कांवरिया पथ से एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने वहाँ मौजूद देश भर के लाखों श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से आए शिवभक्तों के एक विशिष्ट जत्था ने इस बार सावन की यात्रा को बेहद खास बना दिया है। यह जत्था अपने साथ कोई साधारण कांवर लेकर नहीं, बल्कि 120 किलोग्राम वजनी और अत्यंत भव्य पंचमुखी हनुमान की विशाल प्रतिमा को कांवर पर सजाकर देवघर (बाबानगरी) की कठिन और पवित्र पैदल यात्रा पर निकला है। इस अनोखी और विशाल प्रतिमा वाली कांवर यात्रा को देखने के लिए सुल्तानगंज से लेकर कांवरिया पथ तक श्रद्धालुओं का तांता लग गया।
कोलकाता से सुल्तानगंज पहुँचे शिवभक्त और यात्रा का मुख्य आकर्षण
सावन के इस पवित्र महीने में कांवरियों के जत्थे अपनी अनोखी आस्था और भक्ति प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कोलकाता के इन कांवरियों ने अपनी इस अनूठी पहल से इतिहास रच दिया है:
120 किलो वजनी पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा: कोलकाता से आए इस जत्थे द्वारा जो कांवर तैयार की गई है, उसके केंद्र में संकटमोचन भगवान हनुमान की पंचमुखी स्वरूप वाली लगभग 120 किलोग्राम वजनी एक अत्यंत सुंदर और भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। इस विशाल प्रतिमा को कंधों पर उठाकर या विशेष रूप से डिजाइन किए गए रथनुमा कांवर के जरिए ले जाना किसी सामान्य शारीरिक क्षमता का काम नहीं है, बल्कि यह कांवरियों के अटूट संकल्प और बजरंगबली के प्रति उनकी अगाध निष्ठा का प्रमाण है।
श्रद्धालुओं में देखने की होड़: जैसे ही यह विशाल पंचमुखी हनुमान प्रतिमा वाला कांवर सुल्तानगंज के मुख्य गंगा घाट से जल भरकर आगे बढ़ा, वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की निगाहें इसी पर टिक गईं। लोग अपने मोबाइल फोन और कैमरों में इस अद्भुत क्षण को कैद करने के लिए उत्सुक नजर आए। रास्ते भर 'जय बजरंगबली', 'बजरंगबली की जय' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा वातावरण गूँजता रहा।
आशीष बम ने साझा की जत्थे की पृष्ठभूमि: "शेषनाथ हनुमान मंदिर पूजा समिति से जुड़ा है हमारा समर्पण"
इस अद्भुत और भव्य यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्रमुख कांवरिया आशीष बम ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस यात्रा के पीछे की पूरी कहानी और धार्मिक महत्व को साझा किया:
शेषनाथ हनुमान मंदिर पूजा समिति से जुड़ाव: आशीष बम ने गर्व के साथ बताया कि उनका यह पूरा जत्था कोलकाता की प्रसिद्ध 'शेषनाथ हनुमान मंदिर पूजा समिति' से जुड़ा हुआ है। हर वर्ष की तरह इस बार भी उनकी समिति के सदस्यों ने मिलकर कुछ अलग और विशेष करने का संकल्प लिया था, जिसके तहत कलकत्ता से इस 120 किलोग्राम वजनी पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा को सुल्तानगंज लाया गया है।
संकल्प और मनोकामना: आशीष बम ने बताया, "भगवान हनुमान शक्ति, भक्ति और संकटमोचन के प्रतीक हैं। हमारी समिति और सभी शिवभक्तों की यह मनोकामना है कि देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ और साथ में पधारे इन पंचमुखी हनुमान जी के आशीर्वाद से पूरे देश और समाज में सुख, शांति, समृद्धि बनी रहे तथा युवाओं में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का संचार हो।" उन्होंने यह भी कहा कि इतनी भारी प्रतिमा को लेकर यात्रा करना शारीरिक रूप से कठिन जरूर है, लेकिन बजरंगबली की कृपा से उनके जत्थे का हर एक सदस्य पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है।
कोलकाता से सुल्तानगंज तक की तैयारी और लॉजिस्टिक्स
इतनी भारी और विशाल प्रतिमा को कोलकाता से सुल्तानगंज लाकर वहाँ से देवघर तक की पैदल यात्रा करना आसान नहीं था, इसके लिए समिति ने महीनों पहले तैयारी शुरू कर दी थी:
विशेष कांवर का निर्माण: 120 किलोग्राम वजन को संतुलित करने और सुरक्षित तरीके से सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करने के लिए एक विशेष और मजबूत कांवर का ढांचा तैयार किया गया है। इसे सजाने के लिए बंगाल और स्थानीय कलाकारों के सहयोग से फूलों और लाइटों का आकर्षक संयोजन किया गया है।
जत्थे के सदस्यों का अनुशासन: कोलकाता से आए इस जत्थे में दर्जनों की संख्या में युवा और बुजुर्ग कांवरिया शामिल हैं। सभी ने एक जैसी पोशाक (भगवा वस्त्र) धारण कर रखी है और वे पूरी अनुशासनबद्धता के साथ कतार में आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और विश्राम के लिए भी जत्थे ने अपने स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए हैं।
कांवरिया पथ पर उमड़ी भीड़ और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं
कोलकाता के इन कांवरियों द्वारा लाई गई पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा को देखने के लिए सुल्तानगंज से लेकर आगे के कांवरिया मार्ग तक भारी भीड़ उमड़ पड़ी:
स्थानीय जनता और दुकानदारों का स्वागत: कांवरिया पथ के दोनों ओर खड़े स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने इस अनूठे जत्थे पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई तरह के कांवर देखे हैं, लेकिन 120 किलो की पंचमुखी हनुमान प्रतिमा वाला यह कांवर पहली बार देखा है, जो वास्तव में अदभुत है।
अन्य कांवरियों में बढ़ा उत्साह: इस जत्थे को देखकर अन्य राज्यों से आए कांवरियों का उत्साह भी दोगुना हो गया। लोग इस जत्थे के साथ तस्वीरें खिंचवाते और बजरंगबली के जयकारे लगाते नजर आए।
सुल्तानगंज के पावन तट से कोलकाता के कांवरियों द्वारा 120 किलोग्राम वजनी पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा के साथ शुरू की गई यह यात्रा सावन मास के इस पावन पर्व पर आस्था, भक्ति और श्रम का एक अनूठा संगम बन गई है। आशीष बम और उनकी 'शेषनाथ हनुमान मंदिर पूजा समिति' के सदस्यों का यह प्रयास न केवल उनकी धार्मिक निष्ठा को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सच्ची श्रद्धा के आगे बड़े से बड़ा कठिन लक्ष्य भी आसान हो जाता है। यह ऐतिहासिक कांवर यात्रा सावन के इस सीजन में सुल्तानगंज और देवघर के पूरे रूट पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है।