स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला; सदर अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था होगी चाक-चौबंद, नई रेफरल नीति से बढ़ेगी मरीजों और परिजनों की भीड़
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के स्वास्थ्य महकमे से एक बेहद अहम और दूरगामी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। सरकारी अस्पतालों में लगातार बढ़ती अव्यवस्था, चिकित्सा कर्मियों और डॉक्टरों के साथ होने वाली नोंकझोक तथा सुरक्षा संबंधी तमाम चिंताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक सख्त और कड़ा कदम उठाया है। विभाग ने भागलपुर स्थित सदर अस्पताल सहित जिले के तमाम अन्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से सुदृढ़ (Strengthen) करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण और सुगमता के लिए लागू की जा रही 'नई रेफरल व्यवस्था' (New Referral System) के कारण आने वाले दिनों में सदर अस्पताल और बड़े चिकित्सा संस्थानों में मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ बेतहाशा बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
क्यों पड़ी सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की जरूरत?
अस्पतालों में सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से बहस का केंद्र रहा है। इस संबंध में विभाग द्वारा उठाए गए कदमों के पीछे कई ठोस कारण छिपे हैं:
चिकित्सकों और कर्मियों की सुरक्षा: पिछले कुछ समय से राज्य के विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की स्थिति बिगड़ने पर परिजनों द्वारा आक्रोश जताने, तोड़फोड़ करने और चिकित्सा कर्मियों के साथ मारपीट जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इन अप्रिय घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा का कड़ा दायरा होना अनिवार्य माना गया था।
अराजक तत्वों पर शिकंजा: सदर अस्पताल जैसे बड़े परिसरों में अक्सर बिचौलियों, दलालों और अनावश्यक रूप से घूमने वाले असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे गंभीर मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी असुविधा होती है। नई सुरक्षा नीति के तहत अब अस्पताल परिसरों में फालतू भीड़ और इन तत्वों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।
नई रेफरल व्यवस्था: क्या है इसका स्वरूप और प्रभाव?
स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक नई रेफरल व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसका सीधा असर सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा:
चरणबद्ध इलाज की नीति: इस नई व्यवस्था के तहत अब ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) से आने वाले मरीजों को एक तय वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत ही बड़े अस्पतालों में भेजा जाएगा। इससे छोटे अस्पतालों की जवाबदेही बढ़ेगी।
सदर अस्पताल पर बढ़ेगा अतिरिक्त दबाव: नई रेफरल प्रणाली के सुचारू होने से जिले के दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर और विशेष मामलों के मरीजों को सीधे सदर अस्पताल और मायागंज अस्पताल की ओर रेफर किए जाने की संभावना है। परिणामस्वरूप, आने वाले दिनों में सदर अस्पताल के परिसरों में मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
सुरक्षा के मोर्चे पर क्या होंगे नए बदलाव?
बढ़ती भीड़ और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने कई पुख्ता तैयारियां की हैं:
सुरक्षा बलों की तैनाती: सदर अस्पताल और प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल और प्रशिक्षित प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स को तैनात किया जाएगा, जो चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे।
प्रवेश द्वार पर निगरानी और पास प्रणाली: अस्पताल में प्रवेश के लिए अब अनुशासित व्यवस्था बनाई जाएगी, जिसके तहत मरीजों के साथ केवल सीमित संख्या में ही परिजनों को अंदर जाने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए विशेष प्रवेश पास या टोकन सिस्टम पर विचार किया जा रहा है।
सीसीटीवी कैमरों का जाल: अस्पताल के हर वार्ड, गलियारे, इमरजेंसी और रजिस्ट्रेशन काउंटर पर हाई-डिफ़िनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी मॉनिटरिंग सीधे अस्पताल प्रशासन के नियंत्रण कक्ष से की जाएगी।
चिकित्सा प्रबंधन और जनता की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले का स्वागत करते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों और आम जनता ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है:
प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष: स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और नई रेफरल व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी हैं। जब अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ेगी, तो व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजामों का होना बेहद जरूरी है ताकि डॉक्टर और नर्स भयमुक्त होकर अपनी सेवाएं दे सकें।
आम जनता की अपेक्षाएं: स्थानीय नागरिकों और मरीजों का मानना है कि सुरक्षा बढ़ने से चोरी, छिनतई और अराजकता जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी, बशर्ते इस दौरान मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली या विलंब न हो।
भागलपुर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सदर अस्पताल और अन्य सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का निर्णय और नई रेफरल व्यवस्था का क्रियान्वयन जिला स्वास्थ्य सेवा के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित होने वाला है। एक तरफ जहां अस्पतालों में सुरक्षा का घेरा मजबूत होने से अराजकता पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी तरफ मरीजों की बढ़ती भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी। यदि दोनों प्रणालियों को सही तालमेल के साथ लागू किया जाए, तो सिल्क सिटी के लोगों को एक सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य ढांचा मिल सकेगा।