फोटो-होर्डिंग सर्वे का लिया गया बड़ा निर्णय अवैध विज्ञापनों पर कसेगा शिकंजा, जांच रिपोर्ट होगी सार्वजनिक; दोषी कर्मियों पर गिरेगी गाज
भागलपुर (विशेष संवाददाता): शहर की खूबसूरती को विरूपित कर रहे अवैध होर्डिंग्स, बैनरों और विज्ञापनों के साम्राज्य पर लगाम लगाने के लिए भागलपुर नगर निगम प्रशासन ने अब एक अत्यंत सख्त और पारदर्शी कदम उठाया है। शहर भर में मनमाने ढंग से लगाए गए विज्ञापनों और होर्डिंग्स के खेल की सच्चाई सामने लाने के लिए 'फोटो-होर्डिंग सर्वे' कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि शहर में कितने होर्डिंग्स वैध रूप से अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) के तहत चल रहे हैं और कितने अवैध रूप से निगम के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद तैयार होने वाली जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा और इस अवैध धंधे में संलिप्त पाए जाने वाले दोषी कर्मियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
क्या है फोटो-होर्डिंग सर्वे और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?
भागलपुर शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों, सड़कों और इमारतों की छतों पर पिछले कुछ वर्षों से होर्डिंग्स और विज्ञापनों का जाल सा बिछ गया है। इससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि नगर निगम को मिलने वाले राजस्व में भी भारी सेंध लग रही है:
राजस्व की भारी क्षति: कई विज्ञापन एजेंसियों और संचालकों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से होर्डिंग्स लगा दिए गए हैं, जिससे निगम की तिजोरी को हर साल लाखों-करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है।
सुरक्षा और मानकों की अनदेखी: बिना अनुमति के लगाए गए ये होर्डिंग्स आंधी-तूफान के समय राहगीरों और यातायात के लिए बड़ा खतरा साबित होते हैं। कई बार भारी-भरकम होर्डिंग्स के गिरने से बड़े हादसों की आशंका बनी रहती है।
पारदर्शिता लाना: इन तमाम अनियमितताओं पर लगाम लगाने और पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए निगम प्रशासन ने अब डिजिटल और फोटोग्राफिक साक्ष्यों के आधार पर 'फोटो-होर्डिंग सर्वे' कराने का फैसला किया है।
कैसे होगा यह सर्वे और क्या होगी इसकी प्रक्रिया?
नगर निगम द्वारा इस विशेष सर्वेक्षण को निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय तकनीकी टीम का गठन किया गया है:
जियो-टैगिंग और फोटोग्राफी: सर्वे टीम शहर के वार्डवार हर एक चौक-चौराहे और मुख्य मार्गों पर लगे होर्डिंग्स की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें खींचेगी और उनकी जियो-टैगिंग (Geo-tagging) करेगी।
दस्तावेजों का मिलान: खींची गई तस्वीरों और होर्डिंग्स के साइज का मिलान नगर निगम के लाइसेंस रजिस्टर से किया जाएगा। यदि किसी होर्डिंग का लाइसेंस नहीं मिलता है या उसका आकार निर्धारित मानक से अधिक पाया जाता है, तो उसे अवैध घोषित कर दिया जाएगा।
एजेंसियों पर नकेल: अवैध रूप से विज्ञापन संचालित करने वाली एजेंसियों की सूची तैयार कर उनपर भारी जुर्माना लगाने और विज्ञापनों को तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट होगी सार्वजनिक, छिपे चेहरों से उठेगा पर्दा
इस पूरी सर्वे प्रक्रिया का सबसे सराहनीय पहलू इसकी पारदर्शिता है, जिसे लेकर निगम प्रशासन ने स्पष्ट रुख अपनाया है:
पब्लिक डोमेन में रिपोर्ट: सर्वे पूरा होने के बाद तैयार की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट को नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि आम नागरिक भी यह जान सकें कि शहर में किसका अवैध साम्राज्य चल रहा था।
भ्रष्टाचार पर प्रहार: रिपोर्ट सार्वजनिक होने से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि किन-किन इलाकों में किसकी शह पर अवैध होर्डिंग्स फल-फूल रहे थे, जिससे दोषियों को बचा पाना असंभव होगा।
दोषी कर्मियों और अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
अवैध होर्डिंग्स का यह अवैध खेल बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के चल पाना असंभव है। इसे ध्यान में रखते हुए निगम प्रशासन ने विभागीय मिलीभगत पर भी कड़ा रुख अपनाया है:
चिन्हित होंगे लापरवाह कर्मी: यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी राजस्व निरीक्षक, लिपिक या अन्य अधिकारी की लापरवाही या संलिप्तता के कारण अवैध होर्डिंग्स को बढ़ावा मिला, तो उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई (Disciplinary Action) की जाएगी।
निलंबन और प्राथमिकी: गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों को निलंबित करने के साथ-साथ उनपर कानूनी कार्रवाई (FIR) करने के भी संकेत दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
भागलपुर नगर निगम द्वारा फोटो-होर्डिंग सर्वे कराने और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का यह निर्णय शहर की वित्तीय सेहत सुधारने और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह पहल न केवल निगम के राजस्व को बढ़ाने में मददगार साबित होगी, बल्कि उन भ्रष्ट तत्वों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो अवैध कार्यों को संरक्षण दे रहे थे। यदि इस अभियान को पूरी ईमानदारी और सख्ती से धरातल पर उतारा गया, तो आने वाले दिनों में भागलपुर शहर विज्ञापनों के अवैध जंजाल से मुक्त और सुंदर नजर आएगा।