लाखों की लागत, पर बदहाली की मार शाहकुंड के दरियापुर पंचायत सरकार भवन तक पहुँचने का रास्ता कीचड़मय; मुख्य सड़क से संपर्क कटा, ग्रामीणों में आक्रोश
शाहकुंड/भागलपुर : सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल ग्रामीण विकास की रीढ़ कहे जाने वाले पंचायत सरकार भवन इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता की दास्तां बयां कर रहे हैं। भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड अंतर्गत आने वाली दरियापुर पंचायत का हाल कुछ ऐसा ही है, जहां लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर जनता की सुविधा के लिए पंचायत सरकार भवन का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन वहां तक पहुँचने के लिए एक अदद ढंग की पक्की सड़क का नामोनिशान तक नहीं है। स्थिति यह है कि हल्की बारिश या जलभराव के बाद यह पूरा मार्ग कीचड़ और भारी फिसलन से भर जाता है, जिससे जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों और दूर-दराज से अपने जरूरी कामों के लिए आने वाले आम ग्रामीणों का चलना मुहाल हो गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।
विकास की बड़ी कागजी इमारत: धरातल पर बदहाली की तस्वीर
सरकार का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर ही लोगों को जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र, वृद्धा पेंशन, मुखिया व पंचायत सचिव से जुड़ी सभी सरकारी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना था। इसी सोच के तहत दरियापुर में पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया गया था:
भवन शानदार, रास्ता बदहाल: करोड़ों की लागत से बना यह भवन बाहर से तो भव्य नजर आता है, लेकिन विडंबना यह है कि इस आलीशान इमारत तक पहुँचने के लिए कोई सुगम पहुंच पथ (Approach Road) ही नहीं है।
कीचड़ और जलभराव का साम्राज्य: मुख्य सड़क से पंचायत भवन को जोड़ने वाली संपर्क सड़क पूरी तरह कच्ची और गड्ढों से भरी है। थोड़ी सी बारिश होते ही यह रास्ता किसी दलदल में तब्दील हो जाता है, जिसमें वाहन तो दूर, पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं रहता।
आम जनता और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें
दरियापुर पंचायत के ग्रामीण अपने छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए इस भवन तक पहुँचने को विवश हैं, लेकिन रास्ते की खराबी के कारण उन्हें भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है:
महिलाओं और वृद्धों की लाचारी: पेंशन या अन्य सरकारी योजनाओं के सत्यापन के लिए आने वाले बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह कीचड़ भरा रास्ता पार करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। कई बार फिसलकर लोग चोटिल भी हो चुके हैं।
साइकिल और बाइक चालकों की फजीहत: दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग पूरी तरह बंद सा हो जाता है। बाइक के पहिए कीचड़ में फंस जाते हैं, जिससे लोगों को अपने वाहन खींचकर ले जाने पड़ते हैं।
लाखों रुपए खर्च, फिर भी सुधि लेने वाला कोई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन का उपयोग केवल भवन की दीवारों को खड़ा करने में कर दिया गया, लेकिन बुनियादी जरूरतों जैसे एप्रोच रोड, नाला निर्माण और साफ-सफाई पर किसी का ध्यान नहीं गया:
अधिकारियों की उदासीनता: स्थानीय लोगों ने कई बार इस रास्ते की बदहाली की शिकायत प्रखंड प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से की, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले।
बीपीआरओ (BPRO) की कार्यशैली पर सवाल: इस पूरे मामले को लेकर पंचायत के लोगों में प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक रास्ता नहीं बनेगा, तब तक इस बहुउद्देशीय भवन का कोई वास्तविक लाभ जनता को मिल ही नहीं सकता।
दरियापुर पंचायत सरकार भवन तक पहुँचने वाली इस कीचड़ भरी और बदहाल सड़क की समस्या ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो लाखों रुपए की लागत से बना यह भवन सफेद हाथी साबित होगा। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस संपर्क सड़क का निर्माण या पक्कीकरण कराया जाए, ताकि आम जनता को नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके और पंचायत सरकार भवन अपने वास्तविक उद्देश्यों को पूरा कर सके।