बोधगया पहुंचे सांसद मनोज तिवारी, बिहार के पर्यटन विकास पर जोर; 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी

बोधगया। बिहार में पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने और राज्य के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति बिहार के दौरे पर पहुंची है। समिति के साथ दिल्ली के सांसद और भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी भी बोधगया पहुंचे। यहां उन्होंने पर्यटन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और बिहार को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।

बोधगया में जागरण प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान मनोज तिवारी ने कहा कि संसदीय स्थायी समिति का बिहार दौरा राज्य में परिवहन, पर्यटन और संस्कृति के विकास की संभावनाओं को समझने के उद्देश्य से किया जा रहा है। समिति बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों का जायजा ले रही है और यह समझने का प्रयास कर रही है कि इन स्थानों पर आधारभूत सुविधाओं का किस तरह विस्तार किया जा सकता है।

सांसद ने कहा कि बिहार में धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बोधगया जैसे विश्व प्रसिद्ध स्थल के साथ-साथ राजगीर, नालंदा, वैशाली, पावापुरी, गया और अन्य स्थानों को बेहतर तरीके से विकसित किया जाए तो राज्य में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हो सकती है।

बिहार को पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का लक्ष्य

मनोज तिवारी ने कहा कि संसदीय समिति के दौरे का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बिहार को पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। इसके लिए केवल पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पर्यटकों के लिए बेहतर सड़क, रेल, हवाई संपर्क, ठहरने की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित गाइड जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा।

बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं जिनका देश और विदेश में विशेष महत्व है। बोधगया बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। यहां हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विकास का सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है।

सांसद ने बताया कि पर्यटन विकास के लिए पूरे बिहार में केंद्र की ओर से करीब 25 हजार करोड़ रुपये लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार के फंड के साथ केंद्र की योजनाओं का समन्वय कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बोधगया को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में और मजबूत करने की जरूरत

बोधगया की पहचान केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थल के रूप में है। भगवान बुद्ध से जुड़े इस पवित्र स्थल पर श्रीलंका, जापान, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, वियतनाम सहित कई देशों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या को देखते हुए बोधगया में ऐसी सुविधाओं की आवश्यकता है, जिससे विदेशी पर्यटकों को भाषा, परिवहन, आवास और स्थानीय मार्गदर्शन से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े। पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि बोधगया को बेहतर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए तो इसका लाभ गया और आसपास के पूरे क्षेत्र को मिल सकता है।

संसदीय समिति के दौरे को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति के सदस्य पर्यटन से जुड़े लोगों, स्थानीय प्रशासन और अन्य हितधारकों से बातचीत कर जमीनी समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

गाइड एसोसिएशन ने विदेशों में सेंटर खोलने की मांग उठाई

बोधगया में हुई बैठक के दौरान स्थानीय गाइड एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी अपनी समस्याएं और मांगें संसदीय समिति के सामने रखीं। एसोसिएशन ने विशेष रूप से विदेशों में गाइड सेंटर खोलने की मांग की।

गाइड एसोसिएशन का तर्क है कि यदि विदेशों में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएं जहां बोधगया और भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराई जा सके, तो विदेशी पर्यटकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। इससे अधिक संख्या में पर्यटकों को बिहार की ओर आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

एसोसिएशन की ओर से यह भी कहा गया कि विदेशों में रहने वाले संभावित पर्यटकों को भारत यात्रा, बोधगया यात्रा, स्थानीय परिवहन और पर्यटन स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थित तंत्र की आवश्यकता है।

स्थानीय गाइड कार्यालय खोलने की मांग

बैठक में बोधगया में स्थानीय स्तर पर गाइड कार्यालय खोलने की मांग भी रखी गई। स्थानीय गाइडों का कहना है कि एक व्यवस्थित कार्यालय होने से पर्यटकों को प्रमाणित और प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

गाइड पर्यटन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। विदेशी पर्यटक जब किसी ऐतिहासिक या धार्मिक स्थल पर पहुंचते हैं तो उन्हें वहां के इतिहास, संस्कृति और धार्मिक महत्व को समझने के लिए स्थानीय विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। यदि गाइडों की व्यवस्था अधिक संगठित हो तो पर्यटकों का अनुभव बेहतर हो सकता है।

एसोसिएशन ने अपनी समस्याओं और मांगों को समिति के सामने रखा, हालांकि प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने के लिए अधिक समय नहीं मिल पाने की बात भी सामने आई।

पर्यटन से रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद

बिहार में पर्यटन के विस्तार का एक बड़ा लाभ रोजगार के क्षेत्र में भी हो सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, रेस्तरां, परिवहन, गाइड, स्थानीय हस्तशिल्प, स्मृति चिह्न, टैक्सी सेवा और अन्य छोटे व्यवसायों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

बोधगया जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र में इसका प्रभाव और व्यापक हो सकता है। विदेशी पर्यटकों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित गाइड, अनुवादक, परिवहन सेवा और अन्य सुविधाओं की मांग बढ़ सकती है।

यदि पर्यटन परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ा जाए तो पर्यटन विकास का लाभ सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंच सकता है।

जिलाधिकारी ने किया समिति के सदस्यों का स्वागत

बैठक के दौरान गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर और एडीएम सह बीटीएमसी के प्रभारी सचिव पारितोष कुमार ने संसदीय स्थायी समिति के सदस्यों और अधिकारियों का स्वागत किया।

समिति के सदस्यों को भगवान बुद्ध और भगवान विष्णु से संबंधित प्रतीक चिह्न तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन की ओर से बोधगया और गया क्षेत्र की पर्यटन व्यवस्था से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।

बोधगया में प्रशासनिक अधिकारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत का उद्देश्य स्थानीय स्तर की समस्याओं और विकास की संभावनाओं को समिति के सामने रखना था।

धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन पर भी जोर

बिहार में पर्यटन की संभावनाएं केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं हैं। राज्य का इतिहास, प्राचीन विश्वविद्यालय, बौद्ध विरासत, जैन तीर्थ, हिंदू धार्मिक स्थल और स्थानीय संस्कृति इसे एक व्यापक पर्यटन केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं।

नालंदा का प्राचीन विश्वविद्यालय, राजगीर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत, वैशाली का ऐतिहासिक महत्व और पावापुरी का जैन तीर्थ पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इन सभी स्थानों को बोधगया के साथ एक व्यापक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।

यदि पर्यटकों को एक ही यात्रा में कई महत्वपूर्ण स्थलों की सुविधा उपलब्ध हो, तो बिहार में पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ सकती है। इसका सीधा प्रभाव स्थानीय व्यवसाय और रोजगार पर पड़ सकता है।

सड़क, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण

पर्यटन विकास के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। पर्यटन स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क और रेल संपर्क मजबूत होना जरूरी है। साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

संसदीय स्थायी समिति का दौरा परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़े इन सभी पहलुओं को एक साथ देखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बोधगया के बाद समिति के सदस्य सड़क मार्ग से राजगीर और नालंदा के लिए रवाना हुए।

समिति के सदस्यों के लिए यात्रा के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। बोधगया से रवाना होने के बाद टीम राजगीर और नालंदा पहुंचकर वहां की पर्यटन और विरासत से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लेने वाली है।

बिहार के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण दौरा

संसदीय स्थायी समिति का बिहार दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब राज्य में पर्यटन को आर्थिक विकास और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच योजनाओं के समन्वय से यदि पर्यटन परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जाता है तो बिहार की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।

मनोज तिवारी द्वारा पर्यटन विकास के लिए करीब 25 हजार करोड़ रुपये के केंद्रीय निवेश की जानकारी दिए जाने से इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर विकास कार्यों की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव जमीन पर परियोजनाओं के क्रियान्वयन, स्थानीय जरूरतों के समावेश और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर निर्भर करेगा।

कुल मिलाकर बोधगया में संसदीय स्थायी समिति के दौरे ने बिहार के पर्यटन विकास को लेकर नई चर्चा को जन्म दिया है। सांसद मनोज तिवारी ने बिहार को पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। वहीं स्थानीय गाइड एसोसिएशन ने विदेशों में गाइड सेंटर और बोधगया में स्थानीय गाइड कार्यालय खोलने जैसी मांगों को सामने रखा है।

बिहार के पास धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन की बड़ी विरासत है। यदि बुनियादी सुविधाओं, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, स्वच्छता और प्रशिक्षित मानव संसाधन को मजबूत किया जाता है, तो बोधगया के साथ-साथ राजगीर, नालंदा और राज्य के अन्य पर्यटन स्थलों को भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान मिल सकती है। संसदीय समिति का यह दौरा इसी संभावित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।