नगर निगम कर्मचारियों की तीन सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू; हड़ताल की पूर्व संध्या पर निकला आक्रोशपूर्ण जुलूस, शहर की व्यवस्था चरमराई
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर में इन दिनों प्रशासनिक और स्थानीय निकाय व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। अपनी लंबे समय से लंबित न्यायसंगत मांगों को मनवाने के लिए भागलपुर नगर निगम के सभी स्थायी, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारी आखिरकार आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। बिहार लोकल बॉडीज एम्प्लाइज फेडरेशन एवं बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर नगर निगम के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन (बेमियादी) पूर्ण हड़ताल का आगाज कर दिया है। हड़ताल के ठीक एक दिन पूर्व कर्मचारियों ने शहर में एक विशाल और आक्रोशपूर्ण मशाल/जुलूस निकालकर सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकाली। इस हड़ताल के कारण शहर की साफ-सफाई, जलापूर्ति और अन्य नागरिक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने लगी हैं।
हड़ताल की पूर्व संध्या पर निकला जोरदार जुलूस, गूंजे नारे
अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पहले नगर निगम कर्मियों ने अपनी एकजुटता और ताकत का अहसास कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी:
सड़कों पर उतरे सैकड़ों कर्मचारी: हड़ताल की पूर्व संध्या पर भागलपुर नगर निगम परिसर से एक आक्रोशपूर्ण जुलूस निकाला गया। हाथों में बैनर-पोस्टर लिए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सैकड़ों की संख्या में सफाई कर्मी, कार्यालय के बाबू और अन्य निगमकर्मी सड़कों पर मार्च करते नजर आए।
शोषण के खिलाफ हुंकार: जुलूस के दौरान कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है, जिससे मजबूरन उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान पूरा इलाका कर्मचारियों के नारों से गूंज उठा।
मुख्य तीन सूत्री मांगें, जिन पर अड़े हैं नगर निगम कर्मी
कर्मचारियों का मुख्य संघर्ष शासन प्रशासन के सामने अपनी तीन प्रमुख और बुनियादी मांगों को पूरा कराने के लिए है:
नियमितीकरण एवं पूर्ण सेवा सुरक्षा (Regularization and Job Security): वर्षों से निगम में अपनी सेवाएं दे रहे संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को स्थायी किया जाए तथा उनकी नौकरियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समाप्ति (End of Contract System): निगम कार्यों में चलाई जा रही ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाए, जिसके तहत मजदूरों का आर्थिक शोषण किया जाता है।
वेतन वृद्धि एवं समयबद्ध पदोन्नति (Salary Hike and Promotion): महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों का वेतनमान बढ़ाया जाए और नियमानुसार उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए।
हड़ताल के कारण शहर की व्यवस्था चरमराई, आम जनता हलकान
नगर निगम कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से सिल्क सिटी की दैनिक व्यवस्था पर सीधा और गंभीर असर पड़ा है:
ठप हुई सफाई व्यवस्था: शहर के दर्जनों वार्डों से कचरे का उठाव पूरी तरह बंद हो गया है। गलियों और सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर लगने लगे हैं, जिससे महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है।
जलापूर्ति और स्ट्रीट लाइट की समस्या: जलकल शाखा के कर्मियों के हड़ताल पर रहने से कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके अलावा, कार्यालयीन कामकाज, ट्रेड लाइसेंस, नक्शा पास कराने और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने आने वाले आम नागरिकों को भी मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
भागलपुर नगर निगम कर्मचारियों द्वारा तीन सूत्री मांगों के समर्थन में शुरू की गई यह अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। जब तक सरकार और निगम प्रबंधन कर्मचारियों के साथ सकारात्मक बातचीत कर उनकी मांगों का समाधान नहीं निकालते, तब तक शहर की व्यवस्था पटरी पर लौटनी मुश्किल है। आम जनता इस प्रशासनिक गतिरोध के बीच पिसने को मजबूर है, और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।