मुजफ्फरपुर: सावन में बाबा गरीबनाथ धाम पहुंचे कांवरियों की उमड़ी भारी भीड़; प्रशासनिक दावों के विपरीत आरडीएस कॉलेज स्थित टेंट सिटी में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव, 2000 कांवरियों की क्षमता वाले शिविर में व्यवस्थाएं नाकाफी

मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार के प्रसिद्ध शिवधाम मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर से सावन के पवित्र महीने में एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली खबर सामने आ रही है। सावन के इस पावन पर्व पर बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करने के लिए देश के विभिन्न कोनों से आने वाले शिवभक्तों और कांवरियों की भीड़ में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। श्रद्धालुओं की इस अपार भीड़ को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा आरडीएस कॉलेज (RDS College) के परिसर में एक विशाल टेंट सिटी का निर्माण कराया गया है, जिसमें लगभग 2000 कांवरियों के ठहरने का दावा किया गया था। हालांकि, जमीनी हकीकत इन प्रशासनिक दावों से कोसों दूर है। टेंट सिटी में ठहरने वाले कांवरियों का आरोप है कि वहां पीने के साफ पानी, बिजली की सुचारू व्यवस्था, पंखे, शौचालय, और चिकित्सा सुविधाओं का भारी अभाव है। प्रशासनिक दावों के विपरीत व्यवस्थाएं अपर्याप्त होने के कारण दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कांवरियों की आस्था और प्रशासनिक इंतजामों के बीच के इस अंतर्विरोध, टेंट सिटी की जमीनी हकीकत, कांवरियों की परेशानियों और प्रशासनिक दावों के पोल खुलने की पूरी दास्तान को आइए एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण के जरिए समझते हैं।

सावन में कांवरियों का सैलाब और आरडीएस कॉलेज टेंट सिटी की परिकल्पना

सावन के महीने में मुजफ्फरपुर का कोना-कोना 'बोल बम' के नारों से गूंज उठता है। लाखों की संख्या में कांवरिया सुल्तानगंज या अन्य घाटों से गंगाजल लेकर बाबा गरीबनाथ को अर्पित करने पहुंचते हैं।

विशाल टेंट सिटी का निर्माण: इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और मुफ्त आश्रय देने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम के सहयोग से आरडीएस कॉलेज परिसर में एक भव्य टेंट सिटी बनाई गई।

2000 कांवरियों की क्षमता का दावा: प्रशासन की ओर से यह प्रचारित किया गया था कि इस टेंट सिटी में एक साथ 2000 कांवरियों के रुकने, उनके सोने के लिए गद्दे-बिस्तर, पेयजल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

हकीकत से रूबरू होते कांवरिया: जब थक-हारकर दूर-दराज से पहुंचे कांवरिया इस टेंट सिटी में दाखिल हुए, तो उन्हें बुनियादी सुविधाओं के नाम पर केवल खाली तंबू और बदइंतजामी ही हाथ लगी।

प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच भारी अंतर

कांवरियों और स्थानीय लोगों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, टेंट सिटी में की गई व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं में आक्रोश है।

पेयजल और स्वच्छता की बदहाली: टेंट सिटी के भीतर शुद्ध पेयजल की भारी किल्लत है। पीने के पानी के जो नल लगाए गए हैं, वे या तो खराब हैं या उनसे गंदा पानी आ रहा है। इसके अलावा शौचालयों की नियमित सफाई न होने के कारण वहां भीषण दुर्गंध फैली हुई है।

बिजली और उमस भरी गर्मी: सावन के इस उमस भरे मौसम में टेंट के भीतर पंखों की व्यवस्था या तो नदारद है या बिजली कटने पर इनवर्टर का बैकअप नहीं है। कांवरिया गर्मी और मच्छरों के प्रकोप के बीच रात बिताने को मजबूर हैं।

चिकित्सा शिविर की खानापूर्ति: स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए जाने वाले मेडिकल कैंप में डॉक्टरों और जरूरी जीवनरक्षक दवाओं की अनुपस्थिति के कारण बीमार या थके हुए कांवरियों को प्राथमिक उपचार तक के लिए भटकना पड़ रहा है।

 कांवरियों का दर्द और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर बाबा के दरबार में पहुंचने वाले शिवभक्त जब प्रशासनिक व्यवस्थाओं की ऐसी तस्वीर देखते हैं, तो उनका दिल बैठ जाता है।

थके-हारे भक्तों की दुर्दशा: झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल सहित बिहार के विभिन्न जिलों से आने वाले कांवरियों ने बताया कि वे प्रशासन के भरोसे इस टेंट सिटी में रुके थे, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं ने उनकी यात्रा की सारी थकान को और बढ़ा दिया है।

सुरक्षा और सामान की चिंता: टेंट में पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा गार्डों की कमी के कारण कांवरियों के मन में अपने सामान और बैग की चोरी होने का डर हमेशा सताता रहता है।

अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी सुधार नहीं: स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं और बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

राजनीतिक-सामाजिक प्रतिक्रिया और सुधार की मांग

इस कुप्रबंधन को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

लापरवाही पर जवाबतलबी की मांग: विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि टेंट सिटी के नाम पर आवंटित होने वाले सरकारी बजट और फंड की जांच होनी चाहिए, क्योंकि कागजों पर जो सुविधाएं दिखाई जाती हैं, वे जमीन पर नजर नहीं आतीं।

तत्काल सुधार के निर्देश: बुद्धिजीवियों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेते हुए टेंट सिटी में पानी, बिजली और साफ-सफाई की व्यवस्था को युद्ध स्तर पर दुरुस्त कराना चाहिए ताकि बाबा के दरबार में आने वाले भक्तों को कोई कष्ट न हो

मुजफ्फरपुर के आरडीएस कॉलेज स्थित टेंट सिटी में सावन के दौरान कांवरियों के लिए अपर्याप्त सुविधाएं यह साबित करती हैं कि प्रशासनिक स्तर पर योजनाएं तो बड़े पैमाने पर बनाई जाती हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग में भारी खामियां रह जाती हैं। बाबा गरीबनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए आने वाले शिवभक्त हमारी मेहमाननवाजी और संस्कृति के प्रतीक होते हैं, ऐसे में उनके साथ इस तरह की दुर्दशा शहर की छवि को धूमिल करती है। समय की मांग है कि जिला प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने के बजाय तुरंत हरकत में आए और टेंट सिटी की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करे, ताकि हर कांवरिया मुस्कुराते हुए सुरक्षित अपने घर लौट सके और बाबा गरीबनाथ की नगरी से एक अच्छा संदेश लेकर जाए।