भागलपुर के विकास को मिली नई रफ्तार राइट्स (RITES) को परामर्श शुल्क की तीसरी किस्त का भुगतान स्वीकृत, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में आएगी तेजी

भागलपुर: स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे भागलपुर के निवासियों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर है। शहर की कायापलट करने वाली प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विकास कार्यों को अब नई गति मिलने वाली है। नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा शहर के विकास के लिए 'परामर्शदाता' (Consultant) के रूप में कार्य कर रही संस्था 'राइट्स' (RITES) को परामर्श शुल्क की तीसरी किस्त के भुगतान की स्वीकृति दे दी गई है। इस वित्तीय मंजूरी के बाद, शहर में लंबित पड़ी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और तकनीकी कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। नगर निगम की ओर से इस संदर्भ में आधिकारिक पुष्टि कर दी गई है, जिससे लंबे समय से अटके कार्यों के पूरा होने का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है 'राइट्स' की भूमिका और क्यों जरूरी था यह भुगतान?

भागलपुर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर के सौंदर्यीकरण, सड़कों के चौड़ीकरण, जल निकासी प्रबंधन (ड्रेनेज), और अत्याधुनिक तकनीकी परियोजनाओं के लिए 'राइट्स' एक तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य कर रही है।

तकनीकी विशेषज्ञता: राइट्स का कार्य परियोजनाओं का डीपीआर (DPR) तैयार करना, साइट का सर्वेक्षण करना और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी करना है।

भुगतान का महत्व: किसी भी बड़ी परियोजना में परामर्श शुल्क का समय पर भुगतान करना अत्यंत आवश्यक होता है। पिछले कुछ समय से प्रशासनिक प्रक्रिया और फंड के तालमेल में देरी के कारण भुगतान फंसा हुआ था, जिसका सीधा असर परियोजनाओं की गति पर पड़ रहा था। तीसरी किस्त की स्वीकृति मिलने से अब राइट्स के विशेषज्ञ अपनी पूरी ऊर्जा और संसाधन इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में लगा सकेंगे।

इन प्रमुख परियोजनाओं पर होगा सीधा असर

परामर्श शुल्क की तीसरी किस्त जारी होने के बाद अब शहर की निम्नलिखित महत्वपूर्ण परियोजनाओं में तेजी आने की पूरी संभावना है:

सड़क और पथ निर्माण (Road Infrastructure): शहर के व्यस्त इलाकों में सड़कों को चौड़ा करने और उनका सुदृढ़ीकरण करने का कार्य, जो राइट्स की देखरेख में चल रहा है, अब निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा हो सकेगा।

ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम (Drainage & Sewerage): जलजमाव की समस्या से निजात दिलाने के लिए जो ड्रेनेज परियोजनाएं चल रही हैं, उनमें तकनीकी बाधाएं अब दूर हो सकेंगी। राइट्स अब मॉनिटरिंग के काम को और अधिक गहनता से कर पाएगा।

सौंदर्यीकरण और स्मार्ट पार्क: स्मार्ट सिटी मिशन के तहत जो पार्क विकसित किए जा रहे हैं या गोलंबरों का सुंदरीकरण हो रहा है, उनमें अब निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ेगी।

ट्रैफिक मैनेजमेंट: शहर के ट्रैफिक सिस्टम को आधुनिक बनाने और सिग्नलिंग के लिए जो सर्वे किए जा रहे थे, उन्हें अब अंतिम रूप दिया जाएगा।

क्या कहती है नगर निगम की रिपोर्ट?

नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। उन्होंने बताया:

"विकास में नहीं होगी कोई बाधा": अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तीसरी किस्त की मंजूरी एक बड़ी उपलब्धि है। इससे प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग और कंसल्टेंसी के कार्य में आने वाली तकनीकी अड़चनें पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

समयबद्ध कार्य की प्रतिबद्धता: निगम ने यह भी सुनिश्चित किया है कि राइट्स को भुगतान के साथ-साथ कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि शहर की जनता को अब विकास कार्यों के नाम पर बेवजह देरी का सामना न करना पड़े। हर 15 दिनों में राइट्स को अपने किए गए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट देनी होगी।

जनता की उम्मीदें: 'अब दिखना चाहिए धरातल पर काम'

शहर की जागरूक जनता और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि भुगतान स्वीकृत होना तो महज एक शुरुआत है। राइट्स और नगर निगम पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह इस बजट का उपयोग शहर की बदहाल स्थिति को सुधारने में करे।

विकास की गति: स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में जगह-जगह खुदाई के बाद सड़कों का न बनना एक बड़ी समस्या है। वे उम्मीद करते हैं कि तीसरी किस्त का भुगतान होने के बाद अब इन खुदाई वाली जगहों को जल्द से जल्द भरकर सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाएगा।

गुणवत्ता की निगरानी: केवल कागजों पर काम न हो, बल्कि राइट्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो निर्माण हो रहा है, वह लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

अगला कदम: समीक्षा बैठक और लक्ष्य

आने वाले दिनों में नगर निगम के उच्च अधिकारियों और राइट्स के प्रतिनिधियों के बीच एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि:

किस वार्ड में निर्माण कार्य सबसे धीमा है।

अगले छह महीनों में कौन-सी प्रमुख परियोजनाएं पूरी कर जनता को समर्पित की जाएंगी।

फंड की चौथी किस्त जारी करने से पहले राइट्स द्वारा किए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कैसे किया जाएगा।

भागलपुर के विकास के लिए यह एक सकारात्मक मोड़ है। परामर्श शुल्क की तीसरी किस्त का भुगतान न केवल राइट्स के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भागलपुर को एक आधुनिक और सुविधायुक्त शहर बनाने के संकल्प को भी मजबूती देता है। अब जरूरत इस बात की है कि नगर निगम का प्रशासनिक अमला और राइट्स की तकनीकी टीम कंधे से कंधा मिलाकर काम करें ताकि भागलपुर की सड़कें और बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द स्मार्ट सिटी के मानकों के अनुरूप बन सकें। जनता अब सिर्फ वादों की फाइलों में नहीं, बल्कि अपने शहर की सड़कों और गलियों में इस विकास की गूंज देखना चाहती है।